Since 2004 AD, First Maithili News Portal 'Samadiya'(Poonam Mandal & Priyanka Jha) पूनम मंडल आ प्रियंका झाक पहिल मैथिली न्यूज पोर्टल "समदिया", २००४ ई. सँ।
Saturday, October 8, 2011
Friday, October 7, 2011
भद्रकाली नाट्य परिषद,कोइलख वार्षिक नाट्य समारोह (अंशुमन सत्यकेतुक रिपोर्ट)
क अंतिम दिन काल्हि कमल मोहन चुन्नू लिखित आ अंशुमान सत्यकेतु द्वारा निर्देशित नाटक 'चाँङुर' मंचित केलक।एहि दृश्य मे अंशुमान सत्यकेतु(सुधाकर),प्रेम कुमार(रघू)आ शुभेन्दु(विनोद) भावपूर्ण भूमिका मे
नाटक 'चाँङुर'(भद्रकाली नाट्य परिषद,कोइलख के वार्षिक नाट्य समारोहक अंतिम प्रस्तुति-निर्देशक-अंशुमान सत्यकेतु) -अंशुमान सत्यकेतु आ रमेश मंडल
Thursday, October 6, 2011
स्वीडनक कवि टॉमस ट्रांसट्रोमरकें २०११क साहित्य लेल नोबल पुरस्कार (गजेन्द्र ठाकुर )
स्वीडनक कवि टॉमस ट्रांसट्रोमरकें २०११क साहित्य लेल १.५ मिलियन डॉलरक नोबल पुरस्कार देबाक घोषणा कएल गेल अछि| स्वेडिश एकेडमी कहलक "ओ अपन घनगर पारदर्शी बिम्बसं सत्यक एकटा नव द्वारक परिचय करेलनि"|
हुनकर पोथी सबहक अंगरेजी अनुवाद रहनि "द ग्रेट एनिग्मा ", "द हाफ फिनिश्ड हेवेन ", द डिलीटेड वर्ल्ड " |
ओ अस्सी बरखक छथि| ओ १५ सं बेशी कविता संग्रह लिखने छथि जे अंगरेजी आ ६० आन भाषामे अनूदित भेल अछि| हुनकर जन्म स्टोकहोममें भेलनि|
ओ मनोचिकित्सक रहथि आ हुनकर कवितामे मानवताक गहन मनोविज्ञानिक विश्लेषण भेटैत अछि |हुनकर कविता गूढ़ मुदा सोझ होइत अछि | हुनकर कविता वैयक्तिक आ सार्वत्रिक दुनू अछि| हुनकर कविता एहेन गूढ़ नै होइए जइपर चिंता करैत रहू, वरन ओ धरातलसं अस्तित्वक उच्च शिखर दिस ल' जाइए |हुनकर स्वेडन क नम्हर शीतकालक विवरण , ऋतुक लय, आ प्रकृतिक सौन्दर्य वातावरणक अद्भुत विवरण हुनकर कवितामे भेटैत अछि |
हुनकर माता स्कूल शिक्षिका आ पिता पत्रकार रहथि आ ओ साहित्य , इतिहास , धर्मशास्त्र आ मनोविज्ञान पढने छथि |
१९९० सं ओ एकटा आघातक बाद बजबामे सक्षम नै छथि|
१९९३ का बाद अमेरिका ककरो साहित्यक नोबल नै भेटल छै| १९७४ क बाद आब जा क' कोनो स्वेडिश कें ई पुरस्कार भेटल छै|
नोबल समिति आब गएर यूरोपीय भाषाक बेशी साहित्यिक पोथीपर विचार करत|
हुनकर पोथी सबहक अंगरेजी अनुवाद रहनि "द ग्रेट एनिग्मा ", "द हाफ फिनिश्ड हेवेन ", द डिलीटेड वर्ल्ड " |
ओ अस्सी बरखक छथि| ओ १५ सं बेशी कविता संग्रह लिखने छथि जे अंगरेजी आ ६० आन भाषामे अनूदित भेल अछि| हुनकर जन्म स्टोकहोममें भेलनि|
ओ मनोचिकित्सक रहथि आ हुनकर कवितामे मानवताक गहन मनोविज्ञानिक विश्लेषण भेटैत अछि |हुनकर कविता गूढ़ मुदा सोझ होइत अछि | हुनकर कविता वैयक्तिक आ सार्वत्रिक दुनू अछि| हुनकर कविता एहेन गूढ़ नै होइए जइपर चिंता करैत रहू, वरन ओ धरातलसं अस्तित्वक उच्च शिखर दिस ल' जाइए |हुनकर स्वेडन क नम्हर शीतकालक विवरण , ऋतुक लय, आ प्रकृतिक सौन्दर्य वातावरणक अद्भुत विवरण हुनकर कवितामे भेटैत अछि |
हुनकर माता स्कूल शिक्षिका आ पिता पत्रकार रहथि आ ओ साहित्य , इतिहास , धर्मशास्त्र आ मनोविज्ञान पढने छथि |
१९९० सं ओ एकटा आघातक बाद बजबामे सक्षम नै छथि|
१९९३ का बाद अमेरिका ककरो साहित्यक नोबल नै भेटल छै| १९७४ क बाद आब जा क' कोनो स्वेडिश कें ई पुरस्कार भेटल छै|
नोबल समिति आब गएर यूरोपीय भाषाक बेशी साहित्यिक पोथीपर विचार करत|
Wednesday, October 5, 2011
Tuesday, October 4, 2011
भागवत झा आजाद नै रहलाह
भागवत झा आजाद, ८९ बर्ख, क आइ भोरमे दिल्लीक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानमे मृत्यु भऽ गेलन्हि। ओ भागलपुरसँ छह बेर भारतक लोकसभाक सदस्य कांग्रेस पार्टीक टिकटपर चुनल गेल रहथि आ १९८८-८९ मे करीब एक साल धरि बिहारक मुख्यमंत्री सेहो रहथि। हालेमे ओ भारतीय जनता पार्टी मे शामिल भेल रहथि।
हुनकर पुत्र कीर्ति आजाद "क्रिकेट विश्वकप १९८३"क विजेता भारतीय टीमक सदस्य रहथि आ अखन ओ भारतीय जनता पार्टीक टिकटपर दरभंगासँ भारतीय लोकसभाक सदस्य छथि।
हुनकर पुत्र कीर्ति आजाद "क्रिकेट विश्वकप १९८३"क विजेता भारतीय टीमक सदस्य रहथि आ अखन ओ भारतीय जनता पार्टीक टिकटपर दरभंगासँ भारतीय लोकसभाक सदस्य छथि।
रामाश्रय झा "रामरंग" सँ मृत्युपूर्व डॉ. गंगेश गुंजनक साक्षात्कार
रामाश्रय झा "रामरंग" प्रसिद्ध अभिनव भातखण्डे जीक १ जनवरी २००९ केँ निधन भऽ गेलन्हि। डॊ. गगेेश गुजन मृत्यु पूर्व हुनकासं साक्षात्कार लेने छलाह। प्रस्तुत अछि ओ अमूल्य साक्षात्कार- पहिल बेर विदेहमे।
पं0 रामाश्रय झाक इन्टरव्यू ।
प्रश्ननः1. अपनेक दृष्टि सं विद्यापति गीत-संगीत परंपरा कें कोन रूप मे देखल-बूझल जयवाक चाही? विद्यापति-संगीत परिभाषित कोना कएल जयवाक चाही? एतत्संबंधी कोनो स्वर-लिपि उपलब्ध अछि ?
उत्तर ः हमरा विचार सँ विद्यापतिक अधिकांश गीत पद; भजनबद्धगायन शैली एवं किछु गीत ग्रामीण गीत शैलीक अंतर्गत् बूझल जयवाक चाही। उदाहरण स्वरूप पद-गायन शैली मे-
1. नन्दक नन्दन कदम्बक तरुतर
धिरे धिरे मुरली बजाव ।
2. जय जय भैरवि असुर भयाउनि।
एवं अन्य श्रृंगार रस सँ सम्बन्धित पद। जेना-
क. कामिनी करय असनाने
ख. सुतलि छलौं हम घरवा रे
ग. अम्बर बदन झपाबह गोरी
घ. ससन परस खसु अम्बर रे, इत्यादि ।
टइ तरहक पद व गीत मिथिला प्रदेश मे लगभग 60 व 70 वर्ष सं जे गाओल जाइत अछि एकर धुन अर्धांशस्त्रीय संगीतक अंतर्गत् एवाक चाही। परन्तु अइ पदक जे मिथिला मे गायन शैली छैक ओकर एक अलग स्वरूप छैक। जेकरा प्रादेशिक संगीत कहवाक चाही। जहांतक लोक संगीत तथा ग्रामीण संगीत सं संबंधित विद्यापतिक गीत अछि, जेना-
क. आगे माइ हम नहि आजु रहब एहि आंगन जो। बुढ़ होयता जमाय,
ख. हे भोलानाथ कखन हरब दुख मोर,
ग. उगना रे मोर कतय गेलाह,
घ. आज नाथ एक व्रत मोहि सुख लागत हे, इत्यादि ।
ई गीत सब लोक संगीतक धुनक अंतर्गत गाओल जाइत अछि। यद्यपि अहू लोकधुन मे रागक दर्शन छैक मगर राग शास्त्र केर अभाव छैक। तें हेतु ई सब गीत लोक संगीत शैली मे अयवाक चाही।
उत्तर-1-ए. विद्यापति संगीतक कोनो भिन्न स्वरूप नहि अछि, केवल विद्यापति गीत मिथिला प्रादेशिक संगीत शैलीक अंतर्गत गाओल जाइत अछि। राग आओर ई अर्धांशस्त्रीय एवं धुन प्रधान लोक संगीत राग गारा,राग पीलू, राग काफी, राग देस, राग तिलक कामोद इत्यादि राग सं सम्बन्धित अछि। अभिप्राय ई जे जेना सूर, तुलसी, कबीर इत्यादि संत कविक पद भिन्न-भिन्न तरह सं गाओल जाइत अछि अइसंत कवि सबहक कोनो खास अपन संगीत नहि छैन्हि जे कहल जाय जे ई सूर व तुलसी तथा कबीरक संगीत थीक, एही रूप सं विद्यापति संगीतक रूप मे बुझवाक चाही।
प्रश्नन-2. विद्यापति संगीत-परंपराक विषय मे आइध्रिक स्थिति पर अपनेक की विचार-विश्लेषण अछि ?
उत्तर-2. विद्यापति पदक सम्बन्ध मे हमर ई विचार अछि जे विद्यापतिक पद मैथिली भाषा मे अछि तें हेतु केवल मिथिला प्रदेश मे अइ पदक गायन प्रादेशिक संगीतक माध्यम सं होइत अछि। हॅं, यदा कदा बंगाल प्रदेश मे बंगला कीर्तन मे अवश्य प्रयोग हाइत अछि। कहवाक अभिप्राय ई जे कोनो प्रादेशिक भाषा मे लिखल काव्य केर गुणवत्ताक आकलन ओइ काव्यक श्रृंब्द व साहित्य तथा भाव पर निर्भर करैत छैक। संगीत आकइ काव्य के रसमय एवं सौंदर्यवर्धन करइक हेतु परम आवश्यक तत्व अवश्य थिक परन्तु प्राथमिकता पदक थिकइ। मैथिली भाषा अत्यन्त सुकोमल भाषा अछि एवं अइ मे लालित्य अछि ।आर संगीत सुकोमल भाषा मे अधिक आनन्द दायक होइत छैक।अही हेतु विद्यापति पद संगीतक माध्यम सं मिथिलाक संस्कृति मे विद्वान जन सं ल’ क’ जनसाधारण तकक मानस के प्रभावित क’ क’ अपन एक सुदृढ़ परम्परा बनौने अछि एवं मिथिलावासीक हेतु परिचय पत्र समान अछि। तें हेतु समस्त मैथिल समाजक ई परम कर्तव्य थीक जे अइ अमूल्य धन कें धरोहर जकां जोगा क’ राखी।
प्रश्न-3. विद्यापति-संगीत आओर विद्यापति-गीत कें एकहि संग बूझल जयवाक चाही बा फराक क’? यदि हं तं किएक आ कोना ?
उत्तर : एहि प्रश्नक उत्तर उपरोक्त पहिल तथा दोसर क्रमांक मे लिखल गेल अछि।कृपया देखल जाय।
प्रश्नन-4. विद्यापति-संगीतक प्रतिनिधि गायक रूप मे अपने कें कोन-कोन कलाकार स्मरण छथि आ किएक ?
उत्तर : विद्यापति पदक गायक आइ सं किछु वर्ष पूर्व बहुत नीक नीक छलाह, जेना पंचोभक पं0 रामचन्द्र झा,पंचगछियाक श्री मांगन, तीरथनाथ झा, बलियाक पं0गणेश झा, लगमाक पं0 अवध पाठक, श्री दरबारी ; नटुआ द्ध श्री अनुठिया ; नटुआद्ध पं0 गंगा झा बलवा, श्री बटुक जी, आर पं0 चन्द्रशेखर खांॅ, अमताक पं0 रामचतुर मलिक, पं0 विदुर मलिक, लहटाक पं0 रामस्वरूप झा, खजुराक पं0 मधुसूदन झा एवं नागेश्वर चैधरी, बड़ा गांवक पं0 बालगोविन्द झा, लखनौरक पं0बैद्यनाथ झा इत्यादि। वर्तमान मे जे गायक छथि हुनका सबहक नाम अइ प्रकार छनि-पं0 दिनेश झा पंचोभ, श्री उपेन्द्र यादव, अमताक पं0 अभयनारायण मलिक, पं0 प्रेमकुमार मलिक इत्यादि। उपरोक्त जतेक गायकक हम नाम लिखल अछि ई सब गायक अधिकारपूर्वक विद्यापतिक पद कें गबै वला छलाह एवं वर्तमान मे छथि। कियेक तं ई सब मिथिलावासी छथि। विद्यापति पदक अर्थ भाव पूर्ण रूप सं बूझि क’ तहन प्रश्नकरैत छलाह व वर्तमान मे करैत छथि। तें हेतु ई सब गायक स्मरण करवा योग छथि।
प्रश्नन-5. पं0 रामचतुर मल्लिक, प्रो0 आनन्द मिश्र प्रभृत्ति तं इतिहास उल्लेखनीय छथिहे । किछु अन्यो गायकक नाम अपने कह’ चाहब ?ओना मल्लिकजी तथा आनन्द बाबूक विद्यापति-गीत गायकी मे की किछु विशेष लगैत अछि जे अन्य गायक मे नहि ?
उत्तर ः हम जतेक गायक क नाम लिखल अछि सब अपना-अपना स्तर सं नीक छलाह एवं नीक छथि। विद्यापतिक पद गायन मे राग गायकीक जेना बड़का बड़का आलाप व तान तें गाओल नहि जाइत छैक। विद्यापति पद गायन मे पदक अर्थ भाव ध्यान मे राखि सरसतापूर्वक गाओल जाइत छैक। अइ सम्इन्ध मे एक सं दोसर गायकक तुलना करइक आवश्यकता नहि। तथापि पं0रामचन्द्र झा व श्री मांगनजी तथा पं0 रामचतुर मलिकजी,श्री बटुक जी,पं0 रामस्वरूप् झा,श्री दरबारी इत्यादि गायक बहुत प्रसिद्ध छलाह।
चूंकि प्रोफेसर आनन्द मिश्रजीकें हम कहियो गायन नहि सुनल तथा मिथिलाक गायक पंक्ति मे हुनक नाम हम नहि सुनल तें हेतु हुनका संबंध मे किछु लिखइ सं असमर्थ छी।
प्रश्न-6. विद्यापति-गीत मैथिली लोकगीत ध्रि कोना पहुंचल हेतैक ?एहि विषय मे अपनेक विश्लेषण की अछि?
उत्तर ः विद्यापति गीत मैथिलीक दू तरहक भाषा मे रचल गेल अछि।एकटा मैथिलीक परिष्कृत भाषा
मे रचल गेल अछि जेना-
1.नन्दक नन्दन कदम्बक तरुतर
2.अम्बर बदन झंपावह गोरी
3. उधसल केस कुसुम छिड़िआयल खण्डित अधरे । इत्यादि। अइ तरहक
मैथिलीक परिष्कृत भाषा मे जे गीत छैक से लोकगीत ;ग्रामीण अंचलद्धधरि बहुत कम पहुँचलै।
जे गीत ग्रामीण भाषाक माध्यम सं रचल गेल छैक।जेना-
1. आ गे माइ हम नहि आजु रहब एहि आंगन जं बुढ़ होयता जमाय....
2. हे भोलानाथ कखन हरब दुख मोर
3. जोगिया भंगिया खाइत भेल रंगिया हो भोला बउड़हवा.
4. उगना रे मोर मोरा कतय गेलाह.
इत्यादि।
अइ तरहक जे गीत छैक से लोकगीत;ग्रामीण अंचलद्धधरि अधिक सं अधिक पहुँचलए।एक बात आर ई जे लोकभषाक अधिक समकक्ष छैक तकरा जनाना सब अधिक गबैत छथि। हमरा बुझने विद्यापति गीत कें लोकगीत ;ग्रामीण अंचलद्धधरि पहुँचइके यैह कारण थीक। दोसर बात ई जे अपन मातृभाषा स्वभावतः बहुत प्रिय होइत छैक आर अपना मातृभाषाक माध्यम
सं जे काव्य रचल जाइत छैक आर ओइ मे लालित्य आ आकर्षण छैक तं ओ अपनहि आप विद्वान जन सं ल’ क’जनसाधारण तक प्रचारित भ’ जाइत छैक। आर विद्यापति पद तं लौकिक व पारलौकिक दुनू ृदृष्टिसं अत्यन्त उच्च कोटिक रचल गेल अछि, तथा सब तरहक गीत रचल गेल अछि जेना-भक्ति, भक्ति श्रृंगार, लौकिक श्रृंगार, श्री राधाकृष्णकें विलासक अत्यन्त मधुर गीत, भगवान श्रृंंकरक विवाह सं सम्बंधित जनसाधारण भाषाकके गीत एवं नचारी, समदाउनि,
बटगवनी,तिरहुत इत्यादि तरहक गीतक रचना केने छथि जे लोकरंजनके हेतु उच्चकोटिक एवं गायन के वास्ते बनल छैक। ई तंे बिना प्रयासहिं लोक मानस एवं लोकगीत धरि पहुँचि गेल गेल हेतैक।
प्रश्न-7.विद्यापति पदक मैथिली व्यवहार-गीत मे विलय होयवाक प्रक्रिया अपनेक दृष्टियें कोना आ की रहल हेतैक ?
उत्तर ः हमरा बुझने इहो प्रश्न 6ठमे प्रश्न सं संबंधित अछि। तें ओही पर विचार कएल जाय।
प्रश्न-8. विद्यापतिक पद यदि मिथिलाक सर्वजातीय माने-सभ वर्ग आ समाजक लोक मे स्वीकृत छैक ? तं तकर कारण विद्यापति-पदक साहित्यिक गुण बा ओकर सांगीतिकता छैक आकि एकरा मे निहित कोनो आन तत्व आ विशेषता छैक ?
उत्तर ः विद्यापति पद जे मिथिला समाजक सब वर्ग मे स्वीकृत छैक तकर मुख्य कारण विद्यापति पदक साहित्यिक गुण एवं सांगीतिक गुण दुनू छैक।मिथिला मे कवि विद्यापतिक पहिनहुं तथा बादहु मे बहुत कवि भेलाह मगर जनसाधारण मे तं हुनकर क्यो नाम तक नहि जनैत अछि। परंतु विद्यापति एवं विद्यापति गीत के तं एहेन क्यो अभागल मिथिलावासी हेताह जे नहि जनइत हेताह। विद्यापति पदक प्रचार-प्रसार मे साहित्यिक व संगीतक गुण के अतिरिक्त आन कोनो तत्व व कारणक जे अपने चर्चा कएल अछि, अइ सम्बन्ध मे हम ई कहब जे कवि विद्यापति भगवान के परम भक्त छलाहं हुनका भक्ति सं प्रभावित भ’ क’ भगवान शंकर जिनका घर मे नौकर के काज करैत रहथिन एहेन भक्त कविक कावय मे तं प्रचार-प्रसार हेबाक सब सं महत्वपुर्ण तत्व एवं कारण हुनका आराध्यदेवक कृपा बुझवाक चाही। भगवानक भक्ति सं हुनकर हृदय ओतप्रोत छलन्हि तें ओ अपन काव्य मे लिखैत छथि-
क. बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे ,
ख. हे भोलानाथ ;बाबाद्धकखन हरब दुख मोर , इत्यादि ।
ग. खास क’ भगवान राधाकृष्णक भक्ति व भक्ति-श्ाृंगार रस जे ओ अपना काव्य मे दरसओ
-लन्हि अछि ओ अत्यन्त हृदयस्पशर््ाी तथा संगीतमय अछि।
प्रश्न-9.लोकगीत एवं व्यवहार-गीत मे तत्वतः की-की भेद मानल जयवाक चाही ?
उत्तर ः लोकभाषा एवं लोकधुन मे जे गीत गाओल जाइत छैक तकरा लोकगीत कहल जाइत छैक। आर व्यवहार गीत क जे अपने चर्चा कएल अछि इउ सम्बन्ध मे हमर कहब ई जे एकरा अंतर्गत संगीतक सब शैली आबि जाइत छैक।परंतु हमरा बुझना जाइत अछि जे व्यवहा गीत सं अपनेक अभिप्राय संस्कार गीत सं अछि। हमरा विचार सं लोकगीत एवं व्यवहार गीत दुनू
के लोकसंगीत कहल जाइत छैक, अइ मे कोनो विशेष अंतर नइ छैक।
प्रश्न- 10.विद्यापति-संगीतक वर्तमान जे निश्चिते निराश कयनिहार अतः खेदजनक अछि। अपने कें तकर कारण की सब लगैत अछि ?
जखन कि बंगालक रवीन्द्र-संगीत-कला मे विद्यापति संगीत जकां कोनो प्रकारक पतनोन्मु -खता आइ पर्यन्त देखवा मे नहि अबैत अछि । तकरो कारण की आजुक उपभोक्तावाद, ब्जारवाद भू-मण्डलीकरण मात्रकें मानल जयवाक चाही बा आनो आन ऐतिहासिक, समाजा -आर्थिक परिस्थि ति आ सामाजिक कारण आ परिवर्तन कें ?
उत्तर ःअइ सम्बन्ध मे हम ई कहब जे संपूर्ण भारत मे अपना संस्कृति के छोड़ै मे जतेक मैथिल अगुआयल छथि तेना अन्य कोनो प्रदेश नहि। जे मैथिल मिथिला सं बाहर अन्य प्रदेश मे आबि गेलाहय सब सं पहिने ओ अपन मातृभाषाक प्रति उदासीन भ’ जाइत छथि आ अत्यंत हर्षपूर्वक ई कहैत छथि जे हमरा बच्चा के तं मैथिली बाजहि नहि अबैत छैक। अपना घर मे मैथिली नहि बजैत छथि। जखन अपना मातृभाषाक प्रति एहेन उदासीन छथि तहन अपना संस्कृति सं अपनहि आप दूर भ’ जेताह। अपना मॉं-बा पके डैडी व
मम्मी अन्य के अन्टी व अंकल कहैक रेवाज भ’ गेलै अछि तं हिनका सब सं की आश कयल जाय जे ई अपना संस्कृतिक रक्षा करताह। बंगाली,मद्रासी,पंजाबी,मराठी इत्यादि प्रदेशक लोक सब अपना संस्कृति के एखनहुं धरि संजोय क’ रखने अछि। मगर पश्चिमी सभ्यताक प्रभाव सब सं अधिक मैथिल पर छन्हि ते हेतु मिथिला संस्कृति मे एहेन हानिकारक परिवर्तन देखाय पड़ैत अछि।
प्रश्न-11.अपनेक स्मृति मे कोनो गायकक गायन बा अन्य कोनो संदर्भ हो जेकर वर्णन अपने कर’ चाही? हुनक विषय मे किछु सुनयवाक इच्छा हो।वर्तमान समेत आगां पीढ़ीक लाभ हेतैक। संगहि अपनेक किछु विशेष अभिमत जे देब’-कह’ चाही।
उत्तर ःहम शास्त्रीय संगीतक उपासक छी आर अत्यंत उदासीन भ‘ कहि रहल छी जे अपन मिथिला वर्तमान समय मे शास्त्रीय संगीत सं शून्य भ’ रहल अछि। वर्तमान समय सं पहिने पं0रामचतुर मलिक, पं0 बिदुर मलिक, पं0सियाराम तिवारी,;चूंकि पं0 सियाराम तिवारीक शिक्षा अमता गाम मे भेलन्हि तें हेतु हुनका मैथिल मानइ छियनि। पं0 चन्द्र शेखर खां,पं0 रघू झा, ई सब बहुत उच्च स्तरक गायक छलाह। खास क’क’ पं0 रामचतुर मलिक, व पं0 सियाराम तिवारी तं इतिहासिक गायक छलाह ध्रुवपद शैलीक गायन मे।
भावी पीढ़ीक शिक्षार्थी एवं जिज्ञासु के अइ गायक सबके जानइ के प्रयास व हिनका गायन व कार्यक सम्बंघ मे श्रृंोध करवाक चाही ताकि भावी पीढ़ी लाभान्वित एव धु्रुवपद शैली गायनक विशेषता सं परिचित होथि।
जय मिथिला जय मैथिली, जय जय जानकी अम्ब ।
जेहि रज मे मन्डन भेला, हरलन्हि शिव के दम्भ ।।
(साभार विदेह www.videha.co.in )
स्व.रामाश्रय झा “रामरंग” (१९२८- २००९) रामरंगजीसँ गजेन्द्र ठाकुरक गप शप। (६ जुलाई २००८)
रामाश्रय झा “रामंरग” (१९२८- ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आ मंच सम्पादक छथि।
रामरंगजीसँ गप शप। (६ जुलाई २००८)
गजेन्द्र ठाकुर: गोर लगैत छी। स्वास्थ्य केहन अछि।
रामरंग: ८० बरख पार केलहुँ। संगीतमे बहटरल रहैत छी।
गजेन्द्र ठाकुर: संगीतक तँ अपन फराक भाषा होइत छैक। मैथिली संगीत विद्यापति आऽ लोचन सँ शुरू भए अहाँ धरि अबैत अछि। मैथिलीमे अहाँ लिखनहिओ छी।
रामरंग: अपन मिथिलासँ सम्बन्धित हम तीन रागक रचना केलहुँ अछि, जकर नाम ऐ प्रकारसँ अच्हि।
१.राग तीरभुक्ति, राग विद्यापति कल्याण तथा राग वैदेही भैरव। ऐ तीनू रागमेसँ तीरभुक्ति आर विद्यापति कल्याणमे मैथिली भाषामे खयाल बनल अछि। हमर संगीत रामायणक बालकाण्डमे रागभूपाली आर बिलावलमे सेहो मैथिली भाषामे खयाल छैक। आर सन्गीत रामायणक पृष्ठ ३ पर बिलावलमे श्री गणेशजीक वन्दना तथा पृष्ठ २० पर राग भूपालीमे श्री शंकरजीक वन्दना अछि। पृष्ठ ८७ पर राग तीरभुक्तिमे मिथिला प्रदेशक वन्दना अछि आर पृष्ठ १२० पर राग वैदेही भैरवक (हिन्दीमे) रचना अछि। “अभिनव गीताञ्जलीक पंचम भागमे २६५ आर २६६ पृष्ठ पर विद्यापति कल्याण रागमे विलम्बित एवं द्रुत खयाल मैथिली भाषामे अछि। मिथिला आऽ मैथिलीमे हम उपरोक्त सामग्री बनओने छी।
गजेन्द्र ठाकुर: मुदा पूर्ण रागशास्त्र विद्यापति कल्याणक, तीरभुक्तिक वा वैदेही भैरवक नञि अछि। मैथिलीमे आरो रचना अहाँ...
रामरंग: बहुत रचना मोन अछि, मुदा के सीखत आऽ के लीखत। हाथ थरथराइत अछि आब हमर।
गजेन्द्र ठाकुर: कमसँ कम ओहि तीनू रागक रचना शास्त्र लिखि दैतियैक तँ हम पुस्तकाकार छापि सकितहुँ।
रामरंग: जे रचना सभ हम देने छी ओकरा छापि दिऔक। हाथ थरथराइत अछि , तैयो हम तीनूक विस्ट्रुत विवरण पठायब, लिखैत छी।
गजेन्द्र ठाकुर: प्रणाम।
रामरंग: निकेना रहू।
रामाश्रय झा “रामरग” (१९२८- ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आऽ मंच सम्पादक छथि।
राग विद्यापति कल्याण- एकताल (विलम्बित)
मैथिली भाषामे श्री रामाश्रय झा “रामरंग” केर रचना।
स्थाई- कतेक कहब गुण अहांके सुवन गणेश विद्यापति विद्या गुण निधान।
अन्तरा- मिथिला कोकिला किर्ति पताका “रामरंग” अहां शिव भगत सुजान॥
स्थायी
- - रेग॒म॑प ग॒रेसा
ऽऽ क ते ऽऽ क क ऽ
रे सा (सा) नि॒ध निसा – रे नि॒ध प धनि सा सारे ग॒रे रेग॒म॑ओअ - म॑
ह ब ऽ ऽ ऽ गु न ऽ अ हां, ऽऽ के ऽ ऽ सुव नऽ ऽऽऽऽ ऽ ग
प प धनि॒ धप धनिसां - - रें सां नि धप (प)ग॒ रे सा रे ग॒म॑प ग॒ रेसा
ने स विऽ द्याप ति ऽऽ ऽ ऽवि द्या गुन निधा न, क ते ऽऽऽ क, कऽ
अन्तरा
पप नि॒ध निसां सांरें
मिथि लाऽ ऽऽ कोकि
सां – निसांरेंगं॒ रें सां रें नि सांरे नि॒ धप प (प) ग॒ रेसा
लाऽ की ऽऽऽ ति प ता ऽ ऽऽ का ऽऽ रा म रं ग अ
रे सासा धनि॒प ध निसा -सा रे ग॒म॑प -ग॒ सारे सा,सा रेग॒म॑प ग॒, रेसा
हां शिव भऽ, ग तऽ ऽसु जाऽऽऽ ऽ ऽ न ऽ, क ते ऽऽऽ क,कऽ
*गंधार कोमल, मध्यम तीव्र, निषाद दुनू आऽ अन्य स्वर शुद्ध।
रामाश्रय झा “रामरग” (१९२८- ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आऽ मंच सम्पादक छथि।
राग विद्यापति कल्याण- एकताल (विलम्बित)
मैथिली भाषामे श्री रामाश्रय झा “रामरंग” केर रचना।
स्थाई- कतेक कहब गुण अहांके सुवन गणेश विद्यापति विद्या गुण निधान।
अन्तरा- मिथिला कोकिला किर्ति पताका “रामरंग” अहां शिव भगत सुजान॥
स्थायी
- - रेग॒म॑प ग॒रेसा
ऽऽ क ते ऽऽ क क ऽ
रे सा (सा) नि॒ध निसा – रे नि॒ध प धनि सा सारे ग॒रे रेग॒म॑ओअ - म॑
ह ब ऽ ऽ ऽ गु न ऽ अ हां, ऽऽ के ऽ ऽ सुव नऽ ऽऽऽऽ ऽ ग
प प धनि॒ धप धनिसां - - रें सां नि धप (प)ग॒ रे सा रे ग॒म॑प ग॒ रेसा
ने स विऽ द्याप ति ऽऽ ऽ ऽवि द्या गुन निधा न, क ते ऽऽऽ क, कऽ
अन्तरा
पप नि॒ध निसां सांरें
मिथि लाऽ ऽऽ कोकि
सां – निसांरेंगं॒ रें सां रें नि सांरे नि॒ धप प (प) ग॒ रेसा
लाऽ की ऽऽऽ ति प ता ऽ ऽऽ का ऽऽ रा म रं ग अ
रे सासा धनि॒प ध निसा -सा रे ग॒म॑प -ग॒ सारे सा,सा रेग॒म॑प ग॒, रेसा
हां शिव भऽ, ग तऽ ऽसु जाऽऽऽ ऽ ऽ न ऽ, क ते ऽऽऽ क,कऽ
रामाश्रय झा “रामरग” (१९२८- ) विद्वान, वागयकार, शिक्षक आऽ मंच सम्पादक छथि।
२.राग विद्यापति कल्याण – त्रिताल (मध्य लय)
स्थाई- भगति वश भेला शिव जिनका घर एला शिव, डमरु त्रिशूल बसहा बिसरि उगना भेष करथि चाकरी।
अन्तरा- जननी जनक धन, “रामरंग” पावल पूत एहन, मिथिलाक केलन्हि ऊँच पागड़ी॥
स्थाई- रे
भ
सा गम॑ प म॑ प - - म॑ग॒ - रे सा सारे नि सा -, नि
ग तिऽऽ व श ऽ ऽ भे ऽ ला ऽ शि ऽ व ऽ ऽ जि
ध़ नि सा रे सा नि॒ – प़ ध़ नि॒ ध़ प़ – नि सा - - सा
न का ऽ घ र ऽ ऽ ए ऽ ला ऽ शि व ऽ ऽ ड
रे ग॒ म॑ प प – प नि॒ ध प म॑ प धनि सां सां गं॒
म रु ऽ त्रि शू ऽ ल ब स हा ऽ बि सऽ ऽऽ रि उ
रें सां नि रें सां नि॒ ध प म॑ प पनि॒ ध प - -ग -- रे
ग ना ऽ ऽ भे ऽ ष क र थि चाऽ ऽ कऽ ऽरी ऽऽ, भ
अन्तरा प
ज
प नि सां सां सां - - ध नि - ध नि नि सां रें सां -, नि
न नी ऽ ज न ऽ ऽ ऽ ऽ क ध न ध न ऽ, रा
नि सां – गं॒ रें सां सां नि – ध नि सां नि॒ ध प ग॒
म॑ प नि सां सां नि॒ ध प म॑ प पनि॒ ध प- -ग – रे
थि ला ऽ क के ल न्हि ऊँ ऽ च पाऽऽ गऽ ऽड़ी ऽऽ,भ
***गंधार कोमल, मध्यम तीव्र, निषाद दोनों व अन्य स्वर शुद्ध।
राग विद्यापति कल्याण- एकताल (विलम्बित)
मैथिली भाषामे श्री रामाश्रय झा “रामरंग” केर रचना।
स्थाई- कतेक कहब गुण अहांके सुवन गणेश विद्यापति विद्या गुण निधान।
अन्तरा- मिथिला कोकिला किर्ति पताका “रामरंग” अहां शिव भगत सुजान॥
स्थायी
- - रेग॒म॑प ग॒रेसा
ऽऽ क ते ऽऽ क क ऽ
रे सा (सा) नि॒ध निसा – रे नि॒ध प धनि सा सारे ग॒रे रेग॒म॑ओअ - म॑
ह ब ऽ ऽ ऽ गु न ऽ अ हां, ऽऽ के ऽ ऽ सुव नऽ ऽऽऽऽ ऽ ग
प प धनि॒ धप धनिसां - - रें सां नि धप (प)ग॒ रे सा रे ग॒म॑प ग॒ रेसा
ने स विऽ द्याप ति ऽऽ ऽ ऽवि द्या गुन निधा न, क ते ऽऽऽ क, कऽ
अन्तरा
पप नि॒ध निसां सांरें
मिथि लाऽ ऽऽ कोकि
सां – निसांरेंगं॒ रें सां रें नि सांरे नि॒ धप प (प) ग॒ रेसा
लाऽ की ऽऽऽ ति प ता ऽ ऽऽ का ऽऽ रा म रं ग अ
रे सासा धनि॒प ध निसा -सा रे ग॒म॑प -ग॒ सारे सा,सा रेग॒म॑प ग॒, रेसा
हां शिव भऽ, ग तऽ ऽसु जाऽऽऽ ऽ ऽ न ऽ, क ते ऽऽऽ क,कऽ
*गंधार कोमल, मध्यम तीव्र, निषाद दुनू आऽ अन्य स्वर शुद्ध।
३.श्री गणेश जीक वन्दना
राग बिलावल त्रिताल (मध्य लय)
स्थाई: विघन हरन गज बदन दया करु, हरु हमर दुःख-ताप-संताप।
अन्तरा: कतेक कहब हम अपन अवगुन, अधम आयल “रामरंग” अहाँ शरण।
आशुतोष सुत गण नायक बरदायक, सब विधि टारु पाप।
स्थाई
नि
ग प ध नि सा नि ध प ध नि॒ ध प म ग म रे
वि ध न ह र न ग ज ब द न द या ऽ क रु
ग ग म नि॒ ध प म ग ग प म ग म रे स सा
ग रु ऽ ह म र दु ख ता ऽ प सं ता ऽ प ऽ
अन्तरा
नि रें
प प ध नि सां सां सां सां सां गं गं मं गं रें सां –
क ते क क ह ब ह म अ प न अ व गु न ऽ
रे
सां सां सां सां ध नि॒ ध प ध ग प म ग ग प प
अ ध म आ य ल रा म रे ऽ ग अ हां श र ण
ध प म ग म रे सा सा सा सा ध - ध नि॒ ध प
आ ऽ शु तो ऽ ष सु त ग ण ना ऽ य क व र
धनि संरें नि सां ध नि॒ ध प पध नि॒ ध प म ग म रे
दाऽ ऽऽ य क स ब बि ध टाऽ ऽ रु ऽ पा ऽ ऽ प
४.मिथिलाक वन्दना
राग तीरभुक्ति झपताल
स्थाई: गंग बागमती कोशी के जहँ धार, एहेन भूमि कय नमन करूँ बार-बार।
अन्तरा: जनक याग्यवल्क जहँ सन्त विद्वान, “रामरंग” जय मिथिला नमन तोहे बार-बार॥
स्थाई
रे – ग म प म ग रे – सा
गं ऽ ग ऽ बा ऽ ग म ऽ ती
प
सा नि ध़ – प़ नि नि सा रे सा
को ऽ शी ऽ के ज हं धा ऽ र
सा
म ग रेग रे प ध म पनि सां सां
ए हे नऽ ऽ भू ऽ मि कऽ ऽ य
प
सां नि प ध (ध) म ग रे सा सा
न म न क रुँ बा ऽ र बा र
अन्तरा
प पध म – प नि नि सां – सां
ज नऽ क ऽ ऽ या ग्य व ऽ ल्क
रें रें गं – मं मं गं रें – सां
ज हं सं ऽ त वि ऽ द्वा ऽ न
ध प
सां नि प ध म प नि सां सां सां
रा म रं ऽ ग ज य मि थि ला
प
सां नि प ध (ध) म ग रे सा सा
न म न तो हे बा ऽ र बा र
५.श्री शंकर जीक वन्दना
राग भूपाली त्रिताल (मध्य लय)
स्थाई: कतेक कहब दुःख अहाँ कय अपन शिव अहूँ रहब चुप साधि।
अन्तरा: चिंता विथा तरह तरह क अछि, तन लागल अछि व्याधि,
“रामरंग” कोन कोन गनब सब एक सय एक असाध्य॥
स्थाई
प ग ध प ग रे स रे स ध सा रे ग रे ग ग
क ते क क ह ब दुः ख अ हाँ कय अ प न शि व
ग ग – रे ग प ध सां पध सां ध प ग रे सा –
अ हूँ ऽ र ह ब चु प साऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ धि ऽ
अन्तरा
प ग प ध सां सां – सां सां ध सां सां सां रें सां सां
चिं ऽ ता ऽ वि था ऽ त र ह त र ह क अ छि
सां सां ध - सां सां रें रें सं रे गं रें सां – ध प
त न ला ऽ ग ल अ छि व्या ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ धि ऽ
सां – ध प ग रे स रे सा ध स रे ग रे ग ग
रा ऽ म रं ऽ ग को न को ऽ न ग न ब स ब
ग ग ग रे ग प ध सां पध सां ध प ग रे सा –
ए क स य ए ऽ क अ साऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ध्य ऽ
श्री रामाश्रय झा ’रामरंग’
भारतीय शास्त्रीय संगीतक समर्पित आऽ विलक्षण ओऽ विख्यात संगीतज्ञ पं रामाश्रय झा ’रामरंग’ केर जन्म ११ अगस्त १९२८ ई. तदनुसारभाद्र कृष्णपक्ष एकादशी तिथिकेँ मधुबनी जिलान्तर्गत खजुरा नामक गाममे भेलन्हि। हिनकर पिताक नाम पं सुखदेव झा आऽ काकाक नाम पं मधुसदन झा छन्हि। रामाश्रयजीक संगीत शिक्षा हिनका दुनू गोटेसँ हारमोनियम आऽ गायनक रूपमे मात्र ५ वर्षक आयुमे शुरू भए गेलन्हि। तकरा बाद श्री अवध पाठकजीसँ गायनक शिक्षा भेटलन्हि।
१५ वर्ष धरि बनारसक एकटा प्रसिद्ध नाटक कम्पनीमे रामाश्रय झा जी कम्पोजरक रूपमे कार्य कएलन्हि। पं भोलानाथ भट्ट जी सँ २५ वर्ष धरि ध्रुवपद, धमार, खयाल, ठुमरी, दादरा, टप्पा शैली सभक विधिवत शिक्षा लेलन्हि।
पं भट्ट जीक अतिरिक्त्त रामाश्रय झा जी पं बी.एन. ठकार (प्रयाग), उस्ताद हबीब खाँ (किराना), पं बी.एस. पाठक (प्रयाग) सँ सेहो संगीतक शिक्षा प्राप्त कएलन्हि।
पं झा १९५४ सँ प्रयागमे स्थाई रूपसँ रहि रहल छथि। १९५५ ई.मे हिनकर नियुक्त्ति लूकरगंज संगीत विद्यालयमे संगीत अध्यापक रूपमे भेलन्हि। १९६० ई.मे हिनकर नियुक्त्ति प्रयाग संगीत समितिमे भेलन्हि, जतए १९७० धरि प्रभाकर आऽ संगीत प्रवीण कक्षाक शिक्षक रहलाह। १९७०मे इलाहाबाद विश्वविद्यालयक संगीत विभागाध्यक्ष श्री प्रो. उदयशंकर कोचकजी पं झाक संगीत क्षेत्रक सेवासँ प्रभावित भए विश्वविद्यालयमे हिनकर नियुक्त्ति कएलन्हि। पं झा उत्कृष्ट शिक्षक, गायक आऽ आकाशवाणीक प्रथम श्रेणीक कलाकार छथि। हिनकर अनेक शिष्य-शिष्या आकाशवाणीक प्रथम श्रेणीक कलाकार आऽ उत्तम शिक्षक छथि, जेना-
डॉ. गीता बनर्जी, श्रीमति कमला बोस, श्रीमति शुभा मुद्गल, श्रीकान्त वैश्य,श्री शान्ता राम कशालकर, श्री शान्ता राम कशालकर, श्री कामता खन्ना, श्रीमति सत्या दास, डॉ. रूपाली रानी झा, डॉ इला मालवीय, श्री अनिल कुमार शर्मा, श्री रामशंकर सिंह, श्रीमति संगीता सक्सेना, श्री राजन पर्रिकर, श्रीमति रचना उपाध्याय, श्री नरसिंह भट्त, श्री भूपेन्द्र शुक्ला, श्री जगबन्धु इत्यादि।
पं झा संगीत शास्त्र केर श्रेष्ठ लेखक छथि आऽ हिनकर लिखल अभिनव गीतांजलि केर पांचू भाग प्रकाशित भए चुकल अछि, जाहिमे २००सँ ऊपर रागक व्याख्या अछि आऽ दू हजारक आसपास बंदिश अछि।
मिथिलावासी श्री रामरंग राग तीरभुक्त्ति, राग वैदेही भैरव, आऽ राग विद्यापति कल्याण केर रचना सेहो कएने छथि आऽ मैथिली भाषामे हिनकर खयाल ’रंजयति इति रागः’ केर अनुरूप अछि।
१९८२ मे उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कारक संगे ’रत्न सदस्यता’ सेहो देल गेलन्हि। संगीत लेखनक हेतु काका हाथरसी पुरस्कार, आऽ भारतक सर्वोच्च संगीत संस्था आइ.टी.सी. केर सम्मान सेहो हिनक भेटि चुकल छन्हि। २०० ई. मे स्वर साधना रत्न अवार्ड, २००५ मे संगीत नाटक अकादेमीक राष्ट्रीय पुरस्कार, भारत संगीत रत्न, राग ऋषि, संत तुलसीदास सम्मान, प्रायाग गौरव एवं सोपरी अकादेमीक ’सा म प वितस्ता’ इत्यादि सम्मान श्री झाकेँ प्राप्त छन्हि। श्री रामरंग जी प्रयागमे ’वारिन दास संगीत परिषद’ केर स्थापना कए अनेकानेक संगीत समारोहक आयोजन सेहो कएने छथि। ’इलाहाबाद विश्वविद्यालय संगीत सम्मेलन’ ३० वर्षसँ बन्द पड़ल छल जकरा वार्षिक रूपसँ १९८० मे पुनः श्री झा आरम्भ करबओलन्हि। किएक तँ श्री झा लग कोनो औपचारिक डिग्री नहि छलन्हि, इलाहाबाद विश्वविद्यालय अपन नियममे परिवर्त्तन कएलक आऽ हिनका ओतए संगीत विभागाध्यक्ष बनाओल गेलन्हि, जतएसँ ओऽ १९८९ ई. मे सेवानिवृत्त भेलाह। तुलसीक मानसक आधार पर श्री झा सात काण्डक संगीत रामायणक सेहो रचना कएलन्हि। पं झा मुख्य रूपसँ खयाल, ठुमरी, दादरा, टप्पा आऽ संगहि ध्रुवपद, धमार, तराना, तिरवट, चतुरंग, रागमाला, रागसागर, रागताल सागर, भजन आऽ लोकगीत गायनमे सिद्ध छथि।
अखन ८० वर्षक आयुमे प्रयागमे श्री झा संगीत साधनामे रत छलाह १ जनवरी २००९ केँ हुनकर मृत्यु कोलकातामे भऽ गेलन्हि।
(साभार विदेह http://www.videha.co.in/ )
(साभार विदेह http://www.videha.co.in/ )
Monday, October 3, 2011
Sunday, October 2, 2011
Saturday, October 1, 2011
सितम्बर २०११क सभसँ नीक समदियाक सम्मान नवेन्दु कुमार झा केँ
सितम्बर २०११क सभसँ नीक समदियाक सम्मान नवेन्दुकुमार झा केँ देल जा रहल अछि हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.com/2011/09/blog-post_01.html लेल। बधाइ।
बिहारक विकासक लेल प्रदेश मे नव नव उद्योग-नवेंदु कुमार झा
बिहारक विकासक लेल प्रदेश मे नव नव
उद्योग लगैबाग नीतीश सरकार प्रयास लगातार चलि रहल अछि एहि कड़ी मे सरकार आब एफएमसीजी
कम्पनी दिस ध्यान देलक अछि। आईटीसी, नस्ले आदि कम्पनी द्वारा प्रदेश मे निवेश करबाक
योजनाक बाद आब डिटर्जेंट आ साबूनक क्षेत्र मे बहुराष्ट्रीय कम्पनी के टक्कर दऽ रहल
घड़ी डिटर्जेंट आ साबून के इकाई प्रदेश मे लगैबाक योजना अछि। कानपुरक आरएसपीएलक ई
उत्पाद बिहार मे बनैबाक लेल कम्पनी सरकारक संग गपसप कऽ रहल अछि। सरकारी सूत्रक
अनुसार कम्पनी एहि योजनाक लऽकऽ गंभीर अछिआ गोटेक 100 करोड़ टाका निवेश करत। उद्योग
विभाग प्रधान सचिव सी.के. मिश्रा जनतब देलनि अछि जे निवेशक के आकर्षित करबाक लेल
सरकारक रणनीति सफल भऽ रहल अछि। पैघ कम्पनी दिस सेहो ध्यान देल जा रहल अछि।
घड़ी डिटर्जेन्ट बनबऽ बाला आरएसपीएल पटना सँ सटल फतुहा लऽग जमीन पसिन्न कएलक अछि। आशा अछि जे एहि मासक अंत धरि एहि पर अंतिम निर्णय भऽ जाएत आ विस्तृत प्रस्ताव सरकार धरि पठा देल जाएत। दोसर दिस आईटीसी सेहो अपन कारोबार बढ़ा रहल अछि। कम्पनी मूंगेर मे स्थापित अपन इकाईक लऽग-पास मे नव डेयरी इकाई खोलबाक निर्णय लेल अछि। एहि इकाई मे 100 सँ 200 करोड़ टाकाक मध्य निवेश करत। एहि मध्य बहुराष्ट्रीय कम्पनी नेस्ले बिहार मे प्रस्तावित योजनाक संदर्भ मे तऽ किछु स्पष्ट नहि कएलक अछि मुदा सरकारी सूत्रक अनुसार कम्पनीक संग गप-सप चलि रहल अछि। कम्पनी के पटनाक लऽग-पास मे ऊंच जगह पर जमीनक खोज कएल जा रहल अछि। कम्पनीक एहि प्रस्तावित इकाई सँ चॉकलेट आ मैगी नूडल्सक उत्पादन होएत।
घड़ी डिटर्जेन्ट बनबऽ बाला आरएसपीएल पटना सँ सटल फतुहा लऽग जमीन पसिन्न कएलक अछि। आशा अछि जे एहि मासक अंत धरि एहि पर अंतिम निर्णय भऽ जाएत आ विस्तृत प्रस्ताव सरकार धरि पठा देल जाएत। दोसर दिस आईटीसी सेहो अपन कारोबार बढ़ा रहल अछि। कम्पनी मूंगेर मे स्थापित अपन इकाईक लऽग-पास मे नव डेयरी इकाई खोलबाक निर्णय लेल अछि। एहि इकाई मे 100 सँ 200 करोड़ टाकाक मध्य निवेश करत। एहि मध्य बहुराष्ट्रीय कम्पनी नेस्ले बिहार मे प्रस्तावित योजनाक संदर्भ मे तऽ किछु स्पष्ट नहि कएलक अछि मुदा सरकारी सूत्रक अनुसार कम्पनीक संग गप-सप चलि रहल अछि। कम्पनी के पटनाक लऽग-पास मे ऊंच जगह पर जमीनक खोज कएल जा रहल अछि। कम्पनीक एहि प्रस्तावित इकाई सँ चॉकलेट आ मैगी नूडल्सक उत्पादन होएत।
लाल कृष्ण आडवाणीक महगी भ्रष्टाचारक विरूद्ध प्रस्तावित रथयात्रा-नवेंदु कुमार झा
भारतीय जनता पार्टीक वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणीक महगी भ्रष्टाचारक विरूद्ध प्रस्तावित रथ यात्रा 11 अक्टूबर के सम्पूर्ण क्रान्तिक प्रणेता जय प्रकाशक जन्म स्थली उत्तर प्रदेशक सिताब दियारा सँ प्रारंभ भऽ छपरा होइत ओहि दिन राजधानी पटना पहूचत। 11 अक्टूबर के रात्रि विश्रामक बाद ई यात्रा 12 अक्टूबर के गयाक लेल विदा भऽ जाएत आ ओहि रास्ता सँ साझ मे झारखंडक सीमा मे प्रवेश करता। 11 अक्टूबर के एहि यात्रा के बिहारक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार झण्डी देखा कऽ विदा करताह। एहि अवसर पर लोकसभा मे विपक्षक नेता सुषमा स्वराज आ राज्य सभा मे विपक्षक नेता अरूण जेटली सेहो उपस्थित रहताह। भाजपाक रथ यात्राक सारथी श्री आडवाणीक ई छठम रथ यात्रा होएत। एहि सँ पहिने ओ राम रथ यात्रा, जनादेश रथ यात्रा, स्वर्ण जयंती रथ यात्रा, भारत उदय रथ यात्रा आ भारत सुरक्षा रथ यात्रा कऽ चूकल छथि मुदा राम रथ यागा सन जन समर्थन आर कोनो यात्रा के नहि भेटल छल।
भाजपाक रथ पर सवार भऽ दिल्लीक गद्दी पर पहूचताह नीतीश?-नवेंदु कुमार झा
(पटना ब्यूरो) भाजपा सँ दोस्ती का मोदी सँ दूरी, ई अछि सत्ताक लेल राजनीतिक मजबूरी देश मे विपक्षीक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सहयोगी जनता दल यूनाइटेड पर सटीक बैसि रहल अछि। भ्रष्टाचार आ महगीक विरूद्ध भाजपाक वरिष्ठ नेता पीएम इन वेटिंग लाल कृष्ण आडवाणीक प्रारंभ होमए बाला रथ यात्रा के बिहारक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विदा करबाक निर्णयक जदयूक घोषणा सँ भाजपा राहतक सांस लेलक अछि। हालांकि जदयूक एहि निर्णय सँ राजगक भीतर प्रधानमंत्री पदक लेल संशय बढ़ि गेल अछि। एक दिस उपासक बहन्ने गुजरातक मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पदक मजगूत दाबेदारी प्रस्तुत कएलनि अछि। मुदा भाजपाक भीतर मोदी विरोधी खेमा एहि रथ यात्रा लेल जदयूक समर्थन लऽ प्रधानमंत्रीक रूप मे श्री आडवाणीक दावेदारी के मजगूत करैबा मे सफल भेलाह अछि।
रथ यात्राक लऽ कऽ भाजपा आ जदयू मे चलि रहल खीचतान के विराम दैत नीतीश कुमार एक बेर फेर अपना आप के कुशल राजनीतिक रंजिनियरक रूप मे सोझा अएलाह अछि। मोदीक संग पटना मे लागल पोस्टर पर नाराज होमय बाला श्री कुमारक आडवाणीक रथ पर सवार होएब दूरगामी राजनीतिक सोचक परिचायक अछि। नीतीश कुमार के एहि बादक अंदाज अछि जे केन्द्र के सत्ताक मे राजगक संभावना बनला पर प्रधानमंत्री पदक वास्ते भाजपा मे घमासान भऽ सकैत अछि आ एहि स्थिति मे आडवाणी खेमाक ओ पसिन्न बनि सकैत छथि। एखन राजग मे हुनक शासन व्यवस्था के लोहा मानल जा रहल अछि आ ओ एकर लाभ लेबाक सभ संभव प्रयास करताह। श्री कुमारक दूरगामी राजनीतिक कौशल विधान सभा चुनाव मे सेहो देखल गेल छला। विधानसभाक पहिल चरणक चुनाव अल्पसंख्यक बहुल क्षे मे छल आ जद यू साझा प्रचार अभियानक बादो पहिल चरणक चुनाव प्रचार मे लाल कृष्ण आडवाणी सँ दूरी बनौने छल।
ओना लोक सभा चुनाव मे एखन समय अछि मुदा महगी आ भ्रष्टाचारक मामिला पर लाचार कांग्रेसक नेतृत्व वाला डा0 मनमोहन सिंह सरकारक विरूद्ध बनल वातावरण के भजैबाक लेल एखनहि सँ कसरत कऽ रहल अछि। हालांकि भाजपा दिस सँ एखन धरि प्रधानमंत्रीक उम्मीदवारक नाम पर अंतिम सहमति नहिल बनल अछि मुदा जदयू राजगक प्रधानमंत्रीक उम्मीदवारक नामक घोषणा लेल अपना स्तर सँ दबाब बनाएब प्रारंभ कऽ देलक अछि। जदयूक नेता सभ एहि लेल नीतीश कुमारक नाम बेर-बेर उछालि रहल छथि हालांकि श्री कुमार बेर-बेर एहि पर सफाई दऽ अपन उम्मीदवारी के नकारि रहल छथि। तथापि आडवाणीक रथ यात्रा मे हुनक भागीदारीक घोषणा सँ प्रधानमंत्री पदक उम्मीदवारी राजगक लेल हॉट केक बनि गेल अछि।
आडवाणी भाजपाक रथ यात्राक कुशल सारथि छथि। राम मंदिर आंदोलनक रथ पर सवार भऽ ओ भाजपा केऽ सत्ताक प्रमुख दावेदारक रूप मे स्थापित कएलनि अछि। देशक वर्तमान राजनीति कांग्रेस आ भाजपा के नेतृत्व मे ध्रुवीकरण भऽ गेल अछि। भाजपा महारथी एखन धरि राम रथ यात्रा जनादेश रथ यात्रा, स्वर्ण जयंती रथ यात्रा भारत उदय रथ याथ आ भारत सुरक्षा रथ यात्राक सारथी बनि चूकल छथि मुदा राम रथ यात्राक बाद रथ या़ाक बढ़ैत संख्याक संगहि जन समर्थन कम होईत गेल आब 11 अक्टूबर सँ जय प्रकाश जन्म भूमि सिताब दियारा सँ प्रारंभ होमए बाला रथ यात्राक सभ पर नजरि अछि। ओना महगी आ भ्रष्टाचार विरूद्ध भाजपाक भेल शंखनाद सम्मेलन कतेको ठाम भेल छल जे फ्लॉप शो साबित भेल छला।
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