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Thursday, March 27, 2014

“81म सगर राति‍ दीप जरए :: हमरा नजरि‍मे, हम दुर्गानन्‍द मण्‍डल

81म सगर राति‍ दीप जरए कथा गोष्‍ठी देवघरमे

:: हमरा नजरि‍मे, हम दुर्गानन्‍द मण्‍डल

दि‍नांक 22/03/2014 तदनुसार दि‍न शनि, स्‍थान देवघर (बाबाधाम) झारखण्‍ड बि‍हारमे सगर राति‍ दीप जरए केर 81म कथा गोष्‍ठीक आयोजन। स्‍व. मायानन्‍द मि‍श्र एवं जीवकान्‍तक स्‍मृति‍मे समरपि‍त। स्‍थान बम्‍पास टॉनक बि‍जली कोठी-3। समए साँझ 6 बजेसँ भि‍नसर 6 बजे धरि‍। सफल सम्‍पन्न भेल। संयोजक छला श्री ओम प्रकाश झा आयोजक। हिनकर गहि‍ंकी नजरि‍ गोष्‍ठीक मादे सुक्षत्‍म बात धरि‍ राति‍ भरि‍ रहलनि‍। सफलताक श्रेय झाजीक वि‍भागीय कर्मठ सहयोगी आ मैथि‍ली प्रेमी आनो-आनो मैथि‍ल जि‍नकर सहयोग बि‍सरल नै जा सकत। दर-दतमनि‍सँ लऽ तेल साबून, जलखै-जलपान आ भोजन-भात धरि‍ सतत् रहलनि‍। जइमे कि‍छु खास चेहरा जे बि‍सरल नै जा सकै छथि‍ ओ सभ छथि‍ अवकाश प्राप्‍त अभि‍यंता श्री ओ.पी. मि‍श्रा, सुशील भारती, दि‍लीप दास इत्‍यादि‍ हुनक वि‍भागीय सहयोगीगण।
पूर्व जनतब आ मोबाइल मैसेजिंग केर अधारपर पूर्वहिंसँ नै मात्र मि‍थि‍लांचल अपि‍तु भारत भरि‍सँ मैथि‍लीक प्रेमी कथाकार लोकनि‍ अपन उपस्‍थि‍ति‍ दर्ज कऽ सगर राति‍ दीप जरए केर ऐ अनुपम गोष्‍ठीमे गोष्‍ठीक राति‍क रूपमे बन्‍हने रहला। राति‍ छोट आ कथा आ कथाकार अधि‍क भऽ गेला। ईहो एक तरहक गोष्‍ठीक सफलताक परि‍चायक छल हमरा नजरि‍मे।
गोष्‍ठीक उद्घाटनकर्ताक रूपमे मुख्‍य अति‍थि‍ श्री ओ.पी.मि‍श्राजी दीप प्रज्‍वलि‍त कऽ केलनि‍। मि‍श्रा जीक संग आयोजक ओमजी, संचालक गजेन्‍द्र ठाकुर, अध्‍यक्ष जगदीश प्रसाद मण्‍डलजी आ हम तथा हमरा संग उमेश मण्‍डलजी एवं आनो-आन जेते उपस्‍थि‍त कथाकार-साहि‍त्‍यकार रहथि‍ सभ कि‍यो देलनि‍।
पछाति‍ श्री एस.के.मि‍श्राजी मंगलाचरणक उच्‍चारण केलनि‍। मैथि‍लीक भि‍खाड़ी ठाकुर रामदेव प्रसाद मण्‍डल झारूदारजी नव सृजि‍त स्‍वागत गीत हम नै छी अहाँ योग यौ पाहुन...। गाबि‍ समस्‍त मैथि‍ल आ मि‍थि‍लाक मान बढ़ौलनि‍। बि‍जली कोठीक सभागार कथाकार लोकनि‍सँ पूर्णत: भरल काफी अइल-फइल जगह, सभ कथुक बेवस्‍थो उत्तम। सभागारक शोभामे मि‍डि‍याकर्मीक उपस्‍थि‍ति‍सँ आरो चारि‍ चान लागि‍ गेल।
शरू भेल पोथी लोकार्पण सत्र जइमे शि‍वकुमार झा टि‍ल्‍लू रचि‍त समालोचनाक पोथी अंशु’ लोकार्पणकर्ता श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल अध्‍यक्ष, राजदेव मण्‍डल आ बेचन ठाकुर छला। अंग्रेजी-मैथि‍ली शब्‍दकोष भाग-2, मैथि‍ली-अंग्रेजी कम्‍प्‍यूटर शब्‍दोकाष आ बेचन ठाकुरक ऊँच-नीच नाटकक लोकार्पण सेहो भेल। श्री गजेन्‍द्र ठाकुरक संपादि‍त दू गोट अति‍महत्‍वपूर्ण पोथी जि‍नोम मैपिंग-भाग-2 आ जि‍नि‍योलोजि‍कल मैपिंग 450 एडीसँ 2009 एडी धरि‍क मि‍थि‍लाक पंजी प्रवन्‍धक लोकार्पण आयोजक श्री ओम प्रकाश झा, डॉ. योगानन्‍द झा आ श्री राजीव रंजन मि‍श्रा जीक हाथसँ भेल।
शुरू भेल कोष्‍ठीक परि‍पेक्ष्‍यमे दू शब्‍द। दू शब्‍दक कड़ीमे श्री मान् ओ.पी. मि‍श्रा, दि‍लीप दास, सुशील भारती, ओम प्रकाश झा इत्‍यादि‍ लोक मैथि‍लीक सहज वि‍कासक लेल अपन उनमुक्‍त वि‍चार रखलनि‍। मैथि‍लीक वि‍कास दि‍नानुदि‍न हएत आ मैथिल धनी हेता। कथा गोष्‍ठीमे कुल मि‍ला कऽ सात गोट पाली बनल। कुल मि‍ला कऽ 34 गोट छोट-पैघ लघुकथा वा वि‍हनि‍ कथाक पाठ भेल। गोष्‍ठीक वि‍शेषता ई रहल जे प्रति‍येक पालीमे कथा वाचनक बाद पहि‍ले समीक्षा कएल गेल पछाति‍ समीक्षाक समीक्षा वरि‍ष्‍ठ समीक्षक लोकनि‍ द्वारा भेल। पहि‍ल सत्रमे चारि‍ गोट कथाकारक कथा जेना असली हीरा दुर्गानन्‍द मण्‍डल, रि‍क्‍शाक भाड़ा आ वुधि‍ए बताह फागुलाल साहु, बुढ़ि‍या मैया ओम प्रकाश झा आ उमेश मण्‍डल जीक केते बेर कथाक पाठ कएल गेल। ऐ पालीक समीक्षकक रूपमे डॉ. योगानन्‍द झा, श्री राजदेव मण्‍डल, श्री प्रमोद कुमार झा आ श्री अरवि‍न्‍द ठाकुरजी रहथि‍। समीक्षाक समीक्षकक रूपमे श्री नन्‍द वि‍लास राय, चन्‍दन झा आ डॉ. धनाकार ठाकुर छला। हि‍नका लोकनि‍क उपस्‍थि‍ति‍ मंचपर कथा वाचनसँ पूर्वसँ छल, जइसँ ओ लोकनि‍ पूर्णरूपेण वकोधि‍यानम् भऽ कथा श्रवण करथि‍ आ सम्‍पूर्ण रूपेँ समीक्षा हुअए।  
समीक्षाक समीक्षकक रूपमे अरवि‍न्‍द्र ठाकुरजी एकटा महतपूर्ण कही आकि‍ आर कि‍छु, टि‍प्‍पणी देलनि‍ जे सगर राति‍ दीप जरए कथा गोष्‍ठीक एकटा नि‍अम रहल जे समीक्षापर समीक्षा नै हेबक चाही। कि‍एक तँ गोष्‍ठीमे वि‍वाद उत्पन्न भऽ सकैए। दोसर गप ई जे जइ कथाकारक कथापर समीक्षा हुअए ओ स्‍वयं टि‍प्‍पणी नै करथि‍। जैपर मंच संचालक महोदय अपन महतपूर्ण वक्‍तव्‍यसँ समीक्षक लोकनि‍केँ सन्‍टुष्‍ट कएल। प्रति‍समीक्षाक क्रममे एकटा आर बात आएल जे कथाक गहराइकेँ आधुनीक पाठक स्‍वागत नै करैए जे कथाक दोष भेल। फलस्‍वरूप पाकक अभाव अछि‍ मैथि‍ली साहि‍त्‍यमे।
मंच संचालक महोदय असहमति‍ ऐ प्रकारे देलनि‍ जे ई तँ भाषाक वि‍शेषाता छि‍ऐ जे कथानककेँ गहराइ प्रदान करत। पाठकक अभावक कारण आरो-आर कारण सभ रहल अछि‍। आजुक गहींरगर कथा पाठककेँ खूब जोड़ि‍ रहल अछि‍।
प्रति‍समीक्षकक रूपमे डॉ. धनाकर ठाकुरक एहेन वि‍चार आएल जेना मनो भरि‍ दूधमे पाभरि‍ फि‍टकि‍री पड़ि‍ गेल हो। जेना छोटी लाइनक गाड़ी एकाएक पाठि‍ बदलि‍ कोना दोसर लाइनपर चलि‍ गेल हो आ कोनो पैघ दुर्घटना होइत-होइत बँचल हो। हुनक बात-
अहाँ लोकनि‍क समीक्षा मुँह देखि‍ मुंगबा रहैए जे फल्‍लां एहेन कथाकार छथि‍, ई कथा एहेन अछि‍ तँए एकर समीक्षा एना-नै-एना करी।
सम्‍पूर्ण कथा गोष्‍ठीक शोभा अपन-अपन समीक्षीय वि‍चार दऽ बढ़बैत रहला।
दोसर सत्रमे श्री नन्‍द वि‍लास राय जीक भी.आई.पी. गेस्‍ट, राजदेव मण्‍डलक डरक डंका, राम वि‍लास साहुक मजबूरी आ इमानदारीक पाठ, ललन कुमार कामतक अप्‍पन माए-बाप कथाक पाठ भेल।
समीक्षक लोकनि‍ अपन-अपन वि‍चार रखलनि‍। पछाति‍ आयोजक महोदयक तरफसँ भोजन हेतु बीझो भेल। एकपति‍आनीमे बैस करीब सबा सए गोटे एक संग बैस भोजन केलनि‍। भोजनक लेल मि‍थि‍लाक माटि‍-पानि‍ परहक उपजल तीमन-तरकारीक बेवस्‍था छल। कथुक कमी नै। एहेन बुझना जाइ छल जेना मरजादी भोज हो। भोजनक घंटा भरि‍ पछाति‍ अगि‍ला सत्रक शुभारम्‍भ भेल। जइमे नि‍म्न कथाक पाठ भेल-

छि‍न्ना-झपटी- श्री शि‍व कुमार मि‍श्र (बेरमा)
बड़का मोछ- श्री कपि‍लेश्वर राउत (बेरमा)
उतेढ़क श्राद्ध- श्री शम्‍भू सौरभ (बैका)
जाति‍क भोज- श्री उमेश पासवान (औरहा)

गुरुदक्षि‍णा- डाॅ. योगानन्‍द झा (कबि‍लपुर)
अपराध- श्री पंकज सत्‍यम् (मधुबनी लगक)
ककर चरवाही आ चुनावधर्मी लोक- डॉ. उमेश नारायण कर्ण
कबाउछ- डॉ. धनाकर ठाकुर

आन्‍हर- श्री अखि‍लेश कुमार मण्‍डल (बेरमा)
सरकारीए नौकरी कि‍एक- बि‍पीन कुमार कर्ण (रेवाड़ी)
बनमानुष आ मनुष- डाॅ. शि‍वकुमार प्रसाद (सि‍मरा)
वृधापेंसन आ मजबुरी- श्री शारदानन्‍द सि‍ंह
पानि‍- श्री बेचन ठाकुर

सत्ता-चरि‍त- श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर (सुपौल)
बापक प्राण- श्री भाष्‍करानन्‍द झा भाष्‍कर (कोलकाता)  
संबोधन- श्री चन्‍दन कुमार झा (कोलकाता)
ठीका- श्री आमोद कुमार झा
चौठि‍या- श्री अच्‍छेलाल शास्‍त्री (सोनवर्षा)

तखन, जखन- श्री गजेन्‍द्र ठाकुर (दि‍ल्‍ली)
चैन-बेचैन- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल (बेरमा)
कथाक पाठ होइत रहल आ संक्षि‍प्‍त टि‍प्‍पणी चलैत रहल।

कथा गोष्‍ठीक वि‍शेषता ई रहल जे सम्‍पूर्ण कार्यक्रमक वि‍श्व भरि‍मे लाइव प्रसारण कएल गेल। जे सगर राति‍ दीप जरए केर पन्नामे ऐति‍हासि‍क कार्य भेल। अगि‍ला गोष्‍ठी हेतु दू गोट प्रस्‍ताव आएल। पहि‍ल श्री गजेन्‍द्र ठाकुर मेंहथ आ पंकज सत्‍यमक मुजफ्फरपुर लेल। कथा गोष्‍ठी जाएत केतए ऐपर अरवि‍न्‍द्र ठाकुरक टि‍प्‍पणी भेल- ‘अध्‍यक्ष महोदय जेतक लेल वि‍चार दथि‍।’ मुदा अध्‍यक्ष महोदय बात कटैत कहलनि‍- ‘अध्‍यक्षे टाक वि‍चार नै अपि‍तु समस्‍त कथाकार वि‍चारसँ कथा गोष्‍ठी केतए जा से निर्णए हुअए।’ अंतमे सर्वसम्‍मति‍सँ अगि‍ला कथा गोष्‍ठी मेंहथमे होबाक निर्णए भेल। जे श्री गजेनद्र ठाकुर 31 मई 2014केँ होएत। जे बाल साहि‍त्‍यपर केन्‍द्रि‍त रहत। ऐ लेल श्री ठाकुरजी समस्‍त कथाकार लोकनि‍केँ सबजाना हकार देब सेहो नै बि‍सरला। कहिए देलखि‍न- ‘सभ कि‍यो सादर आमंत्रि‍त छी मेंहथ कथा गोष्‍ठीमे।’ अहूँ सभ धि‍यान राखब। ई भेल हमर हकार।

           

81म सगर राति‍ दीप जरए- देवघरमे उमेश मण्‍डल पाठ केलनि‍ ''केते बेर''

केते बेर


ओना तँ केते बेर बरि‍याती जाइसँ सप्‍पत खेने छेलौं मुदा समए एने जहि‍ना देशो-कोस, दि‍नो-दुनि‍याँ बदलैए तहि‍ना वि‍चार बदलि‍ जाइ छेलए जइसँ सप्‍पत टुटि‍ जाइ छेलए। मुदा से ऐबेर नै भेल, कान पकड़ि‍ खूब अँठि‍ कऽ सप्‍पत खा लेलौं। आगूक बात पछुआ पकड़ि‍ पछुआएले छल आकि‍ बि‍च्‍चेमे दुखन भाय टोकि‍ देलनि‍-
भुमहुरक आगि‍ जकाँ तरे-तर भुमि‍आइ छेँ मुदा खोलि‍ कऽ बजमे से बकार नै फुटै छौ।
अनकर बात रहैत तँ वि‍चार करै तक अँटकबो करि‍तौं मुदा शि‍वदूतक आगू जहि‍ना नारद बाबा फँसि‍ गेला, तहि‍ना फँसि‍ गेलौं। सँझुका नढ़ि‍याक पुक्की पेबि‍ पुक्की भरलौं-
भैया, अहाँ लग लाथ कथीक, अखनि‍ तक दुइए गेटे एहेन अछि‍ जेकर बात मानि‍ लइ छि‍ऐ, दुनू लंगोटि‍या संगीक संग एक्के कि‍लासमे पढ़ि‍तो छी।
बुझबे ने केलि‍ऐ, अपने बेथाएल बेथाक भूमि‍कामे ओझरा हथि‍नी गति‍ये चाइल धेने रही मुदा जेना दुखन भायकेँ केतौ जेबाक रहनि‍ तहि‍ना फुनफुनाइत बजला-
देख, सौति‍नी खि‍स्‍सा सुनैले छुट्टी नइए!
झँटाएल मन बि‍च्‍चेमे बजा गेल-
की सौति‍नी खि‍स्‍सा?”
मुँहक मोती खसबि‍ते दुखन भाय लोकि‍ लेलनि‍-
जानि‍ए कऽ उक्‍खरि‍मे मुड़ी देब तखनि‍ मुसराक डर केने हएत, सौति‍न घर बास। तैपर खि‍स्‍सा पि‍हानी नै भेल तखनि‍ तँ पति‍वरतेक घर भेल कि‍ने?”
मनमे भेल जे जँ कहीं दुखन भाय अपने बात कहैत तरौटा जात छोड़ि‍ ससरि‍ गेला तखनि‍ तँ मुँहक मुद्रा मुहेँक बैंकमे रहि‍ जाएत। बौसैत बजलौं-
भैया, अहाँ तँ अलबेला लोक छी, अहाँले साँझ-भोरक बेलाक कोन मोल छै।
जेना नीक लगलनि‍, तहि‍ना नारि‍यल, कि‍समि‍स, मि‍सरीक त्रि‍वेणीमे स्‍नान करए लगला। हाँइ-हाँइ कऽ अपन बात नि‍कालए लगलौं-
बुझलि‍ऐ भैया की?”
लोकक आहटि‍ पाबि‍ खि‍खि‍रक कान जहि‍ना ठाढ़ रहैए तहि‍ना भैयो केलनि‍। मनमे भेल जँ तीर-धनुषक ओरि‍यान करए लगब तँ शि‍कारे छुटि‍ जाएत, तइसँ नीक गुलेतीएसँ काज चला ली। बजलौं-
भैया, बरि‍यातीमे खेबा काल तीनू गोटे एक्के ठीमन बैसलौं। गुण रहल जे बीचमे रही नै तँ खाइए काल दुनू गोटे मारि‍-मरौबलि‍ कऽ लतए। दुनू हाथ दुनू दि‍स उठेलौं तखनि‍ मारि‍ थमहल, नै तँ आने बरि‍याती जकाँ कान-कपार फोड़ेनै अबि‍तौं!
कान-कपार फोड़ेनाइ सुनि‍ दुखन भाय जेना नाँगरि‍ रोपि‍ कान ठाढ़ खि‍खि‍रक बच्‍चा जकाँ तकलनि‍। बजलौं-
भैया, कोबी तरकारी रहए, एक गोटे बजला- पछि‍ममे कोबीकेँ गोभी कहै छै आ पूबमे गोभीकेँ कोबी।
दुखन भाय बजला-
अपनो ऐठाम तँ लि‍खतनमे गोभी छै आ मुखतनमे कोबी छै। र्इ की भेल?”
कहलि‍यनि‍-
भैया, तेतबे नै ने भेल, गोभी तँ गोभकेँ कहल जाइ छै मुदा कोबीकेँ तँ फूल कहल जाइ छै।
फूल आ गोभ सुनि‍ दुखन भाय ठमकला। ठमकि‍ते गर अँटबए लगलौं जे जखने मुँह खोलता आकि‍ दोसर गर धरा थोपि‍ देबनि‍। मने-मन ओ गर लगबए लगला जे धानक गम्‍हराकेँ गोभो कहल जाइ छै, पछाति‍ फूल आ दाना होइ छै, मुदा से कोबीक नै अछि‍। जँ फूल मानि‍ लेब तँ फूलक अंति‍म अबस्‍थाक पछाति‍ गाछ नि‍कलै छै, गाछमे पीअर-पीअर फूल होइ छै तोड़ी छि‍म्‍मरि‍ जकाँ छीमी होइ छै, जइमे तोड़ीए दाना जकाँ बीआ होइ छै, ओइसँ कोबीक गाछ होइए, तखनि‍ कोबीक फूल भेल आकि‍ गोभ? मने-मन जेना ओझरा गेला। बजला कि‍छु ने। मुदा मुँहक रूखि‍ कि‍छु आरो सुनबाक बूझि‍ पड़ल। दोसर गुल्‍ली फेकलौं-
भैया, असलाहा बात तँ छुटि‍ए गेल।
बजला कि‍छु ने, मुदा मुँहक रूखि‍सँ बूझि‍ पड़ल जे मन जेना उचटि‍ रहल छन्‍हि‍। पुछलि‍यनि‍-
भैया, कोनो धड़फड़ीमे छी की?”
जान छोड़बैत दुखन भाय बजला-
बौआ, वि‍चारक प्रश्न उठेलह, मुदा नि‍चेन नै छी अखनि‍, जखनि‍ नि‍चेन रहब तखनि‍ तोहर अगि‍लो बात सुनबह।
आगू दि‍न सुनबह, सुनि‍ते मन जि‍राएल। मुदा तैयो मुँहसँ खसि‍ पड़ल-
भैया, सप्‍पत तँ केता बेर खेने छेलौं जे बरि‍याती नै जाएब, मुदा ऐबेर कान ओमठि‍ लेलौं। कहू जे जखनि‍ बरे बि‍का जाइए तखनि‍ बरि‍याती मंगनी-चंगनी छोड़ि‍ की भेल?”
मुँह मलि‍न रहि‍तो दुखन भाइक बतीसी मकैक लाबा जकाँ चमकि‍ उठलनि‍।¦¦¦
उमेश मण्‍डल

निर्मली (सुपौल) 

81म सगर राति‍क दीप जरल श्री ओम प्रकाश झाक संयोजकत्‍वमे :: उमेश मण्‍डल

सगर राति‍ दीप जरए- देवघर


स्‍व. मायानन्‍द मि‍श्र तथा जीवकान्‍तक स्‍मृत केँ समरपि‍त 81म सगर राति‍ दीप जरए केर आयोजन दि‍नांक 22 मार्च 2014केँ श्री ओम प्रकाश झाक संयोजकत्‍वमे संध्‍या 6 बजेसँ देवघरक बम्‍पास टॉनक बि‍जली कोठी-3 मे आयोजि‍त भेल। ओयोजनक उद्घाटन दीप प्रज्‍वलि‍त करि‍ श्री ओ.पी. मि‍श्राजी केलनि‍। मि‍थि‍लाक गाम-गामसँ आ भारतक शहर-शहरसँ आएल कथाकार, साहि‍त्‍यकार, समालोचक तथा साहि‍त्‍य प्रेमीक कसगर जुटान छल। साँझक पाँचे बजेसँ जुटान हुअ लगल। मि‍डि‍याकर्मीक थहाथही शुरू भऽ गेल।
शुभारम्‍भ मंगला चरणसँ श्री एस.के. मि‍श्राजी केलनि‍। झारूदारजी अपन सृजि‍त अनुपम गीत
हम नै छी अहाँ योग यौ पाहुन/ अहाँ छी बड़ा महान/ स्‍वागत स्‍वीकार करू श्रीमान्/ अहाँ छी गंगा अहाँ छी यमुना/ पग धुलसँ पावण भेल अँगना...।
गाबि उपस्‍थि‍त साहि‍त्‍यप्रेमी आ साहि‍त्‍यकारकेँ स्‍वागत केलनि‍।
पोथीक लोकार्पण शुरू भेल। गजेन्‍द्र ठाकुरक संग सम्‍पादनमे सम्‍पादि‍त मि‍थि‍लाक पंजी प्रबन्‍ध जीनाेम मैपि‍ंग भाग- 2जि‍नीयोलोजि‍कल मैपि‍ंग 950 एडीसँ 2009 एडी धरि‍क पंजीक लोकार्पण श्री ओम प्रकाश झा, डॉ. योगानन्‍द झा आ श्री राजीव रंजन मि‍श्रा जीक हाथे भेल। शि‍वकुमार झा ‘टि‍ल्‍लू’जी रचि‍त समालोचनाक पोथी अंशु केर लोकार्पण श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री राजदेव मण्‍डल आ श्री बेचन ठाकुरजी केलनि‍। अंग्रेजी-मैथि‍ली शब्‍द कोष भाग-2, मैथि‍ली-अंग्रेजी कम्‍प्‍यूटर शब्‍दकोष तथा बेचन ठाकुरक ऊँच-नीच नाटकक लोकार्पण सेहो भेल।
दू शब्‍दक कड़ीमे प्रवेश केलौं। ओ.पी.मि‍श्रा, दि‍लीप दास, ओम प्रकाश झा, दैनि‍क समाचार पत्र प्रभात खबर केर सम्‍पादक श्री सुशील भारती मैथि‍लीक दशा दि‍सापर अपन वि‍चार प्रकट केलनि‍। ओ कहलनि-‍
अही तरहक आयोजन मैथि‍लीक सम्‍पूर्ण वि‍कासक मार्ग सहज बनौत।
आयोजककेँ धन्‍यवाद ज्ञापन करैत एक-सँ-एक साहि‍त्‍यकार अपन मनक खुलता बात मैथि‍ली वि‍कास लेल स्‍वतंत्रता पूर्वक मंचपर रखलनि‍। मुख्‍य अति‍थि‍ ओ.पी. मि‍श्राजी सेहो एकटा सुन्‍दर गीत गाबि‍ स्‍वागतक भाव प्रकट केलनि‍। राजीव रंजनजी स्‍वलि‍खि‍त गजल गाबि‍ अपन भाव प्रकट केलनि‍। सगर राति‍ दीप जरए (सभ अज्ञानीमे ज्ञानक दीप जरौ) कथायात्राक मादे श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक वि‍चार बकतनक संग लि‍खतनमे सेहो वि‍स्‍तारपूर्वक आएल। दू पि‍ट्ठा कागत हाथे-हाथ बाँटल गेल। जे ऐ लिंकपर उपलब्‍ध अछि‍-

देवघरक कथा गोष्‍ठीक अवसरि‍पर अध्‍यक्षीय भाषण :: श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल

उदय-प्रलय शाश्वत सत् जहि‍ना छै तहि‍ना जि‍नगीओ आ जि‍नगीक कि‍रि‍या-कलाप सेहो छै। मैथि‍ली साहि‍त्‍याकाशमे बीसम शताब्‍दीक आठम दशक ओहने ऊर्जावान साहि‍त्‍यकारक टोली छल जेहेन वर्षातक पछाति‍ ओस-पाला, गर्दा-धूरासँ स्‍वच्‍छ वायुमंडलक संग अकास रहैए। एक संग हरि‍मोहन बाबू (हरि‍मोहन झा), तंतर बाबू (तंत्रनाथ झा), मधुपजी (काशीकान्‍त मि‍श्र ‘मधूप’), कि‍रणजी (काञ्चीनाथ कि‍रण), मणि‍पद्मजी (ब्रज कि‍शोर वर्मा ‘मणि‍पद्म’), शेखरजी (शुधांशु शेखर चौधरी), योगाबाबू (योगानन्‍द झा), राघवाचार्यजी, (बोध नारायण झा), बहेड़जी (राधाकृष्‍ण झा ‘बहेड़’) आ राधाकृष्‍ण चौधरीजी सन मैथि‍ली साहि‍त्‍यकाशमे दुनि‍याँक सभ दि‍शा देखि‍नि‍हार छला। दार्शनि‍क रहि‍तो हरि‍मोहन बाबूकेँ मैथि‍ली साहि‍त्‍य हास्‍यसँ आगू नै बढ़ए देलकनि‍! एकैसम शदीक मांग अछि‍ जे हुनक समीक्षा मि‍थि‍लाक चि‍न्‍तनधारा, अध्‍यात्‍म दर्शनक कसौटीपर हुअए। तहि‍ना राधाकृष्‍ण जीक इति‍हासक मूल तत्‍वक सेहो। चौधरी जीक इति‍हास समाजमे पाठकक बीच एक नव सोच आ नव दृष्‍टि‍ दैत अछि‍ तँए ओइ दृष्‍टि‍सँ हुनका देखल जाए। भऽ सकैए कि‍छु पोथी हाथ नै पड़ल होन्‍हि‍, मुदा इति‍हासो तँ इति‍हासे छी। जे अखनि‍ तक रज-रजवारासँ आगू नै बढ़ल अछि‍, तैठाम इति‍हासक पूर्णता देखब उचि‍त नै। दुर्भाग्‍य रहल अछि‍ जे अखनि‍ धरि‍क इति‍हास सामाजि‍क ताना-बानाकेँ नीक जकाँ नै ताकि‍ सकल अछि‍। अखनो मि‍थि‍लाक खान-पान आ घर-दुआर अपन आदि‍म स्‍वरूपकेँ बँचौने अछि‍। मात्र देखैक नजरि‍क जरूरत अछि‍। जे मधुपजी पोरो सागकेँ देखि‍ सकै छथि‍ ओ साग खेनि‍हारकेँ नै देखि‍ पबि‍तथि? रहस्‍यमय अछि‍। कि‍रणजी तँ सहजे मैथि‍लीक कि‍रणे छला‍। कठही पैडि‍लक साइकि‍लपर शतरंजी चौपेतले रहै छेलनि‍। शरदक चान जकाँ चमकैत सोभाव। मात्र चाहपर अभ्‍यागती! बीचमे एकटा प्रश्न उठैए, ओहेन टोली आइ कि‍ए ने? साहि‍त्‍यजगतमे जागरण छल, समाजक बीच जि‍ज्ञासा छल जे कि‍ साहि‍त्‍य हमरो छी। कि‍रण जीक स्‍पष्‍ट कहब छेलनि‍, जहि‍ना बजै छी तहि‍ना लि‍खू, जहि‍ना समाजकेँ देखै छि‍ऐ तेहने वि‍षय बनाउ, वएह भेल साहि‍त्‍य। जेहने वि‍चार कि‍रण जीक रहनि‍ तेहने वि‍चार राहुल सांकृत्‍यायन जीक सेहो रहनि‍। हुनको कहब छन्‍हि‍ अपन बात आन आ आनक बात अपने नीक जकाँ बूझि‍ जाइ, वएह भेल ओइ भाषाक व्‍याकरण। भाषाक धाराक अंग भेल शब्‍द। भाषाक धारा ओइसँ वृहत अछि‍। आन भाषा केना आन भाषामे प्रवेश करैए ओ अलग प्रक्रि‍या भेल। मणि‍पद्मजी, सचमुच साहि‍त्‍यक मर्म बूझि‍नि‍हार मणि‍पद्म भेला। ओना अपनो जि‍नगीक अनुभव आ दरभंगा जि‍लाक पुबरि‍या हि‍स्‍साक अखनो कि‍ गति‍ अछि‍ ओइ अनुकूल हुनक सृजन छन्‍हि‍। बेछप साहि‍त्‍यकार। एकभग्‍गू कवि‍ए मात्र नै छला, लोकगाथाक मर्म बुझि‍नि‍हारो छला। आठम दशक उर्वर होइक कारण यएह सभ छला। जहि‍ना आठम दशकक उर्वरता छल तहि‍ना नअम दशक उसराह बनैत गेल, बनि‍येँ गेल। मुदा तैयो साहि‍त्‍यक धार बहि‍ते रहल अछि‍। एकटा बात आरो, आठम दशक ओहेन रहल, जइमे गाम-गाममे हराएल-भुति‍आएल कि‍छु साहि‍त्‍यकार सेहो भेटला। मुदा अखनो बहुत हराएल छथि‍। कि‍छु हेराएलो गेला।
सगर राति‍ दीप जरए, कथा गोष्‍ठीक आयोजनक अवधारणाक जनम कि‍रण जीक जयन्‍तीक अवसरि‍पर लोहना (धर्मपुर)मे एकत्रि‍त साहि‍त्‍यकारक बीच भेल। मुदा साकार भेल प्रभास कुमार चौधरी जीक माध्‍यमसँ। एकटा बात बीचमे, कि‍रणजी सन खोद-बेद केनि‍हारक अवसरि‍ दोसर प्रभासजीक स्‍थापना। बेछप जि‍नगी, बेछप सोच, बेछप सृजन, बेछप नजरि‍ प्रभास जीक। असीम जि‍ज्ञासाक संवेदना रग-रगमे रमल छेलनि‍। जेकर परि‍चए जीवंत रचना अखनो दाइए रहल छन्‍हि‍। साहि‍त्‍यकारक बीच सहमत बनल जे जहि‍ना पंजाबी सहि‍त्‍यमे ‘दीवा जले सारी रात’ कथा गोष्‍ठी भरि‍ राति‍क होइए, तहि‍ना मैथि‍लीओमे हुअए। नव उत्‍साह नव जि‍ज्ञासाक संग प्रभास भाय डेग उठौलनि‍। मनमे छेलनि‍ जे साहि‍त्‍यि‍क धारा समाजक संग चलए। मुदा कि‍छुए साल पछाति‍ मरि‍ गेला।
पहि‍ल कथा गोष्‍ठीक आयोजन मुजफ्फरपुरमे भेल। ओतए प्रभासजी नोकरी करै छला। रेणु जीक अध्‍यक्षतामे गोष्‍ठी भेल। रेणुजी सेहो समाजकेँ नि‍ष्‍पक्ष ढंगसँ देखै छला। तइ दि‍नसँ अखनि‍ धरि‍क कथा गोष्‍ठी मैथि‍ली साहि‍त्‍यक धरोहर पूजी छी। एक तँ कथा गोष्‍ठी दोसर साहि‍त्‍यक मुख्‍य वि‍धा। तँए पहि‍ल संतोनो कहल जा सकैए।
पहि‍ल कथा गोष्‍ठी जनवरी १९९० इस्‍वीमे भेल। पहि‍ल गोष्‍ठीमे कथापाठ केने रहथि‍, रमेशजी- “थाक”, श्रीनि‍वासजी (शि‍व शंकर श्रीनि‍वास)- “वसातमे बहैत लोक”, वि‍भूति‍ आनन्‍दजी- “अन्‍यपुरुष”, अशोक जी- “पि‍शाच”, सि‍याराम सरस जी- “ओहि‍ साँझक नाम”, प्रभासजी- “खूनी”, रवि‍न्‍द्र चौधरीजी सेहो कथा पाठ केलनि‍। तैबीच डा. नन्‍द कि‍शोर जे एल.एस. कौलेजक नीक शि‍क्षक, हि‍न्‍दीमे कथा पाठ केलनि‍। मुदा दुर्भाग्‍य ईहो जे ओ मैथि‍लीभाषी रहि‍तो हि‍न्‍दीमे पाठ केलनि‍। समीक्षको छथि‍। कथाक समीक्षक रूपमे कथाकरक संग रमानन्‍द झा ‘रमण’जी, भीम भाय (भीमनाथ झा), मोहन भारद्वाजजी, जीवकान्‍त, कथा पाठ जीवकान्‍त केलनि‍ आकि‍ नै से जनतबमे नै अछि‍। इत्‍यादि‍ समीक्षकक संग कि‍छु दर्शको रहबे करथि‍।
तेसर कथागोष्‍ठीसँ पोथीक लोकार्पण शुरू भेल, जे बढ़ैत-बढ़ैत दरभंगा गोष्‍ठी शीर्षपर पहुँच गेल। एक संग पौंतीस-चालि‍सटा पोथीक लोकार्पण। निर्मली कथा गोष्‍ठीसँ पूर्व धरि‍ शीर्षपर रहल। निर्मली गोष्‍ठीमे पैंतालि‍‍स-पचासटा पोथीक लोकार्पण भेल। कथा गोष्‍ठीसँ कथाधारामे एक गति‍ आएल, नव-नव रचनाकारक प्रवेश गोष्‍ठीमे होइत रहल, गोष्‍ठी आगू बढ़ैत रहल। मुदा गोष्‍ठीक बीच एकरूपता नै रहल, केतौ एहेन आयोजन भेल जे साँझसँ भोर भेलो पछाति‍ कथाकारक कथा रहि‍ जाइ छन्‍हि‍ तँ केतौ अधरति‍येमे बेवस्‍थापक चाह-पान समेटि‍ लइ छथि‍, खैर जे भेल। साहि‍त्‍य गोष्‍ठी साहि‍त्‍यकारक मंच छी। जइ मंचपर सभकेँ अपन वि‍चार रखैक हक छन्‍हि‍। जखनि‍ सभ कि‍यो मि‍थि‍लाक वि‍कास चाहै छी तखनि‍ मत-मतान्‍तर कि‍ए? कथा गोष्‍ठीक संग कथा-वि‍चार मंचोक तँ जरूरति‍ अछि‍ए। लि‍खैक मानदण्‍ड, समीक्षाक मानदण्‍ड के बनौत? समयानुकूल दृष्‍टि‍ए तँ समसामयि‍के ने जि‍म्मा भेल। समसामयि‍क रचनाकारक रचनाकेँ स्‍तरानुसार सि‍लेबसमे स्‍थान आवश्‍यक अछि‍।     
दुनि‍याँमे पैघ-पैघ शि‍क्षण संस्‍थान जनसहयोगसँ चलि‍ रहल अछि‍, की अपना ऐठाम नै चलि‍ सकैए? एकटा वि‍श्ववि‍द्यालय अछि‍, रेडि‍यो स्‍टेशन अछि‍, ओ केना नीक जकाँ बढ़ि‍ सकए, सबहक जि‍म्‍मा भेल। एकटा वि‍श्ववि‍द्यालय अछि‍, जे सोलहन्नी सरकार दि‍स तकैए, तहूमे लूटि‍क बाढ़ि‍ छइहे, तइसँ केते आशा कएल जा सकैए। मि‍थि‍लामे पाइबला शि‍क्षण प्रेमी नै छथि‍, सेहो बात नै अछि‍। गजेन्‍द्र जीक (गजेन्‍द्र ठाकुर) सम्‍पादनमे नागेन्‍द्र जीक (नागेन्‍द्र झा, श्रुति‍ प्रकाशन) सहयोगसँ केते पोथी प्रकाशि‍त भेल अछि‍ ओ अपने-आपमे एकटा उदाहरण अछि‍। ओना बेक्‍तीगत रूपमे गजेन्‍द्रजीकेँ केना बि‍सरल जाए जे टैगोर पुरस्‍कारमे एँड़ी-चोटी एक केने छथि‍। कोंचि‍न जाइकाल पटना एयरपोर्टपर अपन गाड़ीसँ पहुँचा सभ कि‍छु देखा-सुना दुर्गानन्‍द मण्‍डलक संग वि‍दा केलनि‍। स्‍पष्‍ट सोच छन्‍हि‍ जे आर्थिक दृष्‍टि‍ए कमजोर रचनाकार लोकनि‍क रचना प्रकाशि‍त करब। से करबो केलनि‍ आ करि‍तो छथि‍।
अन्‍तमे, बेवस्‍थापक ओम बाबू (ओम प्रकाश झा) निर्मली गोष्‍ठीमे अपन गजल संग्रह नेने लोकार्पण करबए पहुँचला। ओना कि‍छु-कि‍छु पहि‍नौंसँ बूझल छल मुदा चेहरा देखि‍ झुझुआ गेलौं। कि‍छु करैक जि‍ज्ञासा तँ मनमे छन्‍हि‍हेँ। अगि‍ला बात आगू, अखनि‍ तँ अशे धरि‍। अन्‍तमे, अन्‍हरा-अन्‍हरी माए-बापकेँ कन्‍हेठ जहि‍ना श्रवणकुमार चारू धाम देखबए वि‍दा भेला तही आशाक संग अपन दू शब्‍दमे वि‍राम लगबै छी। धैनवाद! जय मैथि‍ली।mmm
34 गोट लघुकथा/वि‍हनि‍ कथाक पाठ भेल। सात पालीमे बाँटि‍ सभ कथाक पाठ करौल गेल। अंति‍म पाली छोड़ि‍ छबो पालीमे पठि‍त कथापर तीन गोट समीक्षकक समीक्षा अबैत रहल आ समीक्षाक समीक्षा सेहो होइत रहल। समीक्षाक समीक्षा केनि‍हार सभ छला डॉ. योगानन्‍द झा, डॉ. शि‍वकुमार प्रसाद, राजदेव मण्‍डल, नन्‍द ि‍वलास राय, भाष्‍कर झा, उमेश मण्‍डल, चन्‍दन झा, डॉ. धनाकर ठाकुर, बि‍पीन कुमार कर्ण, उमेश नारायण कर्ण इत्‍यादि‍। प्रति‍समीक्षाक क्रममे एक गोट वि‍चारणीय टि‍प्पणी आएल। ओ छल, युवा समीक्षकक। अपन वि‍चार व्‍यक्‍त करैत कहलखि‍न-
समसामयि‍क कथाक गहराइकेँ आधुनि‍क पाठक स्‍वागत नै करए चाहैए। से ई कथाक दोष भेल। फलस्‍वरूप पाठकक अभाव अछि‍।
संचालक गजेन्‍द्रजेन्‍द्र कथामेमे पणी आएल। ओ छल प्‍द्व्ृृृृ;;00998चवख्‍,((फर्फग्‍ठ ठाकुरजी ऐ वि‍चारपर असहमति‍ जँतौलनि‍। कहलखि‍न-
ई तँ भाषाक वि‍शेषता छि‍ऐ जे कथानककेँ गहराइ प्रदान करै छै। जेकर अभाव मैथि‍ली साहि‍त्‍यकेँ पाठक वि‍हि‍न केने रहल।
ऐ तथ्‍यकेँ सत्‍यापि‍त करैत ठाकुरजी आइसलैण्‍डक भाषाक जि‍कि‍र करैत अपन वि‍चारकेँ पुष्‍टि केलनि‍।
दू सत्रक पछाति‍ भोजनावकाश भेल। मि‍थि‍लाक खान-पानक आधुनि‍क रूप अकति‍यार केने छला आयोजक। करीब 125 गोटे एक पाँति‍मे बैस भोजन केलनि‍। ऐ तरहक समायोजनसँ हुनका मुँहक रोहानी फुलाएल गुलाबक फूल सन देखबामे आएल। बारीक सभ फुदैक-फुदैक अपन-अपन जि‍म्‍माकेँ जीतैत खेलाड़ी जकाँ निर्वहन करैत देखल गेला। भोजनक घंटा भरि‍ पछाति पुन: अगि‍ला सत्रक यात्रा शुरू भेल। पठि‍त कथापर समीक्षा हेतु वि‍शेष सुि‍वधा प्रदान कएल गेल छल। ओइ ई जे जँ समीक्षक पठि‍त कथाकेँ कोनो कारणे धि‍यानसँ नै सुनि‍ पबथि‍ तँ हुनका लेल कथाक पाण्‍डुलि‍पि‍ उपलब्‍ध करौल जाइ छल। संचालकक कहब रहनि‍ जे मैथि‍ली साहि‍त्‍यमे समीक्षाक स्‍थि‍ति‍ उमदा नै अछि‍। ऐपर श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर असहमति‍ व्‍यक्‍त केलनि‍। ओ कहलनि‍-
सगर राि‍तक अलि‍खि‍त नि‍अम रहल अछि‍ जे समीक्षापर समीक्षासँ गोष्‍ठीमे वि‍वाद बढ़ि‍ सकैए तँए एहेन कार्यसँ बँचक चाही।     
सम्‍पूर्ण कार्यक्रमक लाइव प्रसारण कएल गेल। सगर राति‍क इति‍हासक पन्नामे ई एक गोट अनुपम कार्य सि‍द्ध हएत। सम्‍पूर्ण कार्यक्रमक वि‍डिओ यू-ट्यूबपर उपलब्‍ध करौल जाएत तेकरो बेवस्‍था आयोजक केने छला। मैथि‍ली साहि‍त्‍यकेँ पूर्णत: इलेक्‍ट्रॉनि‍क स्‍पोर्ट भेटौ ऐ हेतु आयोजक प्रति‍वद्ध छला।
अगि‍ला गोष्‍ठी हेतु दू गोट प्रस्‍ताव आएल। बहुसंख्‍यक साहि‍त्‍यकारक वि‍चारकेँ आगू बढ़बैत अध्‍यक्ष श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल भावी संयोजककेँ दीप आ उपस्‍थि‍ति‍ पुस्‍ति‍का हश्‍तगत करौलनि‍। 31 मई 2014केँ मधुबनी जि‍लाक मेंहथ गाममे 82म कथा गोष्‍ठी हेतु भावी संयोजक श्री गजेन्‍द्र ठाकुर समगर्दा हकार दऽ सभकेँ आमंत्रि‍त करैत कहलखि‍न-
बाल साहि‍त्‍यपर केन्‍द्रि‍त अगि‍ला गोष्‍ठी आयोजि‍त हएत।
अंतमे संयोजक श्री ओम प्रकाश झा आयोजक धन्‍यवाद ज्ञापन करैत कहलनि‍-
81m Sagar Raati Deep Jaray katha Gosthi 22 March 2014 saanjh sa shuru bha ka 23 March 2014 ke bhor me safalta poorvak Deoghar me sampann bha gel. Ehi beruka katha gosthi ke swargiy Mayanand babu aa swargiy Jeevkant ke samarpit kayal gel. Gosthik adhyakshta sri Jagdish Pd Mandal kayalanhi aa sanchalak chhalaah Sri Gajendra Thakur. Mukhy atithi Sri O. P. Mishra chhalaah. Kul 29 got kathaakaarak dwara 35 got katha paaTh kayal gel. Samalochna seho badd neek rahal. Kul milaa ka kathaa goshthi ekTa neek workshop saabit bhel. Katha goshthi me aaynihaar sab kathakaar lokani ke hum hriday sa aabhari chhi. Sangahi ahaa sab shubhkaamna denihaar mitra sabhak seho aabhari chhi. Kichhu gote anupasthitik khed prakaT karait shubhkaamna prakaT kelanhi, hunko sabhak aabhari chhi. Je jaani boojhi ka nai aylaah tinko aabhari chhi kiyak ta hunkar vyavhaar humra bheetar Maa Maithilik prati pratibaddhtaa aar badhaa delanhi.

 
81म सगर राति‍ दीप जरए- देवघरमे सुसम्‍पन्न भेल 82म कथा गोष्‍ठी मेंहथमे होएत


मायानन्‍द मि‍श्र जीवकान्‍त स्‍मृति‍-सगर राति‍ दीप जरए केर 81म कथा गोष्‍ठी– देवघर (झारखण्‍ड)

संयोजक- ओम प्रकाश झा 

उद्घाटन सत्र-

दीप प्रज्‍वलन- श्री ओ.पी. मि‍श्रा एवं समस्‍त कथाकार 
संचालन- ओम प्रकाश झा

लोकार्पण सत्र-

अध्‍यक्ष- जगदीश प्रसाद मण्‍डल
मुख्‍य अति‍थि‍- श्री ओ.पी. झा आ श्री गजेन्‍द्र ठाकुर
संचालक- उमेश मण्‍डल

दू शब्‍द-

1.   ओ.पी. झा, अवकाश प्राप्‍त अभि‍यंता- झारखण्‍ड सरकार 
2.   सुशील भारती, संपादक, प्रभात खबर हि‍न्‍दी दैनि‍क।
3.   दि‍लीप दास
4.   ओम प्रकाश झा
5.   मिथि‍लेश कुमार 
6.   जगदीश प्रसाद मण्‍डल

कथा सत्र-

अध्‍यक्ष- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, वरि‍ष्‍ठ साहि‍त्‍यकार
मंच संचालक- श्री गजेन्‍द्र ठाकुर, संपादक, ‘वि‍देह’ इण्‍टरनेशनल ई-जनरल

पहि‍ल सत्रमे पठि‍त कथा एवं कथाकार-

असली हीरा- श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल (निर्मली)
रि‍क्‍शाक भाड़ा आ बुधि‍ए बताह- श्रभ्‍ फागुलाल साहु (सखुआ)
बुढ़ि‍या मैया- ओम प्रकाश झा (भागलपुर)
केते बेर- उमेश मण्‍डल (निर्मली)

समीक्षक-
योगानन्‍द झा
राजदेव मण्‍डल
अरवि‍न्‍द ठाकुर
प्रमोद कुमार झा

समीक्षाक समीक्षक
नन्‍द वि‍लास राय
चन्‍दन झा
धनाकर ठाकुर


दोसर सत्र-

सभसँ बड़का भी.आई.पी. गेष्‍ट- श्री नन्‍द वि‍लास राय (भपटि‍याही)
डरक डंका- श्री राजदेव मण्‍डल (मुसहरनि‍याँ)
ई छी हमर मजबूरी आ इमानदारीक पाठ- श्री राम वि‍लास साहु (लक्ष्‍मि‍नि‍याँ)
अप्‍पन माए-बाप- श्री ललन कुमार कामत (ललमनि‍याँ)

तेसर सत्र-

छि‍न्ना-झपटी- श्री शि‍व कुमार मि‍श्र (बेरमा)
बड़का मोछ- श्री कपि‍लेश्वर राउत (बेरमा)
उतेढ़क श्राद्ध- श्री शम्‍भू सौरभ (बैका)
जाति‍क भोज- श्री उमेश पासवान (औरहा)

चारि‍म सत्र-

गुरुदक्षि‍णा- डाॅ. योगानन्‍द झा (कबि‍लपुर)
अपराध- श्री पंकज सत्‍यम् (मधुबनी लगक)
ककर चरवाही आ चुनावधर्मी लोक- डॉ. उमेश नारायण कर्ण
कबाउछ- डॉ. धनाकर ठाकुर

समीक्षक-
बि‍पीन कुमार कर्ण
बेचन ठाकुर

समीक्षक समीक्षक
डॉ. शि‍वकुमार प्रसाद


पाँचम सत्र-

आन्‍हर- श्री अखि‍लेश कुमार मण्‍डल (बेरमा)
सरकारीए नौकरी कि‍एक- बि‍पीन कुमार कर्ण (रेवाड़ी)
बनमानुष आ मनुष- डाॅ. शि‍वकुमार प्रसाद (सि‍मरा)
वृधापेंसन आ मजबुरी- श्री शारदानन्‍द सि‍ंह
पानि‍- श्री बेचन ठाकुर

छअम सत्र-

सत्ता-चरि‍त- श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर (सुपौल)
बापक प्राण- श्री भाष्‍करानन्‍द झा भाष्‍कर (कोलकाता)  
संबोधन- श्री चन्‍दन कुमार झा (कोलकाता)
ठीका- श्री आमोद कुमार झा
चौठि‍या- श्री अच्‍छेलाल शास्‍त्री (सोनवर्षा)

सातम सत्र-

तखन, जखन- श्री गजेन्‍द्र ठाकुर (दि‍ल्‍ली)
चैन-बेचैन- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल (बेरमा)


ऐ तरहेँ देवघरक गोष्‍ठीमे कुल कथाकारक संख्‍या 29 छल। 34 गोट कथाक पाठ भेल।