Saturday, December 31, 2011

पर्यटक स्थल बनत विस्फी, महिषी पर सेहो अछि नजरि - (रिपोर्ट नवेंदु कुमार झा)


पर्यटक स्थल बन विस्फी, महिषी पर सेहो अछि नरि
मिथिलांचलक महापुरुष सभक जन्म स्थली के पर्यटन स्थलक रूप मे विकसित करबाक योजना पुरस्कार काज प्रारंभ कऽ देलक अछि। सरकारक योजना महाकवि विद्यापति आ विद्वान तथा दार्शनिक मंडन मिश्रक जन्म स्थली के पर्यटन स्थलक रूप मे विकसित कऽ एहि दिस पर्यटक सभ के विशेष रूपे विदेशी पर्यटक के आकर्षित करबाक योजना अछि। एहि वास्ते महाकवि विद्यापतिक जनमस्थल राजधानी पटना सॅ 110 किलोमीटर दूर मधुबनी जिलाक विस्फी मे पर्यटक काम्पलेक्स, आडियोटोरियम आ पुस्तकालय बनैबाक योजना के पर्यटन विभाग अंतिम रूप देलक अछि जाहि पर 47 लाख टाका खर्च होयत। विभागक सूत्रक अनुसार ई सभ पर करक लेल आधारभूत संरचना उपलब्ध करायब विभागकक प्राथमिकतामे अछि। बिहार राज्य पर्यटन निगम सेहो एहि सभ जगह दिस पर्यटक के आकर्षित करबाक लेल प्रयास कऽ रहल अछि। पर्यटन मंत्री सुनील सभ जन्मस्थली के पर्यटन स्थलक रूप मे विकसित करबाक योजना बनौलक। श्री पिन्टु जनौलनि जे विद्यापति देशक प्रख्यात व्यक्ति आ बिहारक गौरव छलाह। हुनक जन्मस्थली के पर्यटन स्थल बनेबाक मांग कतेको दिन सॅ भऽ रहल छल जे आब साकार भऽ रहल अछि जहिना पश्चिम बंगालक पर्यटन विभाग कवि गुरु रविन्द्र नाथ ठाकुर सॅ संबोधित स्थल सभक दिस पर्यटक के खींचि आमदनी अर्जित करैत अछि तहिना बिहार पर्यटन अपन योजना बनौलक अछि।
एकरा संगहि आठम शताब्दीक प्रख्यात विद्वान आ दार्शनिक मंडल मिश्र जन्मस्थली दिस विशेष रूप सॅ विदेशी पर्यटक के आकर्षित करबाक लेल एहि सॅ संबंधित जनतब पर्यटन विभाग, वेबसाइट पर उपलब्ध कराओल गेल अछि। मंडन मिश्र आदि शंकराार्यक संग सहरसा जिलाक महिषि गाम मे हिन्दू दर्शन गुण दोष पर शास्त्रार्थ मे हारल छलाह। पर्यटन मंत्री जनतब देलनि जे पर्यटक सभ के आकर्षित करबाक लेल विभाग सहरसा मे कोसी महोत्सवक आयोजित करैत अछि आ जल्दीए आन कतेको तरहक गतिविधि प्रारंभ कयल जायत।
एहि मध्य, मधुबनी मे स्थापित होमय बाला मिथिला चित्र कला संस्थान पर संग्रहालयक लेल 3.10 एकड़ जमीनक व्यवस्था मधुबनी नगर परिषद् द्वारा कऽ लेल गेल अछि। बिहार विधान परिषद्क सभापति ताराकांत झाक कला संस्कृति मंत्री डॉ0 सुखदा पाण्डेय आ पर्यटन मंत्री सुनील कुमार पिन्टुक संग भेल बैसार मे एहि योजनाक स्वीकृति दऽ देल गेल। एहि संस्थानक निर्माण पर गोटेक 6 करोड़ टाका खर्च होएबाक उम्मीद अछि। ताराकांत झा जनब देलनि अछि जे एहि संस्थान मे मिथिला चित्रकलाक एक वर्षीय डिप्लोमा आ दू वर्षीय डिग्रीक पाठ्यक्रम पढ़ाई प्रशिक्षण प्रारंभ होयत। परिसर मे निदेशक आ शिक्षक सभक नियुक्ति कयल जायत। एहि संस्थानक भवन निर्माणक लेल विशेष परियोजना प्रतिवेदन तैयार कयल जा रहल अछि। 

पुरस्कारक बजार मे लागि रहल बोली (रिपोर्ट- नवेंदु कुमार झा)


पुरस्कारक बजार मे लागि रहल बोली
देशक प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था साहित्य आकदमी अपन वार्षिक पुरस्कारक घोषणा कऽ देलक मुदा एहि वर्ष सेहो मैथिली भाषा पुरस्कारक घोषणा नहि भेल। एकर कारण ना तऽ परामर्शदात्री समितिक बैसक नहि होयब जनाओल गेल अछि जे किछु हद धरि सही सेहो अछि मुदा जे चर्चा अछि ओकर मोताबिक एहि बैसक मे संभावित नाम पर सहमति नहि बनि सकल तेॅ एखन एकरा टारि देल गेल अछि। दरअसल भारि-भरकम टाकापुरस्कार एहि भाषाक लेल बाधा बनल अछि। संभावित उम्मीदवार सभक नजरि तऽ एहि पर अछिए परामर्शी सभक नजरि सेहो एहि पर लागल रहैत अछि। साहित्यिक क्षेत्र मे भऽ रहल चर्चाक अनुसार मैथिली भाषाक साहित्यक अकादमी पुरस्कारक लेल बजार लागि गेल अछि आ एहि पर कब्जा करबाक लेल बोली लागि रहल अछि। साहित्यक एहि शेयर बाजार मे सूचकांक उतार चढ़ावक मध्य एखन धरि योग्य शेयर पर अपन मोहर लगैबाक प्रति परामर्शी अनिश्चयक स्थिति मे छथि।
अकादमीक प्रसादक लेल दरभंगा आ दरभंगा सॅ बारहक दू टा योग्य विद्वान मे होड़ लागल अछि। एक दिस लक्ष्मीक व्यागक बात भऽ रहल अछि तऽ दोसर दिस लक्ष्मी कऽ त्यागक संगहि कुबेरक आह्वान कयल जा रहल अछि। तऽ दोसर दिस पुरस्कारक लाइन मे ठाढ़ एकटा पोथीक मूल लेखक अपन लक्ष्मीक लेल गोहारि कऽ रहल छथि। आश्चर्य ई अछि जे जाहि पोथीक भूमिका लखबा सॅ दरभंगाक पैघ विद्वान ई कहि आपस कऽ देलनि जे ई पोथी लेखकक अपन लेखनी नहि अछि तथापि ओ ताल ठोकि दावेदारी कऽ लाइन मे अछि।
दरअसल मैथिलीक परामर्शी साहित्यक जौहरी छथि। हुनक चमत्कार स केओ साहित्यकार भऽ अकादमीक साहित्यिक यात्रा कऽ सकैत छथि। से पुरस्कारक दावेदार सभ सेहो जनैत छथि आ ते मैदान मे डटल छथि। मुदा मैदान मे दूटा डटर दावेदारक कारण हि बेर परामर्शी सेहो चित भेल छथि। ओ एखन अनिर्णयक स्थिति मे छथि। शायद हुनका एहि बातक आभास अछि जे ई दूनू दावेदार पुरस्कारक कुस्तीक मैदान मे शकि जयताह तऽ हुनक काज आसान भऽ जायत। तेॅ नाम के गोपनीय राशि पुरस्कारक बाजार खोलि कऽ रखने छथि। जहिना एकटा दाबेदार मैदान मे कमजोर पड़ला आ हुनक सूचकांक खसल कि परामर्शी पुरस्कारक घंटी बजा देताह। आब कर शेयर ओघरायल आ ककरा साहित्यक ताज भेटत एहि लेल मैथिली साहित्य प्रेमी के एखन धैर्य राख पड़त।
साहित्य अकादमी मे सम्मिलित सभ भाषाक पुरस्कारक लेल मापदंड आ ओकर प्रक्रिया तय अछि। वर्षक अंतिम सप्ताह मे प्रायः पुरस्कारक घोषणा कऽ देल जात अछि। एहि लेल पोथीक चयनकक प्रक्रिया वर्ष भरि चलैत अछि। सभ भाषा परामर्शदात्री समिति एहि प्रक्रिया के समय सीमाक भीतर पूरा करबा मे सक्षम अछि तऽ भला मैथिली परामर्शी सभके एहि मे विलम्ब होयबाक कारण नहि बुझि पड़ैत अछि। एकर कारण ई भऽ सकैत अछि जे या तऽ विद्वान परामर्शी सभक स्तरक पोथी पुरस्कारक लान मे नहि रहैत अछि अथवा जे पोथी पुरस्कारक लाइन मे रहैत अछि ओहि स्तरक विद्वान परामर्शी नहि छथि। ई दूनू कारण जँ नहि अछि तऽ भला समय सीमाक भीतर अंतिम निर्णय किएक नहि सोझा अबैत अछि। अकादमी प्रसाद येन-केन-प्रकारेन प्राप्तिक इच्छा मैथिली साहित्य के नोकसान पहूचा रहल अछि। मात्र प्रसादक प्राप्तिक वास्ते साहित्य सृजन करब कोनो भाषाक साहित्यक लेल लाभदायक नहि अछि। एहि सॅ साहित्यिक स्तर मे ह्रास होयत। साहित्य समाजक ना अछि। जँ स्तरहीन साहित्य सृजन के प्रश्रय देल गेल तऽ सामाजिक दशा-दिशा प्रभावित होयत। साहित्य संसार के पुरस्कारक बाजार बनायब किन्नहु उचित नहि अछि। पुरस्कार छोट होकि पैघ ओकर चयन प्रक्रियाक सीमाक पालन होयब आवश्यक अछि। अन्यथा कतेको आशंका के जन्म दऽ सकैत अछि। जेना एखन मैथिली साहित्य जगत मे व्याप्त अछि।
मैथिली साहित्य संसार मे कतेको विद्वान पुरस्कारक चिन्ता कयने बिनू अपनी लेखनीक छाप छोड़ि अपन अमर कृति दऽ विदा भऽ गेलाह। मुदा वर्तमान मैथिली साहित्य जेना पुरस्कारक जाल मे फँसि गेल अछि। हजर टकिया सॅ लखटकिया पुरस्कारक लेल साहित्य सृजनक होड़ लागल अछि। पुरस्कारक बजारवाद मैथिली साहित्य के नोकसान पहुँचा रहल अछि। तेॅ पुरस्कारक लालसा छोड़ि साहित्यक स्तर पर ध्यानदेब आवश्यक अछि। पुरस्कार देब विद्वान परामर्शी सभक काज अछि आ जँ हुनका फ्री हैण्ड छोड़ल गेल तऽ संभव अछि जे स्तरीय पोथी के सम्मान भेटि सकत। 

अन्धरा ठाढ़ी मे बनत स्मारक, सरकार के याद अयलनि वाचस्पति मिश्र - (रिपोर्ट नवेंदु कुमार झा)


अन्धरा ठाढ़ी मे बनत स्मारक, सरकार के याद अयलनि वाचस्पति मिश्र
बिहारक शताब्दी वर्षक अवसर पर चुनल गेल बिहार गौरव गीत मे मिथिलाक उपेक्षाक भरपा करबा मे नीतीश सरकार लागि गेल अछि। मिथिलावासीक आक्रोश के दबबऽ लेल पहिने जानकी नवमी छुट्टी पर मोहर लगौलाक बाद मधुबनी मे चित्रकला संस्थान खोलब, महाकवि विद्यापति आ मंडल मिश्रक जन्मस्थली के पर्यटन स्थल बनैबाक योजनाके मूर्त रूप ऽ अपना आप के पैघ मैथिल हितैषी होएबाक लेल बेचैन अछि आ आब नवम् शताब्दीक संस्कृत प्रख्यात विद्वान पंडित वाचस्पति मिश्रक जन्म स्थली मधुबनी जिलाक अन्धराठाढ़ी मे स्मारक बनैबाक घोषणा कयलक अछि। भामतीक लेखक पंडित मिश्रक स्मारक स्थल लग एकटा पर्यटक काम्पलेक्स आ पुस्तकालय सेहो बनाओल जायत। एहि वास्ते ग्रामीण सभ दू एकड़ सॅ बेसी जमीन उपलब्ध करौलनि अछि। एहि क्षेत्र क सौंदर्यींकरण सेहो कयल जायत। जाहि पर 37 लाख टाका खर्च होयत संगहि गाम मे स्थित म्यूजियमक आधुनिकीकरण पर दू लाख टाका खर्च कयल जायत।

साहित्यिक जौहरी छथि अकादमीक मैथिली परामर्शी - (रिपोर्ट नवेन्दु कुमार झा)


साहित्यिक जौहरी छथि अकादमीक मैथिली परामर्शी

      साहित्य अकादमीक महिला लेखिका सभक शीतकालीन दक्षिण भारतक मात्रा समाप्त भऽ गेल अछि। एहि यात्रा मे मैथिली साहित्यक परामर्श दात्री समिति जहि तरह महिला मैथिली लेखिका सभ चयन कयने छल एहि सॅ तऽ परामर्शदात्री सभक विद्वता पर प्रश्न चिन्ह लगायब आवश्यक बुझि पड़ैत अछि। मैथिली साहित्यक संग जाहि तरहे अपना आप के विद्वान कहय वाला परामर्शी मजाक कऽ रह छथि ओहि सॅ साहित्यक गरिमा कम भऽ रहल अछि। एकर प्रभाव सभक सोझा अछि। आम मैथिल जन अपन भाषा सॅ दूर भऽ रहल छथि। आ अपना घर-परिवार मे मैथिली छोड़ि आन भाषाक बेड़क प्रयोग करय वाला सभ साहित्य अकादमीक यात्राक आनन्द उठा रहल छथि। वर्तमान मे सम्पन्न मैथिली लेखिकाक शीत यात्रा मे जाहि तरहे मानवाधिकारक सहधर्मी के महिला मैथिली साहित्यकारक सहकर्मी बनाओल गेल एहि सॅ मैथिली साहित्यक परामर्शी सभक साहित्यिक दिवालियापन सोझा आबि गेल अछि। ई एहि बातक संकेत करैत अछि जे मैथिली भाषाक मे बढ़ैत अवसर मे चाटुकारिताक अवसर सेहो बढ़ि रहल अछि। प्रदेश मे महिला सशक्तिकरणक चलि रहल अभियानक क्रम मे मिथिलाक प्रतिनिधि सामाजिक सांस्कृतिक संस्था मे मैथिल महिला के स्थान देबाक नाम पर सक्रियता देल गेल आ आब एहि अधिकारक उपयोग मैथिल साहित्यक सहकर्मी बनैबाक लेल करब कतेक उचित अछि एकर निर्णय तऽ विद्वान साहित्यकार लोकनि करताह। एहि यात्राक क्रम मे आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी मे गोटेक 30टा महिला अपन आलेख पढ़लनि। मुदा किछु एहनो मैथिल महिला साहित्यकार छलीह जे अपन परमेश्वरक कयल परिश्रमक वाचन करबा मे थकमकाइत छलीह। खैर कोनो बात नहि देशक सभ तरहक संस्था सुख-सुविधाक उपयोगक लेल बनल अछि। जँ साहित्य अकादमीक एहि सुख-विलासक अनुभव मैथिली परामर्शी किछु मैथिलीक महिला साहित्यकारक करौलनि तऽ एहि मे हर्जे कोन। आखिर किछु साहित्यकारक खुट्टा मजगूत छनि आ परामर्शी सभक परामर्शक अवधि समाप्त भेलाक बाद ई परामर्शी सभ ओहि खूटा मे बन्हि पाउज करबाक जोगार भऽ सकैत अछि। ई परामर्शी सभ कतेको जागरूक छथि एकर प्रमाण सोझा अछि। साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित पोथी विद्यापति जकर लेखक रमानाथ झा छथि। ओकर हिन्दी अनुवाद बजार मे उपलब्ध अछि जकर मुख्य पृष्ठ पर लेखकनाम रामनाथ झा लिखल अछि। एहि विद्वान सभके एहि बातक कोनो चिन्ता नहि अछि। अकादमी सँ एहि पोथीक मुख्य पृष्ठ बदलबाक लेल शायद एखन धरि कोनो प्रयास नहि कयलनि अछि। मुदा मैथिली महिला साहित्यकारक चयन ओ जौहरी जका कयलनि। मुदा प्रकाशित पोथी मे गड़बड़ी भेल तऽ कोनो चिन्ताक बात नहि अछि। वर्तमान मशीनी युग मे सय प्रतिशत शुद्धताक गारंटी तऽ हॉलमार्क गहना मे सेहो नहि अछि तऽ भला साहित्यकार आ पोथीक चयन मे शुद्धताक कोन गारंटी। ओना मैथिली साहित्यकारक ई परामर्शी दल एहि सॅ पहिने मैथिली युवा साहित्यकारक यात्राक नाम पर सेहो अपन जादुगरी देखा चुकल छथि। जँ परामर्शी अपन जादू नहि देखौताह तऽ दर्शक साहित्यकारक भीड़ कोना जुटत। खैर एहि यात्राक दरमियान पुरस्कारक सीजन सेहो अंतिम चरण मे छल मुदा एक बेर फेर साहित्य अकादमी मे मैथिलीक नाम रौशन भेल। मिथिलांचलक ठंडा सॅ दूर दक्षिण प्रदेशक शीत यात्रा पर मैथिली महिला साहित्यकारक संग परामर्शी दल सेहो रहल होयत मुदा विशेषज्ञ सभक फराक फराक रायक कारण परामर्शीक चकरा गेलाह आ पुरस्कारक लॉलीपापक कवर के नहि खोललनि। 

बिहारक स्थापना शताब्दी वर्ष पर शिक्षा विभाग सय वर्ष सय पोथी नामक योजना बनौलक अछि- (नवेन्दु कुमार झाक रिपोर्ट)


शताब्दी वर्ष मे प्रकाशित होयत सय पोथी
बिहारक स्थापना शताब्दी वर्ष पर शिक्षा विभाग सय वर्ष सय पोथी नामक योजना बनौलक अछि। एहि योजनाक अंतर्गत विभाग नेना सभक लेल सय टा पोथी प्रकाशित करत नेना सभ पर केन्द्रित एहि पोथी मे नेना सभ दुनियाँ, सामाजिक योद्धा आ नदी सॅ संबंधित रोचक कथा रहत। सभ कथा ती सॅ चारि सय शब्द मे रहत। एहि वास्ते एकटा कार्यशाला सम्पन्न भेल जाहि मे नेना सभक लेल सृजनात्मक लेखन करय वाला सरकारी शिक्षक, स्वतंत्र बाल लेखक आ चित्रकार सहित 45 प्रतिभागी भाग लेलनि। एहि कार्यशाला मे प्रतिभागी सभ नव पाण्डुलिपिक रचना कयलनि अछि। संगहि विशिष्ठ लोकसभ सॅ सेहो कथा लिखैबाक योजना अछि। एहि सभ पोथीक लोकार्पण अगिला वर्ष बिहारक स्थापना दिवस पर आयोजित शताब्दी समारोह मे कयल जायत।
एहि मध्य शताब्दी समारोहक नव प्रतीक चिन्ह जारी कयल गेल अछि जकर लोकार्पण शिक्षा मंत्री पी के शाही कयलनि। ई प्रतीक चिन्ह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयक छात्र अपूर्व सुशांत निःशुल्क तैयार कयलनि अछि। 

बिहार विधान परिषद्क स्थापनाक शताब्दी वर्षक अवसर पर अगिला वर्ष विशेष सत्र संग आयोजित कयल जायत- (नवेन्दु कुमार झाक रिपोर्ट)


विधान परिषद्क शताब्दी वर्षक अवसर पर आयोजित होयत विशेष बैसक।
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बिहार विधान परिषद्क स्थापनाक शताब्दी वर्षक अवसर पर अगिला वर्ष विशेष सत्र आयोजित कयल जायत। 20 जनवरी 2012 के एक दिवसीय विशेष सत्र पटना कॉलेज मे आयोजित कयल जायत। 20 जनवरी 1913 के विधान परिषद्क पहिल सत्र पटना कॉलेज मे सम्पन्न भेल छल। सर वाल्टर मोरेक सभापतित्वक पहिल सत्र मे पांच बैसक भेल छल। एहि विशेष बैसक मे भाग लेबाक लेल सभापति ताराकांत झा बग्घी पर सवार भऽ बैसक स्थल पर जयताह। एहि मे परिषद्क सदस्यक संगहि पूर्व सदस्य के सेहो आमंत्रित कयल गेल अछि। बैसकक अवसर पर प्रसिद्ध गायक छज्जु लाल मिश्रक गायन सेहो होयत। परिषद्क गठन इंडियन काउंसिल एक्ट (18611909) क अन्तर्गत एकरा गर्वर्मेंट ऑफ बिहार-उड़ीसाक लेफ्टिनेंट गवर्नरक परिषद् कहल जाइत छल। 17 फरवरी 1921 के बिहार-उड़ीसा विधान परिषद् गठित कयल गेल छल। खादी संस्थाक विकासक लेल सरकार बनौलक योजना। 

बिहार मे खादी ग्रामोद्योग संस्था सभक विकासक लेल उद्योग विभाग 57 करोड़ टाकाक विकास योजना बनौलक- (नवेन्दु कुमार झाक रिपोर्ट)


बिहार मे खादी ग्रामोद्योग संस्था सभक विकासक लेल उद्योग विभाग 57 करोड़ टाकाक विकास योजना बनौलक अछि। एहि योजनाक माध्यम सॅ प्रदेशक 85 खादी ग्रामोद्योग संस्थाक विकास मे दति देल जायत। ई प्रस्ताव बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग संस्थाक विकास मे दति देल जायत। ई प्रस्ताव बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड सरकार के देने छल। ई टाका अगिला मास खादी संस्था सभके उपलब्ध करा देल जायत। बोर्ड अपन स्तर सॅ संस्थाक चयन कऽ ओकर विकास पर टाका खर्च करत। सरकार खादी ग्रामोद्योग संस्था मे अत्याधुनिक तकनीकक उपयोग पर जोर दऽ रहल अछि। विकास योजनाक अंतर्गत 14 हजार बुनकर के रोजगार देबाक प्रावधान कयल गेल अछि। बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्डक अध्यक्ष त्रिपुरारी शरण विकास योजनाक स्वीकृतिक पुष्टि करैत जनतब देलनि अछि जे विभाग द्वारा उपलब्ध कराओल गेल टाका सॅ अति आधुनिक मॉडल चरखाक खरीद कयल जायत। सरकारक योजनानुसार खादीक क्षेत्र मे अति आधुनिक तकनीकिक उपयोग सॅ खादी ग्रामोद्योग संस्था सभक तेजी सॅ विकास होयत। एहि सॅ खादी संस्था स जुड़ल लोक सभक सेहो आर्थिक विकास होयत आ हुनक परिवारक जीवन स्तर मे सेहो सुधार होयत। 

Friday, December 30, 2011

सुनल जाओ मैथिलीमे सामाचार ३० दिसंबर २०११ (साभार जानकी एफ.एम., जनकपुर)

नीलम फिल्म्स आ गोपाल पाठकक करतूत- मैथिली फिल्म्सक एकटा खुलासा (श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमर जीक रिपोर्ट)

रामभरोस कापड़ि भ्रमर जी द्वारा मैथिली फिल्म्सक एकटा खुलासा- एकता आ बसन्त (वास्तव मे ई १६ बर्ख पुरान श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमरक "एकटा आओर वसन्त"सीरियल, मिथिलांचल फिल्म्स, निर्मात्री सरस्वती चौधरी- जे अखन नेपालमे सांसद छथि, केर चोरि कएल फिल्म्स सी.डी. छी, नाम बदलि कऽ आ निर्माता गोपाल पाठक कऽ कऽ नीलम कैसेट्सकेँ श्री गोपाल पाठक बेचि देलनि। )

भ्रमरजीक पत्र

सुनल जाओ मैथिलीमे सामाचार २९ दिसंबर २०११ (साभार जानकी एफ.एम., जनकपुर)

Thursday, December 29, 2011

सप्तरी महोत्सव २०६८ (रिपोर्ट अशोक झा संतोष/ भण्डारी कांछो)

-पौष १४ गते सँ सप्तरी जिल्लाक राजबिराजमे सप्तरी महोत्सव २०६८
-विजिट नेपाल १९९८ मे सेहो भेल रहए सप्तरी महोत्सव

जलेश्वरमे शनि दिन ३१ दिसम्बर २०११ केँ विद्यापति स्मृति दिवस मनेताह (सुजीत कुमार झाक रिपोर्ट)

-महोत्तरीक मैथिल प्रेमी सभ शनि दिन ३१ दिसम्बर २०११ केँ विद्यापति स्मृति दिवस मनेताह
-मिथिला सांस्कृतिक विकास केन्द्र जलेश्वरक आयोजनामे जलेश्वरक लचमु उच्च माध्यमिक विद्यालयक प्राङ्गणमे हएत कार्यक्रम
-मिथिला सांस्कृतिक विकास केन्द्ररक अध्यक्ष ताराकान्त झा जानकारी देलन्हि अछि ।
-समारोहमे विभिन्न व्यक्ति सभकेँ सम्मान सेहो कएल जाएत ।
-समारोहमे मैथिलीक विशिष्ट विद्वान सभक सहभागिता रहत।

Tuesday, December 27, 2011

१.मैथिकलीक नव न्यूज आ एनटरटेनमेन्ट टी.वी. चैनल शीघ्र आ २.मैथिलीक एकटा आर दैनिक अखबार बहरेबाक सेहो आशा

-मैथिलीक नव न्यूज आ एनटरटेनमेन्ट टी.वी. चैनल "देसि‍ल टी.बी. चैनल" आ मैथिलीक एकटा आर दैनिक अखबार "मिथिलाक अवाज" बहरेबाक समाचार अछि।

-ताजा टीवी द्वारा साप्ताहिक आधा घंटाक मैथिली कार्यक्रमक प्रस्ताव। कार्यक्रममे सांस्कृतिक आ राजनीति दिशा आ दशापर परिचर्चा हएत।

-पटनामे मैथिली दैनिक अखबार "समदिया" क डेमो कॉपी ताराकान्त झा लोकार्पित केने रहथि मुदा ओ अखबार अखन धरि नै आबि सकल।
-श्री चन्द्र मोहन झा शिलोंग मे सी.एम.जे.यूनीवर्सिटी खोलने छथि, ओ गुवाहाटीमे अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनमे २२ दिसम्बर २०११ केँ घोषणा केलथि जे ओ मैथिलीमे इलेक्ट्रोनिक आ प्रिन्ट मीडियामे जर्नलिज्मक कोर्सक प्रारम्भ करता।
आइ धरिक मैथिली दैनिक:

१.दैनिक संदेश (दरभंगा)

२.मिथिला मिहिर (पटना)

३.सीमांचल (जनकपुर, सम्पादक उपेन्द्र भगत नागवंशी)

४.मिथिला समाद (कोलकाता)

५.मिथिला डट कम (जनकपुर, सम्पादक सुजीत कुमार झा)


चित्र साभार मनोज झा "मुक्ति"

Monday, December 26, 2011

सुनल जाओ मैथिलीमे सामाचार २६ दिसंबर २०११ (साभार जानकी एफ.एम., जनकपुर)

हैदराबादमे सम्पन्न भेल विद्यापति पर्व (रिपोर्ट रूपेश झा)

चित्र साभार: रूपेश झा
-हैदराबादमे सम्पन्न भेल विद्यापति पर्व २५ दिसम्बर २०११ केँ

-हैदराबाद के एसआरटीसी कला भवनमे भेल कार्यक्रम

-मुख्य अतिथि "स्वतंत्र वार्ता" हिंदी दैनिक समाचार पत्र , हैदराबादक संपादक डाक्टर राधेश्याम शुक्ल

-विशिष्ट अतिथि आइ.पी.एस. अधिकारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के आइ.जी. अशोक नाथ झा केलन्हि विद्यापति फोटोपर माल्यार्पण आ दीप प्रज्वलन

-गायिका सविता नायक आ रोहित रक्षक केलन्हि गायन

-सुश्री रूपल कर्ण क नृत्य

-बालिका कुमारी अनिन्द्याक शास्त्रीय गीत सभकेँ मोहि लेलक

Sunday, December 25, 2011

सुनल जाओ मैथिलीमे सामाचार २५ दिसंबर २०११ (साभार जानकी एफ.एम., जनकपुर)

"आधुनिक मैथिली साहित्यक प्रभाव क्षेत्रमे नारी तत्व" आ "मैथिली आ तमिल कवियित्री सम्मेलन" (१७-१८ दिसम्बर २०११ केँ पुडुचेरीमे भेल साहित्य अकादेमीक समारोहपर शेफालिका वर्मा जीक रिपोर्ट)

YOU MAY VIEW THIS TAMIL - MAITHILI WOMEN POETS MEET REPORT (REPORTED BY SMT. SHEFALIKA VERMA) IN TAMIL SCRIPT (MAITHILI LANGUAGE) BY CLICKING THE FOLLOWING LINK:

MAITHILI GOES DRAVIDIAN

-"आधुनिक मैथिली साहित्यक प्रभाव क्षेत्रमे नारी तत्व" संगमे "मैथिली आ तमिल कवियित्री सम्मेलन" भारतक साहित्य अकादेमीक तत्वावधानमे १७-१८ दिसम्बर २०११ केँ पुडुचेरीमे सम्पन्न भेल।

-साहित्य अकादेमीक ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी श्री जे. पुन्नोदुर्रै स्वागत भाषण देलनि।

-आरम्भिक भाषण श्री विद्यानाथ झा "विदित"(संयोजक मैथिली परामर्शदात्री समिति, साहित्य अकादेमी)क आ श्री एरा मोहन (साहित्य अकादेमीक जेनेरल काउन्सिलक सदस्य)क रहल।

-अध्यक्षीय भाषण श्रीमती शेफालिका वर्मा देलनि।

-उद्घाटन भाषण श्री मनोज दास (ओड़िया आ अंग्रेजी लेखक) देलनि, ओ अरविन्द आश्रम, पुडुचेरीमे रहै छथि।

-मैथिली लेखिका श्रीमती रेवती मिश्र मुख्य भाषण देलनि।

-सिरपी बालसुब्रह्मण्यम (संयोजक तमिल परामर्शदात्री समिति, साहित्य अकादेमी)सम्माननीय अतिथि रहथि।
-१८ दिसम्बर २०११केँ ऑरोविल, पुडुचेरीमे ४ बजे अपराह्णसँ "मैथिली आ तमिल कवियित्री सम्मेलन" भेल।

-मैथिलीक मुख्य प्रतिभागी महिला लोकनि रहथि, डा. कमला चौधरी, कुमकुम झा, वीणा कर्ण, रश्मि तनु, आरती कुमारी शेफालिका वर्मा, रमा झा, आशा मिश्र, स्वाति शाकम्भरी, नीलिमा मिश्र, रेवती मिश्र, अरुणा चौधरी, सुशीला झा, वीणा ठाकुर, उषा वत्स,ममता चौधरी, प्रमिला झा , लालपरी देवी, चंदना दत्त आ नीलम कुमारी।

[
-साहित्य अकादेमी ,दिल्ली दिससँ ' आधुनिक साहित्यक प्रभावक्षेत्र मे नारी तत्व ' पर एकटा मुख्यतः महिला लोकनि क सेमिनार पांडिचेरी मे १७-१८ दिसम्बर केँ संपन्न भेल.
-एहि सेमिनारक विशेषता छल जे कम सँ कम आयु,एवं नवीन लेखिका सभकेँ मंच पर आनबाक प्रयास कयल गेल छल...
-एहि मे तमिलक विद्वान सभ सेहो भरल रहथि..

-ई सेमिनार पांडिचेरीक सभसँ पैघ होटल अनंदा इनमे छल आ रहबाक व्यवस्था सेहो ओहीमे ...

-आरम्भ १७ दिसम्बरकेँ करीब १० बजे दिनमे साहित्य अकादमिक ओ.एस.डी. पोंनुदुरै क अभिभाषण सँ भेल

-एकर बाद मि. राजा तमिल मे सभक परिचय करौलनी अंग्रेजी अनुवाद क साथ

-श्री बैद्यनाथ झा विदित अंग्रेजी आ मैथिली मे सेमिनार केँ संबोधित केलनि संगे एरा मोहन, मेम्बर ,जेनरल कौंसिल ,साहित्य अकादेमी, पोंडिचेरी सेहो सम्बोधित केलनि.

- एकर उपरांत डॉ. शेफालिका वर्मा अध्यक्षीय अभिभाषण पहिने अंग्रेजी पुनः मैथिलीमे देलनि जे "आइ उत्तर केर गंगा जमुनाक साहित्य भाव दक्षिण केर साहित्य सागर सँ मिलन पर्व मना रहल अछि.... ,

-मि. मनोज दास , साहित्य अकादेमी फेलो केर विद्वता पूर्ण भाषण तमिल आ अंग्रेजी मे भेल. श्रीमती रेवती मिश्रा सेमीनारक विषय पर अपन बीज भाषण आ विद्वतापूर्ण विशद आलेख पढ़लनि

-गेस्ट ऑफ़ ओनर मि. सिर्पी बलासुब्रह्मण्यम, कन्वेनर , तमिल एडवाइजरी बोर्ड , साहित्य अकादेमी अपन भाषण देलनि .

-धन्यवाद ज्ञापन क उपरांत पहिल सेशन भेल जाहि मे अध्यक्षता कमला चौधरी केलनि , मंजर आलम ,अरुणा चौधरी, ,कुमकुम झा, सुशीला झा क आलेख छल.

-दोसर सेशन क अध्यक्षता वीणा ठाकुर केलनि, ओइमे धीरेन्द्र नाथ मिश्र, रविन्द्र कु. चौधरी , आशा मिश्र, उषा वत्स केर आलेख छल

-तेसर सेशन मे अध्यक्षता प्रमिला झा केलनि। ऐ मे ताराकांत झा, ममता चौधरी आदि क आलेख छल . .

-१८ दिसम्बर २०११ केँ चारि सेशन भेल, लालपरी देवीक अध्यक्षतामे अमरनाथ झा , पंचानन मिश्र ,रमा झा , चंदना दत्त क आलेख छल

-पाँचम सेशनक अध्यक्षता वीणा कर्ण, आलेख पाठ नीलम कुमारी, रश्मि तनु, आरती कुमारी आ सभसँ कम आयुक स्वाति शाकम्भरी केलनि।

-अंतिम सेशनक अध्यक्षता पन्ना झा केलनि, गेस्ट ऑफ ओनर रहथि पी. राजा (साहित्य अकादेमीक जेनेरल काउन्सिलक सदस्य), भाषण उषाकिरण खान, क बाद मात्री मंदिर अरुवेली मे तमिल मैथिली कवि सम्मलेन भेल.

-सभ गोटे पहिने अंग्रेजी मे तखन मैथिली मे बजलीह .

-कतेक लेखिका खाली अंग्रेजी मे पाठ केलनि.

-महिला लेखिकाक बाहुल्य, उत्साह देखि लागल 0ldest to latest क अन्वेषण छल. जाहिमे विदेह आ गजेन्द्र ठाकुरक पूर्ण सहयोग कहल गेल.

-मात्री मंदिर मे कवि सम्मलेनक उपरान्त सभ गोटेकेँ एकटा उज्जर झोरामे एक-एक टा चद्दर , एकटा सुंदर दीया , फूल पत्ती छोट छोट कलात्मक चीज सभ देल गेल.

-तमिलक सुप्रसिद्ध कवियित्री मीनाक्षी सुन्दरम अपन मोहक मुस्कानसँ सभकेँ मोहि लेलनि .....

- कोनो आलेख सतही नै छल, सभटा विद्वता पूर्ण, पढ़बाक उत्साह वाणीमे झलकैत छल लेखिका गण केर.

-नारी शक्ति सँ मिथिला ओत प्रोत अछि कोनो शक नै....
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चित्र साभार शेफालिका वर्मा


चित्र साभार शेफालिका वर्मा
मनोज कुमार झा, ताराकान्त झा, पंचानन मिश्र आ शेफालिका वर्मा: चित्र साभार शेफालिका वर्मा
कुमकुम झा, विभा झा, आशा मिश्र, रमा झा, आरती झा, स्वाती, राजाराम प्रसाद, मंजर सुलेमान: चित्र साभार शेफालिका वर्मा
नीलिमा मिश्र:जय-जय भैरविपर नृत्य: चित्र साभार शेफालिका वर्मा
तमिल लेखक बी. सुब्रह्मण्य़म, मनोज दास (ओड़िया आ अंग्रेजी लेखक-अरविन्द आश्रम पाण्डिचेरीमे निवास करै छथि), शेफालिका वर्मा, रेवती मिश्र आ विद्यानाथ झा ’विदित’ : चित्र साभार शेफालिका वर्मा
श्री पुन्नुदुर्रै (ओ.एस.डी., साहित्य अकादेमी, माइकपर), श्री राजा, श्री बी.सुब्रह्मण्यम, मनोज दास (ओड़िया आ अंग्रेजी लेखक-अरविन्द आश्रम पाण्डिचेरीमे निवास करै छथि), शेफालिका वर्मा, रेवती मिश्र आ विद्यानाथ झा ’विदित’ : चित्र साभार शेफालिका वर्मा
मनोज झा आ तमिल लेखकगण: चित्र साभार शेफालिका वर्मा
मैथिली आ तमिल लेखकगण: चित्र साभार शेफालिका वर्मा
पोन्नुदुर्रै (माइकपर), सिरपी बालसुब्रह्मण्यम, श्री एरामोहन, शेफालिका वर्मा, रेवती मिश्र, विदित: चित्र साभार शेफालिका वर्मा
चन्दना दत्ता, शेफालिका वर्मा, ताराकान्त झा आ अमरनाथ: चित्र साभार शेफालिका वर्मा
अमरनाथ, अमरनाथक पुत्री, अमरनाथक पत्नी नीलम कुमारी, शेफालिका वर्मा, मनोज झा  : चित्र साभार शेफालिका वर्मा

मैथिलीक पहिल न्यूज पोर्टल "समदिया" (२००४सँ) दिससँ क्रिसमसक ढेर रास शुभकामना - मेरी क्रिसमस







हैदराबादमे विद्यापति पर्व समारोह आइ २५ दिसम्बर २०११ केँ (हैदराबादसँ शम्मी वत्सक रिपोर्ट)

मिथिला सांस्कृतिक परिषदक तत्वावधानमे एपीएसआरटीसी कला भवन आरटीसी एक्स रोड मे आइ 25 -12 -2011, दिन रविकेँ साँझ 3 बजेसँ मैथिल "कवि कोकिल विद्यापति" क स्मृतिमे पर्व समारोह आयोजित भऽ रहल अछि। समारोहक मुख्य अतिथि "स्वतंत्र वार्ता" हिंदी दैनिक समाचार पत्र , हैदराबादक संपादक डाक्टर राधेश्याम शुक्ल हेता। ऐ अवसर पर मिथिलांचलक प्रसिद्ध कलाकारक दल सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करत।
सभसँ अनुरोध अछि जे भारी संख्यामे पहुँचि ऐ कार्यक्रमक आनंद उठाउ आ सभ हैदराबादमे रहैबला लग ई सूचना पहुँचाउ।

शम्मी वत्स

सुनल जाओ मैथिलीमे सामाचार 24 दिसंबर २०११ (साभार: जानकी एफ.एम., जनकपुर)

विद्यापति स्मृति पर्व समारोह (२०६८ विक्रम संवत, सन २०११ ई.) विराटनगर - (प्रवीण नारायण चौधरीजीक रिपोर्ट)

बिराटनगरमे विद्यापति पर्व समारोह सम्पन्न 9-10 दिसम्बर 2011
-उद्घाटन नेपालक उपराष्ट्रपति श्री परमानन्द झा द्वारा
-सामा-चकेवा, झिझिया,, कमला स्नान, होली आ मिथिलाक जीवनक झाँकीक प्रस्तुति
- एस.सी. सुमन आ मदन कला देवीक कला दीर्घा रहल आकर्षणक केन्द्र
-कुंज बिहारी मिश्र, जितेन्द्र पाठक, पूजा, खुशबू, अर्चना, मिथिलेश ठाकुरक गीत संगीत लोककेँ झुमा देलक
-सांस्कृतिक नृत्य राजदेवी कलाकेन्द्र, राजबिराज द्वारा
-आर्निको बोर्डिंग स्कूल, बिराटनगर सेहो कार्यक्रममे लेलक भाग
-मैथिली विकास अभियानक सेहो सहभागिता
-प्रतिबिम्ब रंगमंच, जनकपुर प्रस्तुत केलक भ्रमरजीक “जट-जटिन”
-बाल कलाकार अंजू यादव, अम्बिका, भावना देवांशी मन मोहि लेलन्हि
-बैद्यनाथ मिश्र “बैजू”, धनाकर ठाकुर,सुखदेव पासवान, लक्ष्मी नारायण मेहता, जयराम यादव, खुशीलाल मण्डल, सियाराम झा सरस, राम भरोस कापड़ि भ्रमर, धीरेन्द्र प्रेमर्षि , देवेन्द्र झा, पूनम ठाकुर, मीना देव, पुष्पा ठाकुर, सचिन चन्द्र कर्ण, संजय कर्ण, करुणा झा, राखी झा, अलखजी, महेश रेग्मी, श्याम अधिकारी, भानुभक्त पोखरेल, महेश जाजू, नारायण कुमार, पवन कर्ण, महानन्द मिश्र, चन्द्रेश, किरण थापा, तारानाथ गौतम, भगवान झा, जितेन्द्र झा, लक्ष्मीरमण झा, काली कुमार लाल, एस.सी. सुमन, रमाकान्त झा, दयानन्द दिकपाल, वरुणमाला मिश्र, योगेन्द्र बराल, संजय दास, सुरेन्द्र नारायण मिश्र , फूल कुमार देव, अजित झा आदिक गौरवमय उपस्थिति
-आयोजक “मैथिली सेवा समिति” (अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र नारायण मिश्र, उपाध्यक्ष श्री फूल कुमार देव, जेनेरल सेक्रेटरी श्री प्रवीण नारायण चौधरी, सचिव अजित झा)
-प्रवीण नारायण चौधरी रहथि संयोजक
-नेपालक प्रधानमंत्री श्री बाबूराम भट्टाराइक संदेश हुनकर प्रेस सचिव श्री रामरिझन यादव पढ़लन्हि


डॉ.सुरेन्द्र नारायण मिश्र (मिथिला सेवा समितिक संस्थापक अध्यक्ष):चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा


डॉ.सुरेन्द्र नारायण मिश्र (मिथिला सेवा समितिक संस्थापक अध्यक्ष):चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा


झिझिया:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा
कुंजबिहारी:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

एस.सी.सुमन:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

एस.सी.सुमन:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

करुणा झा:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा


जगेश्वर ठाकुर:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

झिझिया नाच:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

डोमीकामत_सृष्टिकलाकेन्द्रबिराटनगर:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

दयानन्ददिकपाल यदुवंशी:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

नवीनकर्ण:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

स्व. डॉ. अवध नारायण जीक सम्मान लैत हुनकर पुत्र डॉ. नारायणकुमार:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

परमानन्द झा:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

प्रवीणनारायणचौधरी:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

प्रेमर्षि:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

प्रेमर्षि_२:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

बैजू_सुखदेवपासवान_एस.एन.झा_भ्रमर:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

भगवानझा:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

भ्रमर:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

वरुणमालामिश्र:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

शंकरसिंहठाकुर:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

श्यामअधिकारी:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

श्यामअधिकारी_एस.एन.झा_जयरामयादव_भानुभक्तपोखरेल:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

सरस:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

सरस_२:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

सुखदेवपासवान:चित्र साभार श्री जितेन्द्र झा

Pravin Narayan Choudhary Coordinator - Vidyapati Smriti Parva Samaroh - 2068 (Biratnagar)
Vidyapati Smriti Parva Samaroh - 2068 
A mega event held at Biratnagar on December 9-10, 2011 for two days after a grand success of last year's Vidyapati Smriti Parva Samaroh - 2067 on December 10-11, 2010. The event was inaugurated by His Excellency Parmanand Jha, the First Vice President of Nepal in a very lovely and unique fashion as he joined the cultural procession on mid way and later by putting on the flames of Panchdeep - a traditional mode of flame-burning in Mithila placed opposite the decorated photo of great poet cuckoo Vidyapati. Before this, the honorable chief guest was given a very warm welcome by claps, flowers bouquet, garlands and more beautifully by school students on drum bits through march-past and salutation of honor, thereafter everyone participated in the national anthem and the ever-essential Gosaunik Geet written by Vidyapati - Jay Jay Bhairavi was also sung by all guests and spectators remaining standing on their seats. This was the moment of thrilling to entire audience. Earlier in morning the Maithils gathered in mass of thousands with several shows representing their cultures such as Sita and Princess of Mithila wedded with Rama and Princes of Ayodhya together with Lord Shiva, Vidyapati, Sage Vishwamitra and of course Hanumana as well appeared with His discus. A child artist played beautiful role of Hanumana was the key point of this show. Others were Sama Chakeva, Jhijhiya, Kamala Snan, Holi and a special show for how Maithils live united in the moments of happiness or sorrow - all castes are required to remain in bonds of love. For example, if it is the marriage function, earth potteries are required from earth-potters, some bamboo-utensils required from the sweepers (scavenger class among the Hindus), another Vedi of bamboo shoot and some other stuffs required from the barbers... likewise all castes gather together for success of one event of marriage in Mithila. :) This is the beauty. And, this concept was tried to present through a show. Several distinguished guests from both Nepal and India participated in the inaugural function. Dr. Baidyanath Choudhary 'Baiju', Dr. Dhanakar Thakur - the duo dedicated leaders of Mithila attended the function and delivered their brief address on protection of Mithila identity by granting a separate Mithila state for Maithils both in India and Nepal. The highly reputed writer of Maithili lyrics Siyaram Jha Saras, Dr. Rambharos Kapari and Dhirendra Premarshi also attended the function. Highly learned scholar Dr. Debendra Jha - the ex-HOD of Maithili from Bihar University (Muzaffarpur) once again after winning the heart of all Maithils in Biratnagar in last year function. People heard his sweet voice full of pearls of wisdom calmly, though once again there were a very little time for him to address the audience. His focus on life of Vidyapati and activeness of Maithils were impressive. Luckily ex-MP, Araria and ex-MLA Forbesgunj Sukhdev Paswan and Laxmi Narayan Mehta also arrived to attend this program from Delhi and Patna respectively. They also addressed to the audience for need of separate Mithila state and that of protecting the high values cultural heritages of Maithils - Hon'ble Paswan recalled the role of his party BJP and leader Atal Behari Vajpayee for his gift to Mithila by granting Maithili in Schedule VIII of Indian Constitution and demanded similar honor for Maithili in Nepal. The duo expressed their happiness for attending the event coming from far and thanked the organizer Maithili Sewa Samiti for such a decent function organized at historic land of Biratnagar. The special messenger of Honorable PM Dr. Baburam Bhattarai - his Press Counselor Ramarizhan Yadav read the messages of PM before the audience expressing happiness for wellness of Maithils organizing such mega event for protection of rich language and culture as Maithili. Local MP Jayram Yadav addressed to the audience with commitment to have honor for Mithila and Maithili in new Nepal at any cost, however, the demand for Madhesh overall is on priority and that has to be fulfilled by the constitution on way to be formed. Ex-MP Khushilal Mandal from Rajbiraj also addressed to the audience briefing the role of his party and cadres for protecting the values of Maithili and need of hour for doing more to protect the cultural heritage of Mithila. Dr. Rambharos Kapari - Member of Pragya Pratishthan, Nepal addressed the audience for hard efforts they make for Maithili in center and the role of Pragya Pratishthan for publishing several write ups in Maithili. Siyaram Jha Saras in his long-established fashion presented the delivery for keeping the active excitement of Maithils at top. Dhirendra Premarshi once again revealed the hidden attachment with Maithili for Madheshi politicians advocating for Hindi in Madhesh saying the suppression cannot last long. Truth cannot be hidden by smokes or shadow cannot last without support true Sunlight. Karuna Jha, the lonely lady on dais addressed the audience for need of uplifting women for successful movements in Mithila. Participating UML Leader Mr. Mahesh Regmi insisted on Maithils to interact more and more openly and broadly with all sects of society to let others feel proudly say 'Out Maithili' rather than 'Their Maithili'. This has a beautiful message for balanced communal harmony, which has gone out of order in recent days due to different clashes of identity. The way he addressed clearly said that previous suppression has blasted to shape up new Nepal, and let people not repeat the same blunder ever again in future. Similarly the founder president of Hidippa Sahityik Parishad Mr. Shyam Adhikari addressed the audience for working together for pious purposes without discriminating any caste, creed or color but unitedly for one reason the culture of our mother land. Bhanubhakta Pokharel whose book Kavya Chaugedi was also released by VP addressed to the audience saying it was indeed a blissful moment for him to have attended the celebration of a great poet Vidyapati who served Maithili but getting opportunity of releasing his book in Nepali virtually proves the beautiful fate of near and dear relationship between languages with grammars - both Nepali and Maithili are worth for general mankind of Nepal. There were several other distinguished guests and dignities on the dais including the prominent industrialist and social activist - Central Committee Member of FNCCI and Former President of Morang Merchants Association Mahesh Jaju who was duly declared by the Coordinator to be the true inspiration behind the mega event, Dr. Narayan Kumar, Dr. Pawan Karna, Dr. Mahanand Mishra, Shri Chandresh, Kiran Thapa - Secretary to VP, CDO Morang Taranath Gautam, Prof. Bhagavan Jha, Jitendra Jha, Laxmiraman Jha and others. Organizing executives consisting of the maker of Biratnagar - the first engineer of this locality Mr. Ramakant Jha thanked the attending guests, spectators and organizers for having organized and attended the Samaroh. Vice President of Maithili Sewa Samiti Ful Kumar Dev address welcome speech on the dais. The honored senior activist of Maithil Samaj and the Founder President of organizing committee Maithili Sewa Samiti Dr. Surendra Narayan Mishra by organizing committed by providing Certificate of Honor through H.E. Vice President expressed his thanks for honor and also committed that he would not stop till the last breathing to work for Maithili and Mithila. Senior Advocate and Founder President of Maithili Sahitya Parishad - the adviser of the event Kali Kumar Lal said that Vidyapati or any scholar of Mithila is not reserved for any one particular caste and let the worship continue in better fashion as has been organized last year and this year to infinity for prospering Maithili and Mithila. Some of the significant individuals and institutions were honored by organizing committee and certificate of honors were given by hands of H.E. Vice President - mainly Karuna Jha the lady activist working continuously for making the society dowry free was honored for her daring contribution. S. C. Suman - the prominent artist of Mithila Painting whose arts were also put on display in Art Gallery in the function was also honored for making Mithila Paintings reach to the world and earn reputation by his lively arts. The prominent writer and lyricist Siyaram Jha Saras was honored for his continuous long service to the field of literature. The only and only Maithili writer prominently known to entire nation Dayanand Dikpal was given the certificate of honor through VP to let the flames keep burning in Eastern Zone of Nepal and North East of Mithila. Certificates of honor were also given to Rupa Jha-Dhirendra Premarshi (wife-husband) dedicated for flourishing Mithila and Maithili through his most popular radio program of Hello Mithila via Kantipur FM of Nepal, Nabin Karna of Biratnagar engaged in field of journalism and TV/Radio Programs in Eastern Zone in Maithili, Varun Mala Mishra - the lone lady working actively in field of journalism, Dr. Abadh Narayan (after death) for his immemorial contribution to uplift the people of Biratnagar serving as first doctor in the region and that of participating actively in Hindi Andolan in 2017 in Biratnagar; Pandit Meghraj Sharma (after death) for enormous social contribution and continued support to entire community belonging to Marwari sect of Biratnagar to whom the society owe in different ways was honored by organizing committee. The certificates of honor were also given to participating individuals and institutions in last year event. Dr. S. N. Mishra from the chair of president for the inaugural function and also the event - thanked all and wished for success of the event to be held for two more days. Pravin Narayan Choudhary, the Co-ordinator of the event and General Secretary of organizing committee Maithili Sewa Samiti was anchoring the inaugural function. Two prominent writers' books were also released by HE Vice President - the one was of Prafull Kumar Maun and another of Bhanubhakta Pokharel. In the meantime, the souvenir of last year program was also released by hands of VP. Thereafter, the Art Gallery of Mithila art mainly displaying the auspicious arts of prominent artist S. C. Suman and Madan Kala Devi was inaugurated by H. E. Vice President who keenly looked at every art on display thereby assuring the artist to contribute actively and assured of better state support from Government of Nepal. Programs then followed by Vidyapati Sangitik Sandhya by the most reputed artist Kunjbihari Mishra and his team including Jitendra Pathak, Pooja, Khushbu, Archana, Mithilesh Thakur and several others. The cultural dances were presented by Raj Devi Kalakendra, Rajbiraj in the meantime songs were sung by several other local and invited artists. The program lasted till late night around 12.30 am and despite severe cold wave and foggy weather the spectators were gathered in large mass. The organizing committee had arranged for prepaid food through food stalls. This way the first day program was concluded with announcement of several programs for the next day. On second day, the program started with notable late of about two hours due to foggy weather and wet carpets in spectators tents. Around 10 am the program was started by school students presenting national anthem, Gosaunik Geet and cultural dances. Participating school was Arniko Boarding School - one of the oldest and decent school of Biratnagar still maintaining its high quality education producing disciplined students serving to the nation on high order mostly and other prominent child artists Ambika, Bhavana and Devanshi sang Gosaunik Geet with help of Prominent lyricist Siyaram Jha Saras. A very growing star - another child artist Anju Yadav from Rajbiraj presented several Maithili songs in her magical voices. Indeed this was the indicator of another beautiful day of the event. Later District Education Officer Yogendra Baral addressed the audience for wish of organizer was to establish an everlasting fund of scholarship for poor students who remain deprived of higher education due to lack of funds. Immediately after his address, the senior and adviser of the event Er. Ramakant Jha announced a vital contribution of Rs.25,000.00 followed by similar announcement from Pravin Narayan Choudhary of Rs.25,000.00, Ajit Jha for Rs.25,000.00, Dr. Sanjay Das for Rs.25,555.00, Er. Ful Kumar Dev for Rs.11,000.00, and several more collecting Rs.2,00,000.00 approx for the said fund of scholarship to be given to needy from coming years. The next program was Poets Meet anchored by Secretary of organizing committee Maithili Sewa Samiti Ajit Jha. This program was chaired by Siyaram Jha Saras and delightful presence of the most prominent poets such as Dr. Rambharos Kapari, Dr. Debendra Jha, Dhirendra Premarshi, Chandresh Kumar, Karuna Jha, Poonam Thakur, Meena Dev, Pushpa Thakur, Karna Sanjay, Sachin Chandra Karna, S. C. Suman, Alakh Jee, Kunjbihari Mishra, Pravin Narayan Choudhary, Shyam Adhikari, and several other poets participated in 3 hours long poets meet in the event. Several types of impressive poems, gazals, lyrics were presented by all participating poets. Due to shortage of time and that per wish of the crowds the scheduled program of scholars' conference was delayed. The event turned towards cultural programs once again. On demand, Kunjbehari Mishra had to appear on stage with his bunch of entertaining songs and presentations which once again consumed more time than scheduled. In stream of event organization, this type of things may happen. The scholars conference though started by not lasted for long as there was not a suitable moment for same. This has been postponed in need. Thereafter the beautiful cultural shows which were presented in previous day's procession were now presented on stage and that was so hilarious for all. People enjoyed as something unique were presented. Many of them were not aware of what were going on. When they saw the mode of Kamala Snan - Jhijhiya - Sama Chakewa, they simply enjoyed being proud of Mithila culture. Then some of the local artists including Maithili Vikash Abhiyan child artists, singers Anju Choudhary and Prabaldeep Vishwash presented their reputed songs of Nav Ghar Uthay Puran Ghar Khasay were so brilliant. Then there was the last show of the night - Jat-Jatin; presented by Prativimb Rangmanch of Janakpur composed by Dr. Rambharosh Kapari. This was the superb presentation which won the hearts of all and compelled the spectators to once again hang around the event forgetting the cold wave and fogs. At last, around 1 am, the organizer had to conclude the program by brief addresses from chief leaders and guests Siyaram Jha Saras and Dr. Devendra Jha and Nachari and samadauns by Pravin Narayan Choudhary and Dr. Rakhi Jha respectively. Happy reading the entire event friends - I must have missed to cover a lots of things, but I assure you, this was the event of the year 2011. Let us welcome new year 2012 and commit to have it more beautiful. May Maithils live vigorously to let Mithila survive its High Culture and Discipline. God bless you all.

-Pravin Narayan Choudhary Coordinator - Vidyapati Smriti Parva Samaroh - 2068 (Biratnagar)

Saturday, December 24, 2011

हम पुछैत छी: शिखर पुरुष श्री गोविन्द झा जीसँ मुन्नाजीक भेल मुखोतरिक अंश

११ दिसम्बर २०११ केँ विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान पं. गोविन्द झा जीकेँ पटनामे श्री मुन्नाजी देलन्हि। बहुआयामी व्यक्तित्वक शिखर पुरुष श्री गोविन्द झा जीसँ मुन्नाजीक भेल मुखोतरिक अंशसँ अहाँ सभक जनतब कराएल जा रहल अछि।

मुन्नाजी: विदेह सम्मान [विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल)] लेल बधाइ। मैथिली भाषा साहित्यक वर्तमान परिदृश्य की अछि। एकरा मरबासँ बचेबामे अखनुक विदेह साहित्य आन्दोलन कतेक कारगर सिद्ध भऽ रहल अछि।
पं. गोविन्द झा: स्थिति पहिने एकभगाह सन छल। आब सभ तुरक आ सभ जातिक रचनात्मक प्रवेशे ई भाषा चिरायु वा ई कही जे अमरत्वकेँ प्राप्त करबाक सामर्थ्यवान भेल देखाइए।

मुन्नाजी:मैथिली कथा साहित्य भारतीय अन्यान्य कथा साहित्य मध्य कतऽ टिकल अछि। एकर सम्भावना केहेन देखाइए?
पं. गोविन्द झा: ई संतुष्टि दैबला बात अछि जे मैथिलीमे अखन सभ प्रकारक कथा आबि रहल छै। ओना मैथिलीमे हमरा जनतबे नारा साहित्यक प्रचलन रहल। मोन कहियो साम्यवादी तँ कहियो नारी केन्द्रित कथा एवं आलेख बेशी देखना जाइए। मुदा एकोटा नारी कल्याणक लेल सशक्त नै अछि। अही सभ कारणे मैथिली कथा भारतीय स्तरकेँ नै प्राप्त कऽ सकल। आगू ऐमे विकेन्द्रीकरणक सम्भावना देखा पड़ैए।

मुन्नाजी: वर्तमान मैथिली नाटकक की स्तर अछि। कोन नाटककार ऐ स्तरकेँ प्राप्त केने बुझाइत छथि?
पं. गोविन्द झा:मैथिलीकेँ आम जनतासँ जोड़बाक साधन अछि प्रदर्शन। आ जकर मुख्य माध्यम अछि नाटक। वर्तमानमे नाटकक स्तर कमतर अछि। आब लोक पैघ नाटक देखबासँ अगुताइ-ए।ऑडियेन्स सटिस्फाइड नै भऽ पबैए किएक तँ नाटकमे कोनो मोड़ नै अबै अछि। रचना सभ नारी सशक्तिकरणक उल्लेख करैए मुदा नारीक सही चित्रण नै दैए। बसात नारी केन्द्रित पहिल मैथिली नाटक छल। जकरा देखियौ आइयो प्रासंगिक अछि। थियेटरक नाटक तकनीकी दृष्टिए ऊपर गेल अछि। मुदा गाममे नाटक देखबा लेल आइयो लोकक संख्या हजारक करीब भऽ जाइए। “अन्तिम प्रणाम” नाटकक प्रदर्शनमे गाममे ५००० लोक जुटल छल।
आब आवश्यकता छै उच्च कोटिक कथा सभक नाट्यरूपान्तरणक, जइमे मैथिली बहुत पछुआएल अछि। जखन की आन सभ भाषामे ई काज खूब भऽ रहल अछि। वर्तमानमे जे नाटककार अपन भाषाक श्रेष्ठता साबित कऽ रहल छथि ओ छथि, महेन्द्र मलंगिया आ अरविन्द अक्कू।
मुन्नाजी: भाषिक रूपमे मैथिलीक वर्तमान स्थिति की अछि? की ऐमे ह्रास वा क्षीणता एलैए?
पं. गोविन्द झा: भाषाक स्तरपर बहुत फर्क एलैए, आबक लोक पढ़ैए कम, लिखऽ चाहैए बेशी। रचनाकारक शब्द सामर्थ्य घटि रहल छै। नवका धियापुता अंगरेजिया भऽ रहल छै। तखन तँ मैथिलीक दुर्दशा स्वाभाविके छै।

मुन्नाजी: मैथिलीमे आब विहनि कथा धुरझार लिखा रहल अछि। एकर वर्तमान अस्तित्व आ सम्भावना की देखाइछ?
पं. गोविन्द झा: विहनि कथा पूर्ण रूपेँ कविताक समकक्ष अछि। आ वर्तमानमे ठोस कविता आंगुरपर गनबा जोकरक अछि। तखन लघुकथो बुझनिहार कमे छथि। हँ नव लिखनिहार बढ़ल-ए। तेँ एकर भविष्य नीक भऽ सकैए।
मुन्नाजी: नवतुरिया रचनाकारक लेल कोनो सनेस?
पं. गोविन्द झा:नव लेखक सभ पहिने अध्ययन तखन अभ्यास, तखन लेखनी करताह तँ अवश्य सफल हेताह।
(साभार विदेह www.videha.co.in )

कथा गोष्ठी सम्पन्न (रिपोर्ट श्री परमेश्वर कापड़ि)

श्रीरामानन्द युवा क्लव जनकपुरधामक २६म वार्षिकोत्सवक उपलक्ष्यमे प्राध्यापक परमेश्वर कापडिक संयोजकत्वमे सम्पन्न मैथिली कथाक परिवेश आ प्रवृति विमर्श विषयक एकदिवसीय कथा गोष्ठीऽ बहुते अर्थे विशिष्ट आ सब अर्थे उल्लेख्य रहल अछि । कार्यक्रम आयोजकीय प्रवाह डेडी करीनक उछलैत आहर जकाँ आरि–धूरके नङहैत तोडैत आन-आन खेतके हानि नोकसानी नहि क,सैतले सिटले,दमकलक पाइप सनके रहौकऽ जाहिस जै खेत,कियारीमे जतबे जेहन पानिक खगता–बेगरता होइक,ततबे पाइन पटौक,एहन सनके,कार्यकरमक उद्देश्य आ आयोजनक औचित्यके अनमन अनुसन्धान प्रारुपक साँचमे साँचि,एना शब्दरुप देल गेल रहए|
चित्र साभार श्री परमेश्वर कापड़ि

चित्र साभार श्री परमेश्वर कापड़ि

चित्र साभार श्री परमेश्वर कापड़ि

चित्र साभार श्री परमेश्वर कापड़ि

ऐ सन्दर्भमे श्री परमेश्वर कापड़िजीक भूतकालमे देल सुझाव:
मैथिली कथाक परिवेश आ प्रवृति विमर्श आजुक अपरिहार्य आवश्यकता अछि
— नेपालक मैथिली कथाक प्रभाव आ प्रभुत्वपर, एकर विस्तृत परिधि आ पहुँचके सन्दर्भमे, एकर परिवेश आ प्रकृतिपर जमिक’, जुटिक’ विमर्श करब । मैथिली कथाक ऐतिहासिकता आ रचनाधर्मिताक समग्र आयाम बहुत विस्तृत आ परम ऐतिहासिक रहनहुँ, एकर
— पाठकीय समस्या तथा समीक्षात्मक मूल्याँकनक संकट,
— बदलैत परिप्रेक्ष्यमे, मोह भंगक स्थितिवोध,
— आधुनिक, उत्तर–आधुनिकताक चुनौती आ मूल्य संक्रमणक स्थिति,
— युग परिवत्र्तन आ परिवत्र्तित परिप्रेक्ष्यमे मूल्य संघर्षक दिशा,
— प्रमाणिक परिवेश आ लोकसरोकारी आवाजक आवेग,
— समयसंग साक्षात्कार आ सृजनात्मक रचना प्रक्रियापर, खुलिक’ बात करब ।
 एहि कथा–गोष्ठीक उद्देश्यक आवेग महत्वाकाँक्षी रहल अछि आ बहुत किछु उपलव्धीमूलक पाबए चाहैत अछि । एहनमे बड़ नीक रहत जे मैथिली कथाक
— सामाजिक सन्दर्भ — - Social Context _
— सांस्कृतिक सन्दर्भ — -Cultural '' _
— राजनैतिक सन्दर्भ —  -Political '' _

— वैचारिक सन्दर्भ - Ideologicla '' _
— समसामयिक सन्दर्भ - Contemporaneous context _
— प्राायोगिक सन्दर्भ - Experimental context_
पर ठाठस’ ठठिक’, जमिक’ जाँघ जोड़िक’ एकठौहरी एकमुहरी भ’ एकर समग्र मुद्दा आ विषय–परिदृशयके एहन सानि–मथिक’ निष्कर्षपर पहुँची जे एकर रचनाधर्मिता आ लेखन–प्रक्रियाके समेकित ऊर्जा आ उत्साह दैक आ एकटा ठोस दिशानिर्देश ई पाबए । समकालीन मैथिली कथालेखनक अवलोकन आ पठित कथाके प्रतिक्रियात्मक टिप्पणीस’ कथाकारके रचनात्मक ऊर्जा आ विश्वास प्रदान करबाक हेतुए अपन धारणा सहित, अपन विचारात्मक निर्देशकीय भूमिकास’ उत्साहजनक स्थिति–परिस्तिथि निमार्ण करैत, गोष्ठीके ऐतिहासिकता प्रदान कएल जाय !
प्रा.परमेश्वर कापड़ि २०६८/८/०४ गोष्ठी संयोजक श्रीरामानन्द युवा क्लव, जनकपुरधाम }

सुनल जाओ मैथिलीमे सामाचार २३ दिसंबर २०११ (साभार जानकी एफ.एम., जनकपुर)

गुवाहाटीक १७म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी ग्राहकक आग्रहपर एक दिन लेल बढ़ल

-गुवाहाटीक १७म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी ग्राहकक आग्रहपर एक दिन लेल बढ़ल
-२४ दिसम्बर २०११ केँ राति धरि गुवाहाटीमे मैथिली पोथी रहत उपलब्ध
-२४ दिसम्बर २०११ केँ भोरसँ राति धरि, स्थान- रूम संख्या २१७,  होटल ऋतुराज, माछखोवा, गुवाहाटीमे।
-सम्पर्क करू श्री उमेश मंडल- फोन- 09931654742


वि‍देह द्वारा मैथि‍ली पोथी प्रदर्शनी-
1. ‘वि‍देह’क पहि‍ल मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 27/09/2009 स्‍थान- नई दि‍ल्‍ली स्‍थि‍त श्रीराम सेन्‍टरक प्रेक्षागृहमे। अवसर- ‘जल डमरू बाजे’ नाटक-मंचन।
2. ‘वि‍देह’क दोसर मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 03/04/2011 स्‍थान- रामानन्‍द युवा कलव, जनकपुरधाम, नेपाल। अवसर- ‘सगर राति‍ दीप जरय’क 69म कथा गोष्‍ठी।
3. ‘वि‍देह’क तेसर मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 12/06/2010 स्‍थान- कवि‍लपुर लहेरि‍यासराय, दरभंगा। अवसर- ‘सगर राति‍ दीप जरय’ 70म कथा गोष्‍ठी।
4. ‘वि‍देह’क 4म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 02/10/2010 स्‍थान- बेरमा (तमुि‍रया) जि‍ला- मधुबनी। अवसर- सगर राति‍ दीप जरय’क 71म कथा गोष्‍ठी।
5. ‘वि‍देह’क 5म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- दुर्गापूजा-2010 स्‍थान- बेरमा (तमुि‍रया) जि‍ला- मधुबनी। 4 दि‍वसीय प्रदर्शनी।
6. ‘वि‍देह’क 6म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- दुर्गापूजा-2010 स्‍थान- घोघरडीहा (मधुबनी) दुर्गापूजाक मेला परि‍सर। अवसर- दुर्गापूजा-2010
7. ‘वि‍देह’क 7म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- दुर्गापूजा-2010 स्‍थान- हटनी (मधुबनी) दुर्गापूजाक मेला परि‍सर।
8. ‘वि‍देह’क 8म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 04/12/2010 स्‍थान- व्‍यपार संघ भवन, सुपौल। अवसर- सगर राति‍ दीप जरय’क 72म कथा गोष्‍ठी।
9. ‘वि‍देह’क 9म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 05/12/2010 स्‍थान- महि‍षी (सहरसा) अवसर- सगर राति‍ दीप जरय’क 73म कथा गोष्‍ठी।
10. ‘वि‍देह’क 10म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 09/07/2011 स्‍थान- अशर्फीदास साहु समाज महि‍ला इंटर महावि‍द्यालय परि‍सर- नि‍र्मली (सुपौल), अवसर- सामानांतर साहि‍त्‍य अकादमी मैथि‍ली कवि‍ सम्‍मेलन-2011
11. ‘वि‍देह’क 11म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 02 नभम्‍बर 2010 स्‍थान- एस.एम. पब्‍ि‍लक स्‍कूल परि‍सर झि‍टकी-वनगामा (मधुबनी), अवसर- स्‍कूल वार्षिकोत्‍सव।
12. ‘वि‍देह’क 12म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- सरस्‍वतीपूजा- 2011 स्‍थान- चनौरागंज (मधुबनी) अवसर- सरस्‍वतीपूजा नाट्य उत्‍सव- 2011
13. ‘वि‍देह’क 13म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 10/09/2011 स्‍थान- हजारीबाग (झारखण्‍ड), अवसर- सगर राति‍ दीप जरय’क 74म कथा गोष्‍ठी।
14. ‘वि‍देह’क 14म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- दुर्गापूजा-2011 स्‍थान- बेरमा (मधुबनी) 4 दि‍वसीय प्रदर्शनी।
15. ‘वि‍देह’क 15म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 02/11/2010 स्‍थान- उच्‍च वि‍द्यालय परि‍सर- खरौआ जि‍ला- मधुबनी। अवसर- महाकवि ‍लालदासक 155म जयन्‍ती समारोह।

16.विदेहक १६म मैथिली पोथी प्रदर्शनी 10-11 दिसम्बर 2011 केँ  ,साँझ 6 बजेसँ भोर ८ बजे धरि , स्थान-कॉपरेटिव फेडेरेशन हॉल, निकट म्यूजियम, पटनामे सम्पन्न भेल। अवसर-75म सगर राति दीप जरए।
17.१७म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी:- २२-२४ दिसम्बर २०११ केँ गुवाहाटीमे। २२-२३ दिसम्बर २०११ केँ प्राग्ज्योतिष आइ.टी.ए. सेन्टर, माछखोवा, गुवाहाटी- ७८१००९ (२२ दिसम्बर २०११ केँ ४ बजे अप्राह्णसँ ९ बजे राति धरि आ २३ दिसम्बर २०११ केँ ११ बजे पूर्वाह्णसँ ३ बजे अपराह्ण धरि आ २३ दिसम्बर २०११ केँ फेर ५ बजे अपराह्णसँ देर राति धरि) आ  २४ दिसम्बर २०११ केँ भोरसँ राति धरि स्थान- रूम संख्या २१७,  होटल ऋतुराज, माछखोवा, गुवाहाटीमे। अवसर मि‍थि‍ला सांस्‍कृति‍क समन्‍वय समि‍ति‍क आयोजि‍त "अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन" आ "आठम मिथिला रत्न सम्मान समारोह" ( २२ दि‍सम्‍बर २०११) आ "वि‍द्यापति स्‍मृति‍ पर्व समारोह" (२३ दि‍सम्‍बर २०११) । १७म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी ग्राहकक आग्रहपर एक दिन लेल (२४ दिसम्बर २०११ केँ )  बढ़ाओल गेल।

Friday, December 23, 2011

गुवाहाटीमे "विद्यापति स्मृति पर्व समारोह" आइ २३ दिसम्बर २०११ केँ ५ बजे अपराह्णसँ शुरू/ जगदीश प्रसाद मण्डलजी क उद्बोधन भाषण भेल



मिथिला सांस्कृतिक समन्वय समिति द्वारा गुवाहाटीमे आयोजित "विद्यापति स्मृति पर्व समारोह" स्थान: प्राग्ज्योतिष आइ.टी.ए. सेन्टर, माछखोवा, गुवाहाटी  आइ २३ दिसम्बर २०११ केँ ५ बजे अपराह्णसँ शुरू भेल/
ऐ अवसरपर विशेष अतिथि छथि डॉ. श्रीमती प्रेमलता मिश्र "प्रेम" आ सम्माननीय अतिथि छथि श्री जगदीश प्रसाद मण्डल।
जगदीश प्रसाद मण्डलजी क उद्बोधन भाषण भेल जे नीचाँ देल जा रहल अछि।

जगदीश प्रसाद मण्डल
जगदीश प्रसाद मण्डलजी क उद्बोधन भाषण:-
सभसँ पहि‍ने ऐ पर्व समारोहक सहयोगी आ मि‍थि‍ला सांस्‍कृति‍क समन्‍वय समि‍ति‍केँ धन्‍यवाद दैत छि‍यनि‍ जे मि‍थि‍ला आ कामरूपक बीच युग-युगसँ प्रवाहि‍त होइत जीवन धाराकेँ जीवि‍त रखने छथि‍। संगहि‍ आगूओ एहि‍ना लहड़ाइत धाराकेँ जीवि‍त रखताह, से आशा करैत छी।
कामरूप आ मि‍थि‍लाक बीच संबंध कहि‍यासँ शुरू भेल, एकर नि‍श्चि‍त ति‍थि‍ तँ नै बुझल अछि‍, मुदा सहस्रो सालसँ जीवन धारा बनि‍ प्रवाहि‍त होइत आबि‍ रहल अछि‍, ई कहैमे कनि‍योँ मनमे संकोच नै अछि‍। जे कामरूप कहि‍यो प्राग्‍ज्‍योति‍ष कहल जाइत छल भरि‍सक तहि‍येसँ। ओना इति‍हासक वि‍द्यार्थी नै रहने इति‍हास पढ़लो नै अछि‍। भऽ सकैत अछि‍ जे जहि‍ना मि‍थि‍लाक संपूर्ण इति‍हास लि‍खि‍नि‍हारक अभाव रहल अछि‍ तहि‍ना भाषोक हुअए। मुदा दुनूक बीच प्रगाढ़ संबंध बनल चलि‍ आबि‍ रहल अछि‍, ऐमे कतौ दू-राइ नै अछि‍। जखन बच्‍चे रही तहि‍यो बूढ़-बूढ़ानुसक मुँहे सुनैत रही जे फल्‍लां कामरूपक सि‍ख छथि‍। ततबे नै मि‍थि‍लावासीक लेल कामरूप कामाख्‍या, अदौसँ तीर्थ-स्‍थल बनल चलि‍ आबि‍ रहल अछि‍, आगूओ चलैत रहत। जहि‍ना बंगालक गंगासागर, दक्षि‍णेश्वर, उड़ीसाक कोणार्क आ जगरनाथ मद्रासक श्वेतबान रामेश्वर, कन्‍याकुमारी, गुजरातक द्वारि‍का, राजस्‍थानक पुष्‍कर पंजावक स्‍वर्ण मंदि‍र, कश्मीरक वैश्‍णोदेवी-अमरनाथ, उत्तरांचलक बद्रीनाथ, हरि‍द्वार उत्तर प्रदेशक काशी, वि‍न्‍घ्‍यांचल मथुरा-वृन्‍दावन इत्‍यादि‍ रहल अछि‍, तहि‍ना। जइ समए गाड़ी-सवारीक अभाव छल तहू समए छल।
शंकरदेवक पारिजातहरण  रामविजय , दैत्यारि ठाकुरक श्यामन्तहरण यात्रा आ  लक्ष्मीदेवक कुमारहरण नाट (शतस्कन्ध रावण वध), ई सभ अंकियानाट मैथिलीक आरम्भिक नाटक अछि आ असमक ऐ ऋणसँ हम सभ कहियो उऋण नै भऽ सकै छी।

गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदानक बीच बसल मि‍थि‍लो आ कामरूपोक रहने उपजा-बाड़ीसँ लऽ कऽ जि‍नगीक आनो-आनो संबंध सहज अछि‍। जहि‍ना कामरूप तलहटी मैदानसँ लऽ कऽ पहाड़-पठार, वनक संग प्रवाहि‍त होइत जलधारासँ सम्‍पन्न अछि‍ तहि‍ना बि‍‍हारो अछि‍। बंगालक खाड़ीसँ उठैत माैनसुनसँ जहि‍ना कामरूपक भूमि‍ सि‍ंचि‍त होइत तहि‍ना मि‍थि‍लांचलोक। ओना मुँहपर पड़ने कामरूपमे अधि‍क आ जेना-जेना पछि‍म मुँहेँ ससरैत तेना-तेना कम होइत जाइत, मुदा दुनूक बीच नजदीकी रहने बहुत बेसी अंतर नै पड़ैत। गंगा-ब्रह्मपुत्रक एक तलहटी रहने माटि‍यो आ माइटि‍क सुगंधोकेँ एकरंगाह बनौने अछि‍। उत्तरी पहाड़सँ नि‍कलैत (नदी धारा) जल धारो एक-रंगाहे रहल अछि‍। जइठाम जेहन माटि‍-पानि‍ तइठाम तेहन उपजा-बाड़ी। जइठाम जेहन उपजा-बाड़ी तइठाम तेहने खानो-पान आ आचारो-वि‍चार। जइठाम जेहन खान-पान, आचार-वि‍चार तइठाम तहि‍ना कला-सांस्‍कृति‍क संबंध। जे दुनूक बीच अदौसँ रहल अछि‍। ओना, खेती-बाड़ीमे एक-रूपतो अछि‍ आ भि‍न्नतो। अधि‍क मध्‍यम बर्षा भेने, पनि‍सहू फसि‍लो आ फलो-फलहरीमे अन्‍तर होइत, से अछि‍यो। जइ कामरूपमे नारि‍यल, सुपारी, चाहक बहुतायत अछि‍ ओ मि‍थि‍लांचलमे कम अछि‍। ओना मि‍थि‍लांचलमे ि‍सर्फ आम हजारो कि‍स्‍मक अछि‍। मुदा पटुआ आ धान जहि‍ना कामरूपक मुख्‍य फसि‍ल अछि‍ तहि‍ना मि‍थि‍लोक। मुदा जहि‍ना नीलक नव अवि‍ष्‍कार भेने नीलक खेती मारल गेल तहि‍ना पोलीथि‍नक आगमनसँ पटुआक खेती प्रभावि‍त भेल अछि‍।
मि‍थि‍लाक उर्वर भूमि। जहि‍ना माटि‍-पानि‍ तहि‍ना स्‍वच्‍छ हवो। जइसँ सभ कथूक वृद्धि‍। चाहे ओ खेती हुअए आकि‍ जीवन पद्धति‍ हुअए आकि‍ कला-संस्‍कृति‍। मि‍थि‍लांचलक चि‍न्‍तन धारामे ि‍सर्फ उच्‍चकोटि‍क मनुष्‍ये नै उच्‍च कोटि‍क समाज आ सामाजि‍क-पद्धति‍क सेहो दि‍शा-दर्शन रहल अछि‍। जन-गणक नगर जनकपुर। आ जनकपुरक राजा जनक। जनि‍क कन्‍या जगत जननी जानकी। एक-सँ-एक चि‍न्‍तक, तत्ववेत्ता, दार्शनि‍क मि‍थि‍ला भूमि‍ पैदा केने अछि‍‍। जेकर वानगी इति‍हास-पुराण जीवि‍त अछि‍।

जहि‍ना सौंसे देश गुलामीक शि‍कंजामे हजारो बर्खसँ रहल तहि‍ना देशक उत्तर-मध्‍य बसल मि‍थि‍लो अछि‍। ओना मि‍थि‍ला दू देशमे बटल अछि‍। साठि‍-पेइसठि‍ बर्ख पहि‍ने भारत स्‍वतंत्रताक साँस लेलक जहन कि‍ नेपालक मि‍थि‍ला हालमे साँस लेलक। जहि‍ना अभावी परि‍वारमे अभावक चलैत जीवनक सभ कि‍छु प्रभावि‍त होइत, तहि‍ना भेल। जीवन-पद्धति‍मे खोंट अबैत-अबैत खोंटाह होइत गेल अछि‍। जेकर असरि‍ अधलाह पड़ैत गेल। मुदा तैयो मि‍थि‍लाक वएह भूमि‍ छी जे अदौसँ रहल।
मि‍थि‍लांचलक उर्वर भूमि‍ रहने मनुष्‍योक बाढ़ि‍ सभ दि‍नसँ रहल, अखनो अछि‍ आगूओ रहत। कतबो मि‍थि‍लावासी पड़ाइन (पलायन) केलनि‍, दुनि‍याँक कोन-कोनमे बसलाह अछि‍, तैयो मि‍थि‍लाक जनसंख्‍या पर्याप्‍त अछि‍ये। जइसँ गरीबी रहल अछि‍। एक दृष्‍टि‍ये देखलासँ जहि‍ना पर्याप्‍त जनसंख्‍या अछि‍ तहि‍ना प्रचुर सम्‍पत्ति‍यो अछि‍। मुदा दुनूक संयोगमे भि‍न्नता अछि‍। जइसँ दुनूक बीच भारी खाधि‍ बनि‍ गेल अछि‍। जि‍नकर गाम ति‍नकर सम्‍पत्ति‍ नै आ जि‍नकर सम्‍पत्ति‍ ति‍नकर गाम नै। जइसँ मुट्ठी भरि‍ पूर्ण सम्‍पत्ति‍ हथि‍यौने छथि‍। जेकर ज्‍वलंत उदाहरण पड़ाइन (पलायन) अछि‍।

गरीबीक चलैत मि‍थि‍लावासी आइये नै पूर्वहि‍सँ नेपाल, बंगाल, अासाम धरि‍ रोजी-रोटीक लेल जाइत रहल छथि‍। पटुआ काटब, धान रोपब, धान काटब हुनका सबहक मुख्‍य कार्य छलनि‍। सालक छह मास ओ सभ कमाइ छलाह। मुदा ओइसँ पैघ-पैघ उपलब्‍धि‍ सेहो भेटल। अपना संग अपन भाषो, कलो-संस्‍कृत लेनौं अबैत छलाह आ लैयो जाइत छलाह जइसँ दुनूक बीचक संबंधमे प्रगाढ़ता अबैत रहल। एकठाम रहने दुनूक बीच सभ तरहक संबंध बनैत रहल आ अखनो प्रवाहमान धारा सदृश्‍य बहि‍ रहल अछि‍। तँए ऐ पावन अवसरपर समन्‍वय समि‍ति‍ संग वि‍द्योपति‍केँ कोटि‍श: नमस्‍कार!

पूर्वाचल आ मि‍थि‍ला, दुनूक बीच व्‍यापारि‍क संबंध सेहो अदौसँ रहल अछि‍। गाए-महि‍ंसिक व्‍यापार चलैत रहल अछि‍। संग-संग कलाकारक संग कलाक आदान-प्रदान सेहो चलैत रहल अछि‍। अखनो मि‍थि‍लाक श्रमि‍कक बीच जते पूर्वाचलक भाषा पसरल अछि‍ ओते मध्‍य आ उच्‍च परि‍वारक बीच नै अछि‍।
वि‍द्यापति‍ पर्व समारोहक ऐ पावन असवरपर वि‍द्यापति‍केँ ि‍सर्फ मि‍थि‍ले-मैथि‍ल कहब हुनका संग अन्‍याय करब हएत। हुनका आत्‍माकेँ ठेस पहुँचतनि‍। ओ युग-पुरूष छलाह। भाषा-साहि‍त्‍यक अपन धारा अछि‍। जइ धाराक मध्‍य ओ अखनो ठाढ़ छथि‍। वैदि‍क भाषा जखन जन-गणक बीच अपन साहि‍त्‍यि‍क धारा पकड़लक, तहि‍येसँ समाजमे एक नव समाज उठि‍ कऽ ठाढ़ भेल। ओ बढ़ैत-बढ़ैत कालि‍दास धरि‍ अबैत-अबैत सोझा-सोझी ठाढ़ भऽ गेल। मुदा जि‍नगीक लेल भाषा-अनि‍वार्य, तँए जन-गणक बीच पालि‍ भाषा उगल। तहि‍ना आगू बढ़ैत- प्राकृत, अपभ्रंश होइत अवहट्ठमे पहुँच गेल।
अवहट्ठक सीमानपर वि‍द्यापति‍ अपन कीर्तिलता लऽ कऽ ठाढ़ छथि‍। जइमे जन-गणक आत्‍मा झलकि‍ रहल छन्‍हि‍। ओना ओ संस्‍कृतक प्रगाढ़ पंडि‍त छलाह, जे हुनक रचनामे झलकि‍ रहल अछि‍, ओ उगना सन संगीक संग रहैत छलाह। जे उगना गंगाजल पहुँचबैत छलनि‍। एक भांग पीसैमे मस्‍त तँ दोसर पीब-पीब मस्‍त! एहनठाम हटलासँ, वि‍द्यापति‍ पत्नि‍योसँ झगड़ा कऽ उगना लेल नि‍ष्‍काम प्रेम धारा नै बहाबथि‍, से केहन होएत।
अंतमे, जहि‍ना अदौसँ एक-दोसर सटल रहलौं तहि‍ना आगूओ सटि‍ चलैत रही, यएह शुभ-कामना। एहेन-एहेन पर्व आरो नम्‍हर भऽ भऽ मनाओल जाइत रहए, यएह शुभेच्‍छा!

जय-मैथि‍ली! जय मि‍थि‍ला!!, जय कामरूप! जय भारत!! जय मानव!!!

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जगदीश प्रसाद मण्‍डल