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Saturday, August 20, 2011

विदेह ई-पत्रिकाक ७७म अंक जे नारी विशेषांक छल, अपनामे एकटा अध्याय छल/ ज्योति सुनीत चौधरी

विदेह ई-पत्रिकाक ७७म अंक जे नारी विशेषांक छल, अपनामे एकटा अध्याय छल, ओइ अंकसँ किछु रचना आ चर्चा साभार दऽ रहल छी: ......

ज्योति सुनीत चौधरी
उजागर भविष्य :

कतेक उत्साह सऽ अहिभफ्फर बनाओल आ बॉंटल गेल छल भरिगाम।एक सऽ एक अमीर आ प््राभावशाली परिवारक घटक आयल छलैन मुदा मिसराइनजी अपन एकलौता बेटा के विवाह एक मध्यम वर्गीय परिवारक शिक्षित बेटी के पुतहु बनाकऽ अनली आ सब बिध बड्ड मोन सऽ पुरौली।पुतहु के स्नेह सऽ ‘सुकृती’ नामकरण सेहो केली। ओना तऽ एकटा भट्ठी आ कै टा छोट मोट व्यापार छलैन परिवार के जाहि लऽ कऽ सम्पन्न परिवार मे गिनती छलैन। मुदा मोन छलैन जे गरीब परिवारक बेटी आनब तऽ सहमिलु होयत आ बेसी नीक सऽ संयुक्त परिवारमे मिल कऽ रहत।शुरूआतमे तऽ ठीके बड्ड प््रासन्न छलीह मुदा पाइक गौरब सऽ बेसी खतरनाक ज्ञानक गरमी होयत छहि से मिसराइन सहित पूरा परिवार के बड्ड जल्दी बुझा गेलैन जखन पोर्तापोती के आगमन भेलैन।
पोता के प््राति सबहक व्यवहार बेसीतर पुतहुक अनुकूले छलैन मुदा पोती के मैट्रिक पास करेलाक बाद जैने सब घरक काज दिस झोंकय चाहलखिन त पुतहु विद्रोह कय देलखिन।ननदि सब मिडिल स्कूले तक पढ़ने छली से सब कहलखिन जे अहि सऽ बेसी पढ़क कोनो प््रायोजन नहिं। मुदा सुकृतीजी में सबसऽ विद्रोह कय असगर अपन विचार पर अडिग रहय के साहस कतय सऽ आयल छलैन ताहिपर सबके क्षोभ छलैन।पति सऽ मात्र आर्थिक सहारा चाही छलैन से अतेक दिनक नीष्ठाक बदले भेट गेलैन।
सुकृतीजी भूत जकॉं सब काज अपने कय बेटी के पाहुन जकॉं भोजन हाथ कय दय कॉलेज विदा करैत छलीह। घरक बूर्ढ़ बुजुर्गक विरूद्ध काज केनाई आसान तऽ भऽ नहिं सकैत छलैन। बेटी कुनो असाधारण प््रातिभा के धनी नहिं छलैन।ओ एक सामान्य छात्रा छलैन ईहो बात ककरो सऽ नुकायल नहिं छल।एहेनमे घरक लोक सब खूब चुटकी लय रहल छलैन। दियाद सबमे हहारो मचल छल। बेटीके रिक्सा पर कॉलेज जायत आबैत काल भरि ऑंगनक कनिया सब घोघ तानि ताना मारैत छलैर्न नहिं जानि कोन कलक्टर बनतैन बेर्टी जकर माय एहेन अनुशासनहीन आ एकढ़बा अछि तकर बेटी केहेन होयत. आदि आदि।मुदा सुकृतीजीके शिक्षाक महत्ता पर अतेक विश्वास छलैन जे ओ अहि सबलेल बहिर भऽ गेल छली आ अपन बेटी के कॉलेज जायर्त आबैत देखि हुन्का स्त्रीवर्गक एक उजागर भविष्यके दर्शन होएत छलैन।

ज्योति सुनीत चौधरी यूके मे भेल 2011 के वार्षिक मिथिला सांस्कृतिक कार्यक्रम पर एक विवरण :

ज्योति सुनीत चौधरी
यूके मे भेल 2011 के वार्षिक मिथिला सांस्कृतिक कार्यक्रम पर एक विवरण :
बहुत गर्वक बात अछि जे अपन माटि सऽ दूर रहितो यू के मे रहैवला मैथिल सब. जाहिमे बेसीतर दम्पति कार्यरत छैथ. अपन कला आ संस्कृतिके प््राति सम्मानक भाव जीवित रखने छैथ।जाहि भव्य रूपे तेसर बेरक मैथिल वार्षिक समारोह 9 अप््िराल 2011 क स्लाऊमे सम्पन्न भेल हमरा सबके अपन संस्कृतिके स्वर्णिम युगक प््राारम्भ नजदीके बुझबाक चाही।
कार्यक्रमक प््राारम्भ कल्पनाजी. जे लॉयड्स बैंकमे कार्यरत छैथ के मधुर वाणी सऽ स्वागत सम्भाषण सऽ भेल।कल्पनाजी स्वयम् भागलपुरके छैथ आ मैथिली उच्चारणमे पारंगत नहिं छैथ मुदा हुन्कर प््रायास आ अभ्यास सऽ ओ कठिन शब्दके तेहेन सहजता सऽ बजली जाहि लऽ कऽ हुन्का मिथिला के ‘कैटरीना कैफ’ कहल जा सकैत छैन। तकरबाद डॉक्टर जी डी झा सबके आर्शीवचन के संग एक भजन “जनक नन्दिनी मॉं” सुनेलखिन।पारूलके गायत्रीमन्त्र पर भरतनाट्यम् आ पारूल आ वत्सलाके ‘सुनु सुनु रसिया’ पर राधाकिसनक रूपमे नृत्य बड़ मनमोहक छल।फेर मिथिला संस्कृति पर मधुबनी ्र मिथिला पेण्टिग के माध्यम सऽ एक पावरप्वाइंट प््रोजेन्टेशन प््रास्तुत कैल गेल।फेर सबसऽ गर्वक समय छल मुख्य अतिथि आदरणीया डॉक्टर शेफालिका वर्मा जीके परिचय।
किछु डॉक्टरसब अपन अपन अवैतनिक रूपसऽ कैल गेल सामाजिक कार्य आ चिकित्सा सुविधाक अभाव. विकासक आवश्यकता आ सम्भावना पर बहुत ज्ञानपूर्ण पावरप्वाइंट प््रास्तुतिकरण केलैन। डॉ अरूण झा ह्यसेण्ट अलबन्सहृ मानसिक रोग . सामान्य चिकित्सा तथा स्त्री शिक्षा पर बजला । डॉ रीता झा सबके मोन पारलखिन जे पानि. बिजली आ पौष्टिक आहारक उपलब्धता कतेक पैघ सौभाग्य अछि।हुन्कर प््रास्तुतिकरणमे गर्भावस्थामे होयवला मृत्युक कारण पर सेहो जोर देल गेल छल।डॉ रामभद्रजी शल्य चिकित्साक कौशल्य विकास पर सेहो बजला।
अध्यक्ष डॉ अरूण झा ह्यबर्नलेहृ मैथिल साहित्यिक संस्था यूके के आर्थिक दशा पर अपन वक्तव्य देला।नब सदस्यसबहक स्वपरिचय के बाद मुख्य अतिथि अपन सुभाषण के प््राारम्भ ‘हरसिंगार’ के पंक्ति स केली जाहिमे हुन्कर नाम ‘शेफालिका’ राखैके कारण व्यक्त छल।हुन्कर भाषणमे विदेहके सबसऽ प््राचलित आ लोकप््िराय मैथिली पत्रिकाके रूपमे चर्चा भेल।कहैके आवश्यकता नहिं जे अहि पत्रिका के सम्पादक महोदयके सेहो प््राशंसा भेलैन।मुख्य अतिथिके फूल आदि उपहार देलाक बाद “विदेशमे रहै वला नबका दोसर पीढ़ी अपन संस्कृति बिसरि रहल छैथ” ताहि विषय पर वार्द विवाद प््रातियोगिता भेल।भाषा मैथिली तक सीमित नहिं छल कारण किछु बुद्धिजीवी नब पीढ़ीक लोक मैथिली बाजैमे असमर्थ छलैथ आ हुन्कर सबहक विचार बहुत महत्वपूर्ण छल।बहुत नीक विचारविमर्श छल मुदा सबहक निष्कर्ष किछु हद तक निराशाजनक छल जे ठीके हमसब अपन संस्कृति बिसरि रहल छी।मुदा अन्तमे एकटा खट्टरकक्काके प््रासंग ‘मिथिला संस्कृति’ पर हास्य नाट्य प््रास्तुत कैल गेल जाहिके संवाद बहुत तर्कसंगत आ विषय स सम्बद्ध छल।
फेर नाच गान करैलेल बच्चा सबके मिथिला पेण्टिग सऽ बनल प््रामाणपत्र देलगेल।वाद विवाद जीतनाहरके मिथिला पेण्टिग छपल टी कप देल गेल। श्रीमती माला मिश्रा. डॉ वीणा झा. डॉ विभाष मिश्र. श्रीमती अनीता चौधरी द्वारा प््रास्तुत गीत नादक कार्यक्रम सेहो बड्ड मनोरंजक छल।कविता पाठ सेहो भेल। अध्यक्ष दम्पत्ति. सचिव दम्पत्ति. कोषाध्यक्ष दम्पत्ति के संग विभाषजी सपरिवार बड्ड प््रायास केने छलैथ अहि कार्यक्रमके सफल करैमे ताहि कारणे विशेष धन्यवादक पात्र छैथ। आशा करैत छी नब अध्यक्ष आ नब सदस्यगण अकरा आर ऊपर लऽ जेता ।कार्यक्रमके चित्र लेल www.maithili.co.uk वेब साइट देखू। (साभार विदेह www.videha.co.in)

Friday, August 19, 2011

इर्लिंग आर्ट ग्रुपक 95 म वार्षिक कला प्रदर्शनी -ज्योति सुनीत चौधरी

इर्लिंग आर्ट ग्रुप के अन्तर्गत जे 95म वार्षिक कला प्रदर्शनी लागल छल ताहिमे हमर तीन टा मधुबनी पेण्टिग सेहाे प्रदर्शित छल। ई कला तऽ अहुना विश्व भरिमे अपन पहचान बना चुकल अछि। अहु प्रदर्शनीमे अहि कलाके उच्च स्थान भेटल छल।सब बेर बढ़िया कलाके द्वार पर जगह भेटैत छल से अहि बेर मधुबनी वा मिथिला चित्रकलाके प्रवेश द्वार लग जगह भेटल छल।प्रदर्शनी हाॅलमे प्रवेश करैत देरी बामा कात सबसऽ पहिने काेहवर आ अन्य दू टा चित्रकला नजरि आबैत छल।
कैटेलाॅगमे सेहाे हमर नाम दाेसर स्थान पर आ हमर पेण्टिग के नाम तेसर चारिम आ पाॅचम स्थान पर छल।जे कलाकार पहिल स्थान पर रहैथ तिनकर दू टा आॅयल पेण्टिग प्रवेश द्वारपर दहिना कात विराजमान छलैन।पहिल दिनक प्राइवेट व्यू वला दिन कम सऽ कम 100 लाेकक भीर लागल छल।अहि सफल प्रदर्शनी मे मिथिला चित्रकलाके जे सम्मानजनक स्थान भेटल छल से वास्तवमे प्राेत्‍साहक अछि।(साभार विदेह www.videha.co.in)