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Monday, September 1, 2014
नारी केन्दित सगर राति दीप जरय'क 83 कथा गोष्ठी, सखुआ-भपटियाही
सगर राति दीप जरय- सखुआ, भपटियाही
Saturday, August 20, 2011
उमेश मंडल सुपौलक कथा गोष्ठी : ४ दिसम्बर २०१०
उमेश मंडल
सुपौलक कथा गोष्ठी : ४ दिसम्बर २०१०
व्यापार संघ भवन सुपौलमे दिनांक ४.१२.२०१०केँ सगर राति दीप जरय'क ७२म कथा गोष्ठी श्री अरविन्द कुमार ठाकुरक संयोजकत्वमे बिपल्व फाउण्डेसन आ प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित कएल गेल। सांझ ६ बजे प्रो. सचिन्द्र महतोजी दीप प्रज्वलन सह उद्घाटन केलनि। मंच संचालन श्री अजीत झा आजादजी केलनि आ गोष्ठीक अध्यक्षता श्री रमानन्द झा रमणजी केलनि। एहि अवसरपर जीवकान्त जीक पोथी 'एकहि पच्छ इजोर'क लोकार्पण अजीत आजादक माध्यमसँ अरविन्द ठाकुर जीक द्वारा भेल।
कुल २१गोट नव-पुरान कथाकार अपन-अपन नूतन कथा वा लघुकथाक पाठ केलनि। जे एहि तरहेँ अछि- रंजीत कुमार खाँ राही- (फाेंक), रजनीश कुमार तिवारी- (गप्पी), अरविन्द कुमार ठाकुर- (युटोपिया), अजीत आजाद- (रोग), पंकज सत्यम्- (तर्दनकृवा घुमैत पिबैत), महाकान्त ठाकुर- (शिक्षाक प्रयोजन), चौधरी जयंत तुलसी- (धीपल फाढ़), आशीष चमन- (निष्कर्ष), राजाराम सिंह राठौर- (राखीक रंग फीका), विजय महापात्रा- (मोन किएक पाड़लेँ), जगदीश प्रसाद मंडल- (दोहरी मारि), दुर्गानन्द मंडल- (लबकी कनियाँ), कपिलेश्वर राउत- (किसानक पुजी), मनोज कुमार मंडल- (बेमेल विआह), रामबिलास साहु- (गामक गाछी), बेचन ठाकुर- (अनैतिक विआह), संजय कुमार मंडल- (सिनेह), अकलेश मंडल- (टिटनेस), मुकेश मंडल- (लोभक फल), लक्ष्मी दास- (बुड़िबकक बुड़िबक) आ उमेश मंडल- (युगक खेल आ आधा भगवान)क पाठ केलनि।
प्रो. सचिन्द्र महतो, शैलेन्द्र शैली, महेन्द्र, किशलय कृष्ण, अरविन्द्र ठाकुर पठित कथापर समीक्षा केलनि। ओना तुलसी जयंत चौधरी, राजाराम सिंह राठौर, जगदीश प्रसाद मंडल, महाकान्त ठाकुर, दुर्गानन्द मंडल, आशीष चमन, विजय महापात्रा इत्यादि सेहो किछु कथापर अपन टिप्पणी केलनि।
श्री अजीत कुमार झा आजाद मंच संचालनक संग-संग पठित कथा सभपर आ कएल समीक्षापर अपन किछु विचार माने टिप्पणी करैत रहला, तहिना संयोजक श्री अरविन्द ठाकुरजी सेहो विशेष बात रखलनि जेकर कछु विचारणीय अंश निम्नांकित अछि-
भोजनक वादक समए छल। उमेश मंडल, कपिलेश्वर राउत, अकलेश मंडल, दुर्गानन्द मंडल, लक्ष्मी दास, रामविलास साहु, मनोज कुमार मंडल, बेचन ठाकुरक कथा पाठ भऽ गेल छल। प्राय: एकसँ दू पालीमे। समीक्षक लोकनि हिनकर सबहक कथापर बाजि चूकल छलाह। जाहिमे उमेश मंडलक अाधा भगवान कथापर श्री शैलेन्द्र शैल, अरविन्द ठाकुर राजाराम सिंह राठौर आ तुलसी जयंत चौधरी, कर्मवादी कथाक रूपमे समीक्षा केलनि। जेकर पुन: एकबेर दोहरबैत संचालक श्री अजीत आजाद जी बजै छथि- “उमेश मंडलक कथा आधा भगवान भाग्यवादीसँ कर्मवादी दिशि लऽ जाइत अछि। वास्तवमे ई कथा किसानी जिनगीक लेल नीक प्रयास मानल।”
अकलेश मंडलक कथा टिटनेस आ दुर्गानन्द मंडलक कथा लबकी कनियाँ'पर श्री अरविन्द ठाकुर बजै छथि- “लबकी कनियाँ कथा मंडलजी बला सुनलहुँ ठीके शैलेन्द्र शैलजी कहलथिहेँ जे ई कथा विषए-वस्तुक खियालसँ ओहिना लगैत अछि जेना राजश्री प्रोजेक्टक सिनेमा चलि रहल हुअए। अकलेश मंडलक कथा टिटनेसपर हम एतबए कहब जे ई कोनाे हेल्थ मेग्जिनमे छपैत तँ उत्तम। हमरा लगैए जे आइ मैथिली साहित्यक चौराहापर किछु ओहन आदमीक उपस्थिति भऽ रहल अछि जे देखबा, सुनबा आ विचार करबा योग्य अछि। आइ बेरमा कथा गोष्ठीकेँ लेल जाए। जेकर संयोजक जगदीश प्रसाद मंडल, मंच संचालक अशोक कुमार मेहता आ अध्यक्ष तारानन्द वियोगी रहथि। तँ हम कहलौं जे ई जे पौतीमे बन्द मैथिलीक दुर्दशा छल ओ आब फूटि बहराएलहेँ। एकरा अहाँ कि कहि सकै छिऐ? आइ साहित्यिक मंचपर टाल ठाेकि कऽ ओ सभ चुनौती बुझू दऽ रहला छथि जे कहियो खबास होइत छलाह। एकरा अन्यथा नहि लेल जाए। जे सत्य छै ओ सोझाँ राखलौं अछि। जगदीश प्रसाद मंडल जीक कथा-उपन्यास जखन हमरा सभ पढ़ै छी तँ जेना लगैए जे एकटा नव दुनियाँमे प्रवेश पौलहुँ अछि। एकदमसँ ओहेन दुनियाँ जै दुनियाँक कल्पनो ने बुझू भेल छल। जहिना विषए-वस्तु तहिना शब्द-संयोजन तहिना दृष्टिकोण....। तँ आब अहाँ सभ ई बुझियौ जे जगदीश मंडलजी एकटा एहेन रेखा खिंचि देलनि। जेकरा धियानमे राखि कऽ अहाँ कथा लिखी तँ उत्तम। आइ जै वर्गसँ अहाँ सभ आबि रहल छी ओइ वर्गमे माने किसानी जिनगीक अनेकानेक विषए-वस्तुक चर्च मंडलजी केलनि अछि। ओकरा धियानमे राखि अहाँ सभ आगाँ लिखी।”
अरविन्द ठाकुरजीक वक्तव्यक बाद माइक लैत अजीत आजादजी बजै छथि- “अरविन्द बाबू ठिके कहै छथि। हिनका बातकेँ हम समर्थन करैत छिअनि। अहुँ सभ कथा गोष्ठीमे अबै छी पहिने तँ जगदीश मंडल एलथि बादमे अहाँ सभकेँ सेहो अनलाह आ अबै छी। जगदीश मंडल आ उमेश मंडलजीकेँ आब हम सभ दूरेसँ चिन्है छिअनि। लेकिन अहाँ सभ ऐ बातकेँ बुझियौ जे कथा कोना लिखा रहलैहेँ। अबै छी, कथा पढ़ै छी, जाइ छी। बड़ नीक मुदा ई बुझियौ जे जै वर्गक अहाँ सभ लोक छी मतलब किसान वर्ग जे आधार भेलै। कृषि आधार छिऐ कि नहि छिऐ? तँ ओइमे जे बात सभ छै, जटीलता सभ छै ओकरा अहाँ सभ नै लिखबै तँ के लिखताह...? तँ ई कहलौं जे एम्हर-ओम्हर नै लिखि ओ सभ लिखल जाए। जैमे एकटा बड़का रेखा, कहबे केलथिहेँ अरविन्द बाबू जे जगदीश मंडल द्वारा खिचि देल गेलहेँ। जँ एकरा नै धियान राखब तँ गोष्ठिमे एनाइ-गेनाइ बुझू नीक नहि। ओना ऐ गोष्ठिसँ बाहरो निकालल जाइ छै।” ई गप्प अध्यक्ष महोदय दिशि तकैत आ मुड़ी डोलबैत अजीत जी अगाँ बजै छथि- “आब एकटा खिस्सा सुनबै छी- यंत्रनाथ मिश्रकेँ गोष्ठीसँ निकालल गेलन्हि, की यौ.....? आश्चर्य लागत जे गेट आउट कहि देल गेलन्हि माने गेटसँ बाहर कऽ देल गेलन्हि।”
वातावरणमे खटमिट्ठी बुझू पसरि गेल। एत्ते बात बजबाक प्रयोजनपर सभकेँ सब तरहक चिन्तन-मनन हुअए लागल। दू-चारि मिनटक लेल शान्त...। एकदम्म शान्ति, सन्नाटा। किछु लोक एक-दोसराक मुँह दिशि तकैत। आ किछु लोक गोष्ठिक गार्जियन श्री रमानन्द झा रमणजी दिशि गोरसपट टकधियान लगेने। मुदा जे किछु....।
आगाँ उमेश मंडल (माने हम) हमर नामक चर्च संचालक महोदय पहिनहि उद्वोधित कऽ चूकल छलाह जे एहि पालीक पठित कथापर हमहुँ किछु टिप्पणी करबै। हम प्राय: छुब्ध रही जे ई कोन समीक्षा भेल। एहि तरहक समीक्षासँ नवाङकुरपर आखिर की प्रभाव पड़तनि। खएर जे से हम आगू जा माइक हाथमे लैत बजलहुँ- “जहिना पठित पालीपर समीक्षाक बहाने अन्यान्न विषए-वस्तुपर गप-सप्प राखल तहिना हमहुँ किछु बात राखि रहल छी। सभसँ पहिने हम ओइ कथाकार सभकेँ कहि देबऽ चाहैत छियनि जे पहिल या दोसर कथा लऽ कऽ उपस्थित भेलहुँ आ कथा पाठ केलौं। सबहक कथामे यथार्थ अछि, सुन्नर अछि, कथ्य, शिल्प, भाषा, शैली सभ किछु उत्तम। एक्को पैसा उदास हेबाक प्रयोजन नहि। दोसर गप्प जे अपने सभ एहि बातकेँ बुझल जाए जे जहिना भोजक पाँतिमे बैसल पंचक आगाँ पहिल खेपमे परसल व्यंजनपर कोनो तरहक टिका-तिरस्कारक व्यवहार नहि कएल जाइत हँ, दोसर-तेसर बेर माने परसन लेबाकाल ई जरूर धियान राखल जाइत जे की नीक आ की बेजाए....। तेसर बात अपने सभक द्वारा नव लोककेँ कहल गेलन्हिहेँ जे एना नै ओना आकि ओना नै एना लिखू। कृषि विकासक बात लिखू आ से ई के लिखता अहीं सभ ने लिखबै। ठीक बात मुदा इंजिनियर डाॅक्टरक पढ़ाइ करैबलाक भरमार लागल अछि आनो-आन क्षेत्रमे जिनका पढ़ाइ-लिखाइक सुविधा पर्याप्त छन्हि नम्बर लगौने छथि। लेकिन कृषि-कार्यक पढ़ाइ हेतू किएक ओ सभ विमुख भेल छथि। ई गप्प आ समस्याकेँ के लिखताह? ऐ पर कथा किएक नै लिखल जाइत अछि। ऐ पर अहुँ सभ विचार करू।” अपन बातपर विराम लगा हम माइक संचालक महोदयकेँ हाथमे दैत यथास्थान जा बैस रहलहुँ। गोष्ठिमे बैसल सभ कथाकार आ समीक्षकक मनमे जेना समीक्षाक नव-नव बिम्व नॉचए लगलनि। अध्यक्ष महोदय सेहो उठि कऽ बैस रहला।
अध्यक्ष महोदय दिशि देखैत संचालक एक बेर पुन: अपन बात स्पष्ट करैत बजलाह- “देखियौ हमर कहब छल जे अहाँ सभ एत्ते दूरसँ एलौं जेबा-एबामे बड़ कठिनाइ होइ छै। हमर कहबाक भाव रहए जे जहिना जगदीश बाबू लिखै छथि ओ जे रेखा खिचलन्हिहेँ ओकरा धियानमे राखि.....। अहाँसँ साहित्यमे कि लाभ भेलै। मतलब कि देलिऐ। से जौं नइ तखन तँ.....।”
ऐ बातपर हम पुन: बाजलहुँ- “अजीत बाबू अपने साहित्यिक लाभक बात एहि नव लोकमे तकै छी। मुदा एकबेर अपना दिशि देखल जाए जे स्वयं थोड़ेखन पहिने बजलाैंहेँ जे सत्तरह सालसँ लगातार अहाँ सभ कथा गोष्ठिमे भाग लेलहुँ। आइसँ नै सत्तरह सालसँ। मुदा कएकटा कथा संग्रह देलिऐहेँ?”
अजीत आजाद- “अहीं जकाँ हमरा प्रकाशन नै ने भेट गेल जे......। अक्खैन कियो भार लेथि हम परसू तक तीनटा कथा संग्रह थम्हा दैत छियनि। लेकिन ओहोसँ पैघ बात जे कै स्तरक कथा सभ हमर विभिन्न पत्र-पत्रिकामे छपि चूकल अछि आ कहियासँ तेकरो तँ देखबै।”
अगल-बगलसँ पाँच-छह गोटा एक्केबेर- हँ, से तँ ठीके बात। हँ से तँ ठीके बात। बजैत अागाँक कथा पाठ लेल अग्रसरक विचार प्रकट केलाह। माहौलमे परिवर्त्तन भेल। लगभग चारिटा कथापाठ फेर भेल आ तेकर संक्षिप्त समीक्षा सेहो कएल गेल। तात् भिनसर ६बाजि गेल। श्री रमानन्द झा रमण अपन अध्यक्षीय उद्वोधनमे उपरोक्त झजमझ (मतांतर)पर एक्को शब्द नै बजलाह।
अगिला कथा गोष्ठिक आयोजन श्री विजय महापात्रा जीक संयोजकत्वमे हुनके मातृभूमि महिषी मे कएल जाएत ताहि लेल सुपौलक संयोजक श्री अरविन्द ठाकुरजीक द्वारा दीप आ उपस्थिति पुस्तिका भावी संयोजककेँ समर्पित करैत गोष्ठिक समापन कएल गेल। (साभार विदेह www.videha.co.in)
सुपौलक कथा गोष्ठी : ४ दिसम्बर २०१०
व्यापार संघ भवन सुपौलमे दिनांक ४.१२.२०१०केँ सगर राति दीप जरय'क ७२म कथा गोष्ठी श्री अरविन्द कुमार ठाकुरक संयोजकत्वमे बिपल्व फाउण्डेसन आ प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित कएल गेल। सांझ ६ बजे प्रो. सचिन्द्र महतोजी दीप प्रज्वलन सह उद्घाटन केलनि। मंच संचालन श्री अजीत झा आजादजी केलनि आ गोष्ठीक अध्यक्षता श्री रमानन्द झा रमणजी केलनि। एहि अवसरपर जीवकान्त जीक पोथी 'एकहि पच्छ इजोर'क लोकार्पण अजीत आजादक माध्यमसँ अरविन्द ठाकुर जीक द्वारा भेल।
कुल २१गोट नव-पुरान कथाकार अपन-अपन नूतन कथा वा लघुकथाक पाठ केलनि। जे एहि तरहेँ अछि- रंजीत कुमार खाँ राही- (फाेंक), रजनीश कुमार तिवारी- (गप्पी), अरविन्द कुमार ठाकुर- (युटोपिया), अजीत आजाद- (रोग), पंकज सत्यम्- (तर्दनकृवा घुमैत पिबैत), महाकान्त ठाकुर- (शिक्षाक प्रयोजन), चौधरी जयंत तुलसी- (धीपल फाढ़), आशीष चमन- (निष्कर्ष), राजाराम सिंह राठौर- (राखीक रंग फीका), विजय महापात्रा- (मोन किएक पाड़लेँ), जगदीश प्रसाद मंडल- (दोहरी मारि), दुर्गानन्द मंडल- (लबकी कनियाँ), कपिलेश्वर राउत- (किसानक पुजी), मनोज कुमार मंडल- (बेमेल विआह), रामबिलास साहु- (गामक गाछी), बेचन ठाकुर- (अनैतिक विआह), संजय कुमार मंडल- (सिनेह), अकलेश मंडल- (टिटनेस), मुकेश मंडल- (लोभक फल), लक्ष्मी दास- (बुड़िबकक बुड़िबक) आ उमेश मंडल- (युगक खेल आ आधा भगवान)क पाठ केलनि।
प्रो. सचिन्द्र महतो, शैलेन्द्र शैली, महेन्द्र, किशलय कृष्ण, अरविन्द्र ठाकुर पठित कथापर समीक्षा केलनि। ओना तुलसी जयंत चौधरी, राजाराम सिंह राठौर, जगदीश प्रसाद मंडल, महाकान्त ठाकुर, दुर्गानन्द मंडल, आशीष चमन, विजय महापात्रा इत्यादि सेहो किछु कथापर अपन टिप्पणी केलनि।
श्री अजीत कुमार झा आजाद मंच संचालनक संग-संग पठित कथा सभपर आ कएल समीक्षापर अपन किछु विचार माने टिप्पणी करैत रहला, तहिना संयोजक श्री अरविन्द ठाकुरजी सेहो विशेष बात रखलनि जेकर कछु विचारणीय अंश निम्नांकित अछि-
भोजनक वादक समए छल। उमेश मंडल, कपिलेश्वर राउत, अकलेश मंडल, दुर्गानन्द मंडल, लक्ष्मी दास, रामविलास साहु, मनोज कुमार मंडल, बेचन ठाकुरक कथा पाठ भऽ गेल छल। प्राय: एकसँ दू पालीमे। समीक्षक लोकनि हिनकर सबहक कथापर बाजि चूकल छलाह। जाहिमे उमेश मंडलक अाधा भगवान कथापर श्री शैलेन्द्र शैल, अरविन्द ठाकुर राजाराम सिंह राठौर आ तुलसी जयंत चौधरी, कर्मवादी कथाक रूपमे समीक्षा केलनि। जेकर पुन: एकबेर दोहरबैत संचालक श्री अजीत आजाद जी बजै छथि- “उमेश मंडलक कथा आधा भगवान भाग्यवादीसँ कर्मवादी दिशि लऽ जाइत अछि। वास्तवमे ई कथा किसानी जिनगीक लेल नीक प्रयास मानल।”
अकलेश मंडलक कथा टिटनेस आ दुर्गानन्द मंडलक कथा लबकी कनियाँ'पर श्री अरविन्द ठाकुर बजै छथि- “लबकी कनियाँ कथा मंडलजी बला सुनलहुँ ठीके शैलेन्द्र शैलजी कहलथिहेँ जे ई कथा विषए-वस्तुक खियालसँ ओहिना लगैत अछि जेना राजश्री प्रोजेक्टक सिनेमा चलि रहल हुअए। अकलेश मंडलक कथा टिटनेसपर हम एतबए कहब जे ई कोनाे हेल्थ मेग्जिनमे छपैत तँ उत्तम। हमरा लगैए जे आइ मैथिली साहित्यक चौराहापर किछु ओहन आदमीक उपस्थिति भऽ रहल अछि जे देखबा, सुनबा आ विचार करबा योग्य अछि। आइ बेरमा कथा गोष्ठीकेँ लेल जाए। जेकर संयोजक जगदीश प्रसाद मंडल, मंच संचालक अशोक कुमार मेहता आ अध्यक्ष तारानन्द वियोगी रहथि। तँ हम कहलौं जे ई जे पौतीमे बन्द मैथिलीक दुर्दशा छल ओ आब फूटि बहराएलहेँ। एकरा अहाँ कि कहि सकै छिऐ? आइ साहित्यिक मंचपर टाल ठाेकि कऽ ओ सभ चुनौती बुझू दऽ रहला छथि जे कहियो खबास होइत छलाह। एकरा अन्यथा नहि लेल जाए। जे सत्य छै ओ सोझाँ राखलौं अछि। जगदीश प्रसाद मंडल जीक कथा-उपन्यास जखन हमरा सभ पढ़ै छी तँ जेना लगैए जे एकटा नव दुनियाँमे प्रवेश पौलहुँ अछि। एकदमसँ ओहेन दुनियाँ जै दुनियाँक कल्पनो ने बुझू भेल छल। जहिना विषए-वस्तु तहिना शब्द-संयोजन तहिना दृष्टिकोण....। तँ आब अहाँ सभ ई बुझियौ जे जगदीश मंडलजी एकटा एहेन रेखा खिंचि देलनि। जेकरा धियानमे राखि कऽ अहाँ कथा लिखी तँ उत्तम। आइ जै वर्गसँ अहाँ सभ आबि रहल छी ओइ वर्गमे माने किसानी जिनगीक अनेकानेक विषए-वस्तुक चर्च मंडलजी केलनि अछि। ओकरा धियानमे राखि अहाँ सभ आगाँ लिखी।”
अरविन्द ठाकुरजीक वक्तव्यक बाद माइक लैत अजीत आजादजी बजै छथि- “अरविन्द बाबू ठिके कहै छथि। हिनका बातकेँ हम समर्थन करैत छिअनि। अहुँ सभ कथा गोष्ठीमे अबै छी पहिने तँ जगदीश मंडल एलथि बादमे अहाँ सभकेँ सेहो अनलाह आ अबै छी। जगदीश मंडल आ उमेश मंडलजीकेँ आब हम सभ दूरेसँ चिन्है छिअनि। लेकिन अहाँ सभ ऐ बातकेँ बुझियौ जे कथा कोना लिखा रहलैहेँ। अबै छी, कथा पढ़ै छी, जाइ छी। बड़ नीक मुदा ई बुझियौ जे जै वर्गक अहाँ सभ लोक छी मतलब किसान वर्ग जे आधार भेलै। कृषि आधार छिऐ कि नहि छिऐ? तँ ओइमे जे बात सभ छै, जटीलता सभ छै ओकरा अहाँ सभ नै लिखबै तँ के लिखताह...? तँ ई कहलौं जे एम्हर-ओम्हर नै लिखि ओ सभ लिखल जाए। जैमे एकटा बड़का रेखा, कहबे केलथिहेँ अरविन्द बाबू जे जगदीश मंडल द्वारा खिचि देल गेलहेँ। जँ एकरा नै धियान राखब तँ गोष्ठिमे एनाइ-गेनाइ बुझू नीक नहि। ओना ऐ गोष्ठिसँ बाहरो निकालल जाइ छै।” ई गप्प अध्यक्ष महोदय दिशि तकैत आ मुड़ी डोलबैत अजीत जी अगाँ बजै छथि- “आब एकटा खिस्सा सुनबै छी- यंत्रनाथ मिश्रकेँ गोष्ठीसँ निकालल गेलन्हि, की यौ.....? आश्चर्य लागत जे गेट आउट कहि देल गेलन्हि माने गेटसँ बाहर कऽ देल गेलन्हि।”
वातावरणमे खटमिट्ठी बुझू पसरि गेल। एत्ते बात बजबाक प्रयोजनपर सभकेँ सब तरहक चिन्तन-मनन हुअए लागल। दू-चारि मिनटक लेल शान्त...। एकदम्म शान्ति, सन्नाटा। किछु लोक एक-दोसराक मुँह दिशि तकैत। आ किछु लोक गोष्ठिक गार्जियन श्री रमानन्द झा रमणजी दिशि गोरसपट टकधियान लगेने। मुदा जे किछु....।
आगाँ उमेश मंडल (माने हम) हमर नामक चर्च संचालक महोदय पहिनहि उद्वोधित कऽ चूकल छलाह जे एहि पालीक पठित कथापर हमहुँ किछु टिप्पणी करबै। हम प्राय: छुब्ध रही जे ई कोन समीक्षा भेल। एहि तरहक समीक्षासँ नवाङकुरपर आखिर की प्रभाव पड़तनि। खएर जे से हम आगू जा माइक हाथमे लैत बजलहुँ- “जहिना पठित पालीपर समीक्षाक बहाने अन्यान्न विषए-वस्तुपर गप-सप्प राखल तहिना हमहुँ किछु बात राखि रहल छी। सभसँ पहिने हम ओइ कथाकार सभकेँ कहि देबऽ चाहैत छियनि जे पहिल या दोसर कथा लऽ कऽ उपस्थित भेलहुँ आ कथा पाठ केलौं। सबहक कथामे यथार्थ अछि, सुन्नर अछि, कथ्य, शिल्प, भाषा, शैली सभ किछु उत्तम। एक्को पैसा उदास हेबाक प्रयोजन नहि। दोसर गप्प जे अपने सभ एहि बातकेँ बुझल जाए जे जहिना भोजक पाँतिमे बैसल पंचक आगाँ पहिल खेपमे परसल व्यंजनपर कोनो तरहक टिका-तिरस्कारक व्यवहार नहि कएल जाइत हँ, दोसर-तेसर बेर माने परसन लेबाकाल ई जरूर धियान राखल जाइत जे की नीक आ की बेजाए....। तेसर बात अपने सभक द्वारा नव लोककेँ कहल गेलन्हिहेँ जे एना नै ओना आकि ओना नै एना लिखू। कृषि विकासक बात लिखू आ से ई के लिखता अहीं सभ ने लिखबै। ठीक बात मुदा इंजिनियर डाॅक्टरक पढ़ाइ करैबलाक भरमार लागल अछि आनो-आन क्षेत्रमे जिनका पढ़ाइ-लिखाइक सुविधा पर्याप्त छन्हि नम्बर लगौने छथि। लेकिन कृषि-कार्यक पढ़ाइ हेतू किएक ओ सभ विमुख भेल छथि। ई गप्प आ समस्याकेँ के लिखताह? ऐ पर कथा किएक नै लिखल जाइत अछि। ऐ पर अहुँ सभ विचार करू।” अपन बातपर विराम लगा हम माइक संचालक महोदयकेँ हाथमे दैत यथास्थान जा बैस रहलहुँ। गोष्ठिमे बैसल सभ कथाकार आ समीक्षकक मनमे जेना समीक्षाक नव-नव बिम्व नॉचए लगलनि। अध्यक्ष महोदय सेहो उठि कऽ बैस रहला।
अध्यक्ष महोदय दिशि देखैत संचालक एक बेर पुन: अपन बात स्पष्ट करैत बजलाह- “देखियौ हमर कहब छल जे अहाँ सभ एत्ते दूरसँ एलौं जेबा-एबामे बड़ कठिनाइ होइ छै। हमर कहबाक भाव रहए जे जहिना जगदीश बाबू लिखै छथि ओ जे रेखा खिचलन्हिहेँ ओकरा धियानमे राखि.....। अहाँसँ साहित्यमे कि लाभ भेलै। मतलब कि देलिऐ। से जौं नइ तखन तँ.....।”
ऐ बातपर हम पुन: बाजलहुँ- “अजीत बाबू अपने साहित्यिक लाभक बात एहि नव लोकमे तकै छी। मुदा एकबेर अपना दिशि देखल जाए जे स्वयं थोड़ेखन पहिने बजलाैंहेँ जे सत्तरह सालसँ लगातार अहाँ सभ कथा गोष्ठिमे भाग लेलहुँ। आइसँ नै सत्तरह सालसँ। मुदा कएकटा कथा संग्रह देलिऐहेँ?”
अजीत आजाद- “अहीं जकाँ हमरा प्रकाशन नै ने भेट गेल जे......। अक्खैन कियो भार लेथि हम परसू तक तीनटा कथा संग्रह थम्हा दैत छियनि। लेकिन ओहोसँ पैघ बात जे कै स्तरक कथा सभ हमर विभिन्न पत्र-पत्रिकामे छपि चूकल अछि आ कहियासँ तेकरो तँ देखबै।”
अगल-बगलसँ पाँच-छह गोटा एक्केबेर- हँ, से तँ ठीके बात। हँ से तँ ठीके बात। बजैत अागाँक कथा पाठ लेल अग्रसरक विचार प्रकट केलाह। माहौलमे परिवर्त्तन भेल। लगभग चारिटा कथापाठ फेर भेल आ तेकर संक्षिप्त समीक्षा सेहो कएल गेल। तात् भिनसर ६बाजि गेल। श्री रमानन्द झा रमण अपन अध्यक्षीय उद्वोधनमे उपरोक्त झजमझ (मतांतर)पर एक्को शब्द नै बजलाह।
अगिला कथा गोष्ठिक आयोजन श्री विजय महापात्रा जीक संयोजकत्वमे हुनके मातृभूमि महिषी मे कएल जाएत ताहि लेल सुपौलक संयोजक श्री अरविन्द ठाकुरजीक द्वारा दीप आ उपस्थिति पुस्तिका भावी संयोजककेँ समर्पित करैत गोष्ठिक समापन कएल गेल। (साभार विदेह www.videha.co.in)
उमेश मंडल सगर राति श्रोता कथा-सागरमे डुबकी लगेलन्हि-
उमेश मंडल
सगर राति श्रोता कथा-सागरमे डुबकी लगेलन्हि-
मधुबनी जिलाक लखनौर प्रखण्डक बेरमा गामक मध्य विद्यालय परिसरमे २ अक्टूबर २०१०केँ मैथिली कथा आन्दोलनकेँ समर्पित ‘सगर राति दीप जरय’क ७१म आयोजन श्री जगदीश प्रसाद मंडलक संयोजकत्वमे कएल गेल। दीप प्रज्वलन सह उद्घाटन श्री उग्र नारायण मिश्र ‘कनक’ संध्या ६:३० बजे केलनि। तत्पश्चात डॉ. रमानन्द झा रमण, बेरमाक स्व. विजय नाथ ठाकुर (चेतना समितिसँ जुड़ल रहथि।) चर्चा करैत गामक (बेरमाक) साहित्यक इतिहासक चर्चा केलनि।
गोष्ठिक सुभारम्भ स्वागत गीतसँ, सपत्नी संजीव कुमार ‘समा’, अजय कुमार कर्ण, बेचन ठाकुर, आ जागेश्वर प्रसाद राउत जीक द्वारा भेल। तत्पश्चात ‘मंगला चरण’क उच्चारण शिवकुमार मिश्र जी केलनि।
गोष्ठिक अध्यक्षता डॉ. तारानन्द वियोगी आ संचालन श्री अशोक कुमार मेहता जी केलनि। कार्यक्रमकेँ आगाँ बढ़ाओल गेल पोथीक लोकार्पणसँ जेकर सूचि एहि तरहेँ अछि-
१ प्रलय रहस्य (कविता संग्रह) लेखक- तारानन्द वियोगी, लोकार्पणकर्ता- डॉ. रमानन्द झा रमण,
२ जीबन-मरण (उपन्यास) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- श्री कुमार सहाएब आ श्री रमाकान्त राय ‘रमा’,
३ तरेगन (बाल प्रेरक कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- डॉ. रमानन्द झा ‘रमण’ आ डॉ. फूलचन्द्र मिश्र ‘रमण’,
४ जीवन-संघर्ष (उपन्यास) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- श्री अशोक (पटना) आ श्री उग्रनारायण मिश्र ‘कनक’,
५ सी.डी. तिरहुत्ता (विदेह ई पत्रिका, ६०म अंक धरि) संपादक गजेन्द्र ठाकुर, लो.- डॉ. योगानन्द झा, श्री उग्रनारायण मिश्र ‘कनक’ आ श्री नारायण जी,
६ सी.डी. देवनागरी (विदेह ई पत्रिका, ६०म अंक धरि) सं. गजेन्द्र ठाकुर, लो.- डॉ. तारानन्द वियोगी, डॉ. मंजर सुलेमान आ श्री अजीत आजाद,
७ निबंध-तरंग (निबंध-संग्रह) ले. श्रीपति सिंह, लो.- डॉ. रमानन्द झा ‘रमण’
८ अलका (कथा संग्रह) ले. कमलकान्त झा, लो.- डॉ. धनाकर ठाकुर आ डॉ. खुशीलाल झा।
छह गोट पोथी आ दू गोट सी.डी.क लोकार्पणक पश्चात कथा पाठ आ तेकर समीक्षा/समालोचना प्रारम्भ भेल। चारि-पाँच कथा/लघुकथाक पाठ आ तेकर समीक्षा चारि-पाँच समीक्षकक एक पालीमे होइत रहल। एहि तरहेँ भरि रातिमे सात पालीक सुन्दर प्रदर्शन भेल। नव पुरान कथाकारक अलावे बाल-कथाकार सेहो अपन नूतन कथाक पाठ केलनि। कथा आ कथाक समीक्षा संपूर्ण श्रोताकेँ आकर्षित कएलकनि। ताहिपर श्रोताक टिप्पणी सेहो आएल। नव-कथाकारकेँ श्री अशोक, डॉ. फूलचन्द्र मिश्र रमण आ डाँ रमानन्द झा रमणक संग-संग आरो समीक्षक आपन खुशी व्यक्त केलनि आ दिशा निर्देश सेहो देलनि। अध्यक्षीय भाषणमे डाँ तारानन्द वियोगी सेहो बेरमाक नव-कथाकारक संग-संग नव दृष्टिकोणक कथाकारक कथापर साकारात्मक विचार रखलनि।
श्रोताक मनोयोग श्रवणसँ प्रभावित भऽ कथाकार लोकनिक उत्साह भरि राति बनल रहल। उपरोक्त वर्णित कथाकार आ समीक्षकक अलावे कमलेश झा, उमेश नारायण कर्ण, शंकर झा, बुचरू पासवान, महेन्द्र नारायण राम, विनय विश्व वन्धु, रघुनाथ मुखिया, आशीष चमन, पंकज सत्यम्, ऋृषि बशिष्ठ, राजदेव मंडल, िवनय मोहन ‘जगदीश’ इत्यादिक गरिमाय उपस्थित छल रहए।
दर्जनोसँ ऊपर श्रोताक टिप्पणीमे- रमण किशोर झा, शशिकान्त झा, विरेन्द्र यादव, लाल कुमार राय, घुरन राम, मो. इब्राहिम, दीपक कुमार झा, राम विलास साहु आ राम प्रवेश मंडलक महत्वपूर्ण रहल। श्रोताक अनेको विषए-वस्तुपर टिप्पणीक संग-संग एकटा महत्वपूर्ण टिप्पणी कपिलेश्वर राउत जीक द्वारा- ‘दर्जनक-दर्जन कथा पाठ भेल नीक लागल मुदा हम सभ किसान छी किसानी जिनगीक (खेती-बाड़ी) बात-चीत/विषए-वस्तुक चर्च कथामे नहि भऽ पावि रहल अछि।’
एहि टिप्पणीपर श्री अशोक अपन विचार व्यक्त करैत कहलनि- ‘खेती-बाड़ी, किसानी जिनगी आ गाम-घरक चर्चा वास्तवमे कम कएल गेल अछि, ने सिर्फ मैथिली साहित्यमे वरण् हिन्दी साहित्यमे सेहो एकर अभाव माने जतेक अबैक चाही ओते नहि आएल अछि।
भिनसर छह बजे एहि ७१ गोष्ठीकेँ अन्त करैत श्री अरविन्द ठाकुर (सुपौल) अग्रिम कथा गोष्ठी ७२म आयोजन हेतु दीप आ उपस्थिति पुस्तिका लेलनि। स्पष्ट अछि जे अगिला कथा गोष्ठी दिसम्बर मासमे सुपौलमे आयोजित हएत।(साभार विदेह www.videha.co.in)
सगर राति श्रोता कथा-सागरमे डुबकी लगेलन्हि-
मधुबनी जिलाक लखनौर प्रखण्डक बेरमा गामक मध्य विद्यालय परिसरमे २ अक्टूबर २०१०केँ मैथिली कथा आन्दोलनकेँ समर्पित ‘सगर राति दीप जरय’क ७१म आयोजन श्री जगदीश प्रसाद मंडलक संयोजकत्वमे कएल गेल। दीप प्रज्वलन सह उद्घाटन श्री उग्र नारायण मिश्र ‘कनक’ संध्या ६:३० बजे केलनि। तत्पश्चात डॉ. रमानन्द झा रमण, बेरमाक स्व. विजय नाथ ठाकुर (चेतना समितिसँ जुड़ल रहथि।) चर्चा करैत गामक (बेरमाक) साहित्यक इतिहासक चर्चा केलनि।
गोष्ठिक सुभारम्भ स्वागत गीतसँ, सपत्नी संजीव कुमार ‘समा’, अजय कुमार कर्ण, बेचन ठाकुर, आ जागेश्वर प्रसाद राउत जीक द्वारा भेल। तत्पश्चात ‘मंगला चरण’क उच्चारण शिवकुमार मिश्र जी केलनि।
गोष्ठिक अध्यक्षता डॉ. तारानन्द वियोगी आ संचालन श्री अशोक कुमार मेहता जी केलनि। कार्यक्रमकेँ आगाँ बढ़ाओल गेल पोथीक लोकार्पणसँ जेकर सूचि एहि तरहेँ अछि-
१ प्रलय रहस्य (कविता संग्रह) लेखक- तारानन्द वियोगी, लोकार्पणकर्ता- डॉ. रमानन्द झा रमण,
२ जीबन-मरण (उपन्यास) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- श्री कुमार सहाएब आ श्री रमाकान्त राय ‘रमा’,
३ तरेगन (बाल प्रेरक कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- डॉ. रमानन्द झा ‘रमण’ आ डॉ. फूलचन्द्र मिश्र ‘रमण’,
४ जीवन-संघर्ष (उपन्यास) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- श्री अशोक (पटना) आ श्री उग्रनारायण मिश्र ‘कनक’,
५ सी.डी. तिरहुत्ता (विदेह ई पत्रिका, ६०म अंक धरि) संपादक गजेन्द्र ठाकुर, लो.- डॉ. योगानन्द झा, श्री उग्रनारायण मिश्र ‘कनक’ आ श्री नारायण जी,
६ सी.डी. देवनागरी (विदेह ई पत्रिका, ६०म अंक धरि) सं. गजेन्द्र ठाकुर, लो.- डॉ. तारानन्द वियोगी, डॉ. मंजर सुलेमान आ श्री अजीत आजाद,
७ निबंध-तरंग (निबंध-संग्रह) ले. श्रीपति सिंह, लो.- डॉ. रमानन्द झा ‘रमण’
८ अलका (कथा संग्रह) ले. कमलकान्त झा, लो.- डॉ. धनाकर ठाकुर आ डॉ. खुशीलाल झा।
छह गोट पोथी आ दू गोट सी.डी.क लोकार्पणक पश्चात कथा पाठ आ तेकर समीक्षा/समालोचना प्रारम्भ भेल। चारि-पाँच कथा/लघुकथाक पाठ आ तेकर समीक्षा चारि-पाँच समीक्षकक एक पालीमे होइत रहल। एहि तरहेँ भरि रातिमे सात पालीक सुन्दर प्रदर्शन भेल। नव पुरान कथाकारक अलावे बाल-कथाकार सेहो अपन नूतन कथाक पाठ केलनि। कथा आ कथाक समीक्षा संपूर्ण श्रोताकेँ आकर्षित कएलकनि। ताहिपर श्रोताक टिप्पणी सेहो आएल। नव-कथाकारकेँ श्री अशोक, डॉ. फूलचन्द्र मिश्र रमण आ डाँ रमानन्द झा रमणक संग-संग आरो समीक्षक आपन खुशी व्यक्त केलनि आ दिशा निर्देश सेहो देलनि। अध्यक्षीय भाषणमे डाँ तारानन्द वियोगी सेहो बेरमाक नव-कथाकारक संग-संग नव दृष्टिकोणक कथाकारक कथापर साकारात्मक विचार रखलनि।
श्रोताक मनोयोग श्रवणसँ प्रभावित भऽ कथाकार लोकनिक उत्साह भरि राति बनल रहल। उपरोक्त वर्णित कथाकार आ समीक्षकक अलावे कमलेश झा, उमेश नारायण कर्ण, शंकर झा, बुचरू पासवान, महेन्द्र नारायण राम, विनय विश्व वन्धु, रघुनाथ मुखिया, आशीष चमन, पंकज सत्यम्, ऋृषि बशिष्ठ, राजदेव मंडल, िवनय मोहन ‘जगदीश’ इत्यादिक गरिमाय उपस्थित छल रहए।
दर्जनोसँ ऊपर श्रोताक टिप्पणीमे- रमण किशोर झा, शशिकान्त झा, विरेन्द्र यादव, लाल कुमार राय, घुरन राम, मो. इब्राहिम, दीपक कुमार झा, राम विलास साहु आ राम प्रवेश मंडलक महत्वपूर्ण रहल। श्रोताक अनेको विषए-वस्तुपर टिप्पणीक संग-संग एकटा महत्वपूर्ण टिप्पणी कपिलेश्वर राउत जीक द्वारा- ‘दर्जनक-दर्जन कथा पाठ भेल नीक लागल मुदा हम सभ किसान छी किसानी जिनगीक (खेती-बाड़ी) बात-चीत/विषए-वस्तुक चर्च कथामे नहि भऽ पावि रहल अछि।’
एहि टिप्पणीपर श्री अशोक अपन विचार व्यक्त करैत कहलनि- ‘खेती-बाड़ी, किसानी जिनगी आ गाम-घरक चर्चा वास्तवमे कम कएल गेल अछि, ने सिर्फ मैथिली साहित्यमे वरण् हिन्दी साहित्यमे सेहो एकर अभाव माने जतेक अबैक चाही ओते नहि आएल अछि।
भिनसर छह बजे एहि ७१ गोष्ठीकेँ अन्त करैत श्री अरविन्द ठाकुर (सुपौल) अग्रिम कथा गोष्ठी ७२म आयोजन हेतु दीप आ उपस्थिति पुस्तिका लेलनि। स्पष्ट अछि जे अगिला कथा गोष्ठी दिसम्बर मासमे सुपौलमे आयोजित हएत।(साभार विदेह www.videha.co.in)
उमेश मंडल निर्मलीसँ जनकपुर धाम
उमेश मंडल
निर्मलीसँ जनकपुर धाम
प्राय: बच्चेसँ जनकपुर धाम जेबाक जिज्ञासा छल जे आयोजित कथा गोष्ठी ‘‘सगर राति दीप जरय’’ क 69म खेपमे शामिल भऽ 3 अप्रैल 2010 केँ पूरा भेल। जहिसँ दोहरी खुशी भेटल।
चारिए बजे भोरमे निर्मली टीशनपर पहुँचलहुँ। करीब पॉंच बजे गाड़ी खुजल आ समएसँ सकड़ी टीशनपर उतरलहुँ। सकड़ीसँ जयनगरक मेल नहि रहने मेक्सी पकड़ि मधुबनी गेलहुँ। मधुबनीसँ पुन: मेक्सी पकड़ि कलवाही, नगर कोठी होइत जयनगर गेलौं। तखन ढाइ बजैत रहै। जयनगरसँ जनकपुर लेल नेपाली ट्रेन
तीन बजेमे खुलत से जानकरी भेल। तहि बीच हमसभ भोजन केलौं आ समएसँ अबिब ट्रेनमे बैसि रहलौं।
मैक्सीमे जखन भीड़ आ गुमारसँ परेशान रही तँ मनमे हुअए जे कोनो तरहेँ जयनगर तक पहुँचक अछि। ओइठॉंसँ तँ ट्रेनक यात्रा रहत। मुदा, ट्रेनक नमती आ भीड़ देखि हुअए जे बसे जेकॉं हाल हएत। सएह भेल। मुदा, तइयो मनमे खुशी रहए िकएक तँ दस-बारह गोटाक संगवे रहए जहिसँ यात्रामे कोनो कठिनाइ नहि बुझना गेल, भरि रस्ता गप-सप्प चलैत रहल। नव कथाकारक संग-संग श्री जगदीश प्रसाद मंडल आ श्री राजदेव मंडल सेहो संगमे रहथि, जे हमरा सबहक लेल सौभाग्य छल। गोसॉंइ लुक-झुक करिते छल तावत् गाड़ी जनकपुर धाम पहुँचि गेल।
ट्रेनसँ उतरि हमसभ रामानन्द युवा क्लब जेबाक लेल आगॉं बढ़लौं। िमथिला महोत्सवसँ जनकपुर भरि बाजारमे रमणीय वातावरण छल। जहिसँ चाह-जलपान केनाइ आकि रिक्सासँ गेनाइ सभ कियो िबसरि गेलाह। पएरे सभ बिदा भेलौं। देखैत-सुनैत समए रामानन्द युवा क्लबमे प्रवेश केलौं। दोसर मंजिलपर पएर दइते रही आकि श्री राजाराम सिंह राठौरजी भेंट भऽ गेला। हमरा सभकेँ देखते हाथ पकड़ि बड़ी अहलाद्सँ यथोचित स्थानपर लऽ गेलथि। उपस्थित साहित्यकार लोकनिकेँ देखि हर्ष भेल। दीप जरा गोष्ठिक शुभारम्भ भेल। संयोजक महोदय श्री राजाराम सिंह राठौर सभ व्यवस्था बड़ नीक जेकॉं कएने रहथि। कथा जानकीक नामसँ एकटा बैनर टांगल रहै। आदरणीय रमानन्द झा “रमण”जी पहिनहिसँ उपस्थित रहथि। गोष्ठीक संचालन आदरणीय फूलचन्द्र िमश्रजीकेँ देल गेलनि।
गोष्ठिक शुरूहेँमे दर्जन भरि पोथीक लोकार्पण कएल गेल, जहिमे मौलाइल गाछक फूल (उपन्यास) आ िमथिलाक बेटी (नाटक)- जगदीश प्रसाद मंडल। भाग रौ आ बलचन्द्रा (नाटक)- िवभा रानी। हम पुछैत छी (कविता संग्रह)- विनीत उत्पल। नताशा (कॉंिमक्स)- देवांशु वत्स। अर्चिस (कविता संग्रह)- ज्योति सुनीत चौधरी। नेपथ्य (नाटक संग्रह) आ नैमिकानन (कथा संग्रह)- सम्पादक- रेबती रमण लाल। िमथिला सृजन (पत्रिका) सम्पादक ऋृषि बशिष्ठ। विदेह- कथा 2009-10, प्रबन्ध समालोचना 2009-10 आ विदेह पद्य 2009-10 सम्पादक गजेन्द ठाकुर जीक रहनि।
एहि तरहेँ बारह गोट पोथीक लोर्कापणक शिलशिला करीब घंटा भरिक रहल। फोटोग्राफर सभ फोटो खिचलनि। तहिबीच चाह-जलपान सेहो चलल। रजिस्टरपर सभ कथाकार अपन-अपन उपस्थिति आ कथाक नाम दर्ज केलनि। पहिल कथा श्री सुरेन्द्र नाथ, दोसर श्रीमती िवजेता चौधरी, तेसर िवभूति आनन्द फेर िजज्ञासु जी, जगदीश प्रसाद मंडल, रौशन जनकपुरी, अरविन्द ठाकुर, ऋृषि बशिष्ठ, उमेश मंडल, रघुनाथ मुखिया, महाकान्त ठाकुर, चौधरी जयंत तुलसी, बेचन ठाकुर, कपिलेश्वर राउत, मनोज कुमार मंडल, खड़ा नन्द यादव, राजदेव मंडल, दुर्गानन्द मंडल इत्यादि तीस गोट कथाकार कथा पाठ केलनि। तीन-तीन कथाक पाली होइत छल। एक पालीक पठित कथापर समीक्षा होइत रहए। प्रखर समीक्षक डॉ. रामावतार यादव, डॉ राजेन्द्र िवमल, रौशन जनकपुरी, डॉ रमानन्द झा रमण, श्री हीरेन्द्र कुमार झा, श्री योगानन्द झा, श्री अजीत आजाद आदि अपन दृष्टिकोण दैत समीक्षा रखलखिन। ई शिलशिला राति भरि चलैत रहल। लागि रहल छल जे ई नव कथाकारक लेल ट्रेनिंग काॅलेज सदृश्य अछि।
भिनसर छह बजे गोष्ठिक समापन भेल। अगिला कथा गोष्ठी 70म सगर राति दीप जरय केँ प्रस्ताव श्री योगानन्द झाजी रखलनि। आदरणीय रमानन्द झा रमण जीक संग-संग सभ साहित्यकार लोकनि सहर्ष एकरा स्वीकार केलनि। रजिस्टर आ दीप श्री राजाराम सिंह राठौर जी अगिला कथा उत्पल हेतु श्री योगानन्द झा जीकेँ देलनि। एकबेर सभ खुशी-खुशी थोपड़ी बजेलनि।
अगिला कथा गोष्ठीक स्थान- कविलपुर लहेरियासरय (दरभंगा)
तिथि- 12 जून 2010
संयोजक- श्री योगानन्द झा
कबिलपुर (दरभंगा)
रामानन्द युवा कल्व जनकपुर धाममे ३ अप्रैल २०१० 69म सगर राित दीप जरय- कथा गोष्ठीकेँ उद्दघाटन- डॉ रामावतार यादवकेँ द्वारा कएल गेल। संयोजक श्री राजाराम सिंह राठौर आ रामानन्द युवा कल्व रहथि।
12टा पोथीक विमोचनक कएल भेल
1 मौलाइल गाछक फूल (उपन्यास)
जगदीश प्रसाद मंडल
-- डॉ राजेन्द विमल
--
-- श्री रामनन्द झा ‘‘रमण’’
2 िमथिलाक बेटी (नाटक)
जगदीश प्रसाद मंडल
-- डॉ राजेन्द्र विमल
-- श्री रामानन्द झा ‘‘रमण’’
--
3 विदेह पद्द 2009-10
-- श्री हीरेन्द्र कुमार झा
--
-- श्री रामानन्द झा ‘‘रमण’’
4 िवदेह प्रवन्ध-समालोचना 2009-10
-- डॉ विभूति आनन्द
--
--
5 विदेह कथा 2009-10
-- डॉ विभूति आनन्द
-- श्री अजीत आजाद
--
6 हम पुछैत छी (कविता संग्रह)
विनीत उत्पल
-- राम भरोस कापड़ि ‘‘भ्रमर’’
--
--
7 भाग रौ आ बलचन्द्रा (नाटक)
विभा रानी
-- श्री अरविन्द ठाकुर
--
--
8 अिर्चस (कविता संग्रह)
ज्योति सुनीत चाैधरी
-- डॉ विभूति आनन्द
--
-- श्री रामानन्द झा ‘‘रमण’’
9 नताशा पहिल चित्र श्रंृखला
देवांशु वत्स
-- श्री प्रफूल कुमार मौन
--
--
10 नेपथ्य (नाटक)
-- डॉ रेबती रमण लाल
-- डाॅ रामावतार यादव
--
--
--
11 नैमिकानन (कथा संग्रह)
-- श्री फूलचन्द्र िमश्र
--
--
--
--
12 िमथिला सृजन पत्रिका
सम्पादक- ऋृषि बशिष्ठ
-- डॉ राजेन्द्र विमल
--
--
--
--
एहि तरहेँ दर्जन भरि पोथीक लोकार्पण भेल। आ एहि कथा गोष्ठीमे 30 टा कथाक पाठ भेल जाहिमे सभसँ खुशीक बात ई जे दजनोसँ बेसी नव कथा कारक उपस्थिति रहय।
कथाकार आ कथाक नाम एहि तरहेँ छल-
श्री सुरेन्द्र नाथ सुमन- संस्कृति
श्रीमती विजेता चौधरी- भ्रूण
िवभूति आनन्द- अरे
जिज्ञासू जी- विवस्ता
जगदीश प्रसाद मंडल- प्रेमी
रौशन जनक पुरी-
ऋृषि बशिष्ठ- जौवॉं
उमेश मंडल- जेहन मन तेहन जिनगी
रघुनाथ मुखिया- वंश
महाकान्त ठाकुर- दियादी
चौधरी ज्यंत तुलसी- के वुरि
बेचन ठाकुर- पत्तावाली
कपिलेश्वर राउत- सलाह
मनोज कुमार मंडल- घासवाहिनी
खड़ानन्द यादव- गहुमक बोड़ा
दुर्गानन्द मंडल- लाल भौजी
राजदेव मंडल-
(साभार विदेह www.videha.co.in)
निर्मलीसँ जनकपुर धाम
प्राय: बच्चेसँ जनकपुर धाम जेबाक जिज्ञासा छल जे आयोजित कथा गोष्ठी ‘‘सगर राति दीप जरय’’ क 69म खेपमे शामिल भऽ 3 अप्रैल 2010 केँ पूरा भेल। जहिसँ दोहरी खुशी भेटल।
चारिए बजे भोरमे निर्मली टीशनपर पहुँचलहुँ। करीब पॉंच बजे गाड़ी खुजल आ समएसँ सकड़ी टीशनपर उतरलहुँ। सकड़ीसँ जयनगरक मेल नहि रहने मेक्सी पकड़ि मधुबनी गेलहुँ। मधुबनीसँ पुन: मेक्सी पकड़ि कलवाही, नगर कोठी होइत जयनगर गेलौं। तखन ढाइ बजैत रहै। जयनगरसँ जनकपुर लेल नेपाली ट्रेन
तीन बजेमे खुलत से जानकरी भेल। तहि बीच हमसभ भोजन केलौं आ समएसँ अबिब ट्रेनमे बैसि रहलौं।
मैक्सीमे जखन भीड़ आ गुमारसँ परेशान रही तँ मनमे हुअए जे कोनो तरहेँ जयनगर तक पहुँचक अछि। ओइठॉंसँ तँ ट्रेनक यात्रा रहत। मुदा, ट्रेनक नमती आ भीड़ देखि हुअए जे बसे जेकॉं हाल हएत। सएह भेल। मुदा, तइयो मनमे खुशी रहए िकएक तँ दस-बारह गोटाक संगवे रहए जहिसँ यात्रामे कोनो कठिनाइ नहि बुझना गेल, भरि रस्ता गप-सप्प चलैत रहल। नव कथाकारक संग-संग श्री जगदीश प्रसाद मंडल आ श्री राजदेव मंडल सेहो संगमे रहथि, जे हमरा सबहक लेल सौभाग्य छल। गोसॉंइ लुक-झुक करिते छल तावत् गाड़ी जनकपुर धाम पहुँचि गेल।
ट्रेनसँ उतरि हमसभ रामानन्द युवा क्लब जेबाक लेल आगॉं बढ़लौं। िमथिला महोत्सवसँ जनकपुर भरि बाजारमे रमणीय वातावरण छल। जहिसँ चाह-जलपान केनाइ आकि रिक्सासँ गेनाइ सभ कियो िबसरि गेलाह। पएरे सभ बिदा भेलौं। देखैत-सुनैत समए रामानन्द युवा क्लबमे प्रवेश केलौं। दोसर मंजिलपर पएर दइते रही आकि श्री राजाराम सिंह राठौरजी भेंट भऽ गेला। हमरा सभकेँ देखते हाथ पकड़ि बड़ी अहलाद्सँ यथोचित स्थानपर लऽ गेलथि। उपस्थित साहित्यकार लोकनिकेँ देखि हर्ष भेल। दीप जरा गोष्ठिक शुभारम्भ भेल। संयोजक महोदय श्री राजाराम सिंह राठौर सभ व्यवस्था बड़ नीक जेकॉं कएने रहथि। कथा जानकीक नामसँ एकटा बैनर टांगल रहै। आदरणीय रमानन्द झा “रमण”जी पहिनहिसँ उपस्थित रहथि। गोष्ठीक संचालन आदरणीय फूलचन्द्र िमश्रजीकेँ देल गेलनि।
गोष्ठिक शुरूहेँमे दर्जन भरि पोथीक लोकार्पण कएल गेल, जहिमे मौलाइल गाछक फूल (उपन्यास) आ िमथिलाक बेटी (नाटक)- जगदीश प्रसाद मंडल। भाग रौ आ बलचन्द्रा (नाटक)- िवभा रानी। हम पुछैत छी (कविता संग्रह)- विनीत उत्पल। नताशा (कॉंिमक्स)- देवांशु वत्स। अर्चिस (कविता संग्रह)- ज्योति सुनीत चौधरी। नेपथ्य (नाटक संग्रह) आ नैमिकानन (कथा संग्रह)- सम्पादक- रेबती रमण लाल। िमथिला सृजन (पत्रिका) सम्पादक ऋृषि बशिष्ठ। विदेह- कथा 2009-10, प्रबन्ध समालोचना 2009-10 आ विदेह पद्य 2009-10 सम्पादक गजेन्द ठाकुर जीक रहनि।
एहि तरहेँ बारह गोट पोथीक लोर्कापणक शिलशिला करीब घंटा भरिक रहल। फोटोग्राफर सभ फोटो खिचलनि। तहिबीच चाह-जलपान सेहो चलल। रजिस्टरपर सभ कथाकार अपन-अपन उपस्थिति आ कथाक नाम दर्ज केलनि। पहिल कथा श्री सुरेन्द्र नाथ, दोसर श्रीमती िवजेता चौधरी, तेसर िवभूति आनन्द फेर िजज्ञासु जी, जगदीश प्रसाद मंडल, रौशन जनकपुरी, अरविन्द ठाकुर, ऋृषि बशिष्ठ, उमेश मंडल, रघुनाथ मुखिया, महाकान्त ठाकुर, चौधरी जयंत तुलसी, बेचन ठाकुर, कपिलेश्वर राउत, मनोज कुमार मंडल, खड़ा नन्द यादव, राजदेव मंडल, दुर्गानन्द मंडल इत्यादि तीस गोट कथाकार कथा पाठ केलनि। तीन-तीन कथाक पाली होइत छल। एक पालीक पठित कथापर समीक्षा होइत रहए। प्रखर समीक्षक डॉ. रामावतार यादव, डॉ राजेन्द्र िवमल, रौशन जनकपुरी, डॉ रमानन्द झा रमण, श्री हीरेन्द्र कुमार झा, श्री योगानन्द झा, श्री अजीत आजाद आदि अपन दृष्टिकोण दैत समीक्षा रखलखिन। ई शिलशिला राति भरि चलैत रहल। लागि रहल छल जे ई नव कथाकारक लेल ट्रेनिंग काॅलेज सदृश्य अछि।
भिनसर छह बजे गोष्ठिक समापन भेल। अगिला कथा गोष्ठी 70म सगर राति दीप जरय केँ प्रस्ताव श्री योगानन्द झाजी रखलनि। आदरणीय रमानन्द झा रमण जीक संग-संग सभ साहित्यकार लोकनि सहर्ष एकरा स्वीकार केलनि। रजिस्टर आ दीप श्री राजाराम सिंह राठौर जी अगिला कथा उत्पल हेतु श्री योगानन्द झा जीकेँ देलनि। एकबेर सभ खुशी-खुशी थोपड़ी बजेलनि।
अगिला कथा गोष्ठीक स्थान- कविलपुर लहेरियासरय (दरभंगा)
तिथि- 12 जून 2010
संयोजक- श्री योगानन्द झा
कबिलपुर (दरभंगा)
रामानन्द युवा कल्व जनकपुर धाममे ३ अप्रैल २०१० 69म सगर राित दीप जरय- कथा गोष्ठीकेँ उद्दघाटन- डॉ रामावतार यादवकेँ द्वारा कएल गेल। संयोजक श्री राजाराम सिंह राठौर आ रामानन्द युवा कल्व रहथि।
12टा पोथीक विमोचनक कएल भेल
1 मौलाइल गाछक फूल (उपन्यास)
जगदीश प्रसाद मंडल
-- डॉ राजेन्द विमल
--
-- श्री रामनन्द झा ‘‘रमण’’
2 िमथिलाक बेटी (नाटक)
जगदीश प्रसाद मंडल
-- डॉ राजेन्द्र विमल
-- श्री रामानन्द झा ‘‘रमण’’
--
3 विदेह पद्द 2009-10
-- श्री हीरेन्द्र कुमार झा
--
-- श्री रामानन्द झा ‘‘रमण’’
4 िवदेह प्रवन्ध-समालोचना 2009-10
-- डॉ विभूति आनन्द
--
--
5 विदेह कथा 2009-10
-- डॉ विभूति आनन्द
-- श्री अजीत आजाद
--
6 हम पुछैत छी (कविता संग्रह)
विनीत उत्पल
-- राम भरोस कापड़ि ‘‘भ्रमर’’
--
--
7 भाग रौ आ बलचन्द्रा (नाटक)
विभा रानी
-- श्री अरविन्द ठाकुर
--
--
8 अिर्चस (कविता संग्रह)
ज्योति सुनीत चाैधरी
-- डॉ विभूति आनन्द
--
-- श्री रामानन्द झा ‘‘रमण’’
9 नताशा पहिल चित्र श्रंृखला
देवांशु वत्स
-- श्री प्रफूल कुमार मौन
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10 नेपथ्य (नाटक)
-- डॉ रेबती रमण लाल
-- डाॅ रामावतार यादव
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11 नैमिकानन (कथा संग्रह)
-- श्री फूलचन्द्र िमश्र
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12 िमथिला सृजन पत्रिका
सम्पादक- ऋृषि बशिष्ठ
-- डॉ राजेन्द्र विमल
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एहि तरहेँ दर्जन भरि पोथीक लोकार्पण भेल। आ एहि कथा गोष्ठीमे 30 टा कथाक पाठ भेल जाहिमे सभसँ खुशीक बात ई जे दजनोसँ बेसी नव कथा कारक उपस्थिति रहय।
कथाकार आ कथाक नाम एहि तरहेँ छल-
श्री सुरेन्द्र नाथ सुमन- संस्कृति
श्रीमती विजेता चौधरी- भ्रूण
िवभूति आनन्द- अरे
जिज्ञासू जी- विवस्ता
जगदीश प्रसाद मंडल- प्रेमी
रौशन जनक पुरी-
ऋृषि बशिष्ठ- जौवॉं
उमेश मंडल- जेहन मन तेहन जिनगी
रघुनाथ मुखिया- वंश
महाकान्त ठाकुर- दियादी
चौधरी ज्यंत तुलसी- के वुरि
बेचन ठाकुर- पत्तावाली
कपिलेश्वर राउत- सलाह
मनोज कुमार मंडल- घासवाहिनी
खड़ानन्द यादव- गहुमक बोड़ा
दुर्गानन्द मंडल- लाल भौजी
राजदेव मंडल-
(साभार विदेह www.videha.co.in)
Friday, August 19, 2011
उमेश मंडल सगर राति श्रोता कथा-सागरमे डुबकी लगेलन्हि-
उमेश मंडल
सगर राति श्रोता कथा-सागरमे डुबकी लगेलन्हि-
मधुबनी जिलाक लखनौर प्रखण्डक बेरमा गामक मध्य विद्यालय परिसरमे २ अक्टूबर २०१०केँ मैथिली कथा आन्दोलनकेँ समर्पित ‘सगर राति दीप जरय’क ७१म आयोजन श्री जगदीश प्रसाद मंडलक संयोजकत्वमे कएल गेल। दीप प्रज्वलन सह उद्घाटन श्री उग्र नारायण मिश्र ‘कनक’ संध्या ६:३० बजे केलनि। तत्पश्चात डॉ. रमानन्द झा रमण, बेरमाक स्व. विजय नाथ ठाकुर (चेतना समितिसँ जुड़ल रहथि।) चर्चा करैत गामक (बेरमाक) साहित्यक इतिहासक चर्चा केलनि।
गोष्ठिक सुभारम्भ स्वागत गीतसँ, सपत्नी संजीव कुमार ‘समा’, अजय कुमार कर्ण, बेचन ठाकुर, आ जागेश्वर प्रसाद राउत जीक द्वारा भेल। तत्पश्चात ‘मंगला चरण’क उच्चारण शिवकुमार मिश्र जी केलनि।
गोष्ठिक अध्यक्षता डॉ. तारानन्द वियोगी आ संचालन श्री अशोक कुमार मेहता जी केलनि। कार्यक्रमकेँ आगाँ बढ़ाओल गेल पोथीक लोकार्पणसँ जेकर सूचि एहि तरहेँ अछि-
१ प्रलय रहस्य (कविता संग्रह) लेखक- तारानन्द वियोगी, लोकार्पणकर्ता- डॉ. रमानन्द झा रमण,
२ जीबन-मरण (उपन्यास) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- श्री कुमार सहाएब आ श्री रमाकान्त राय ‘रमा’,
३ तरेगन (बाल प्रेरक कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- डॉ. रमानन्द झा ‘रमण’ आ डॉ. फूलचन्द्र मिश्र ‘रमण’,
४ जीवन-संघर्ष (उपन्यास) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- श्री अशोक (पटना) आ श्री उग्रनारायण मिश्र ‘कनक’,
५ सी.डी. तिरहुत्ता (विदेह ई पत्रिका, ६०म अंक धरि) संपादक गजेन्द्र ठाकुर, लो.- डॉ. योगानन्द झा, श्री उग्रनारायण मिश्र ‘कनक’ आ श्री नारायण जी,
६ सी.डी. देवनागरी (विदेह ई पत्रिका, ६०म अंक धरि) सं. गजेन्द्र ठाकुर, लो.- डॉ. तारानन्द वियोगी, डॉ. मंजर सुलेमान आ श्री अजीत आजाद,
७ निबंध-तरंग (निबंध-संग्रह) ले. श्रीपति सिंह, लो.- डॉ. रमानन्द झा ‘रमण’
८ अलका (कथा संग्रह) ले. कमलकान्त झा, लो.- डॉ. धनाकर ठाकुर आ डॉ. खुशीलाल झा।
छह गोट पोथी आ दू गोट सी.डी.क लोकार्पणक पश्चात कथा पाठ आ तेकर समीक्षा/समालोचना प्रारम्भ भेल। चारि-पाँच कथा/लघुकथाक पाठ आ तेकर समीक्षा चारि-पाँच समीक्षकक एक पालीमे होइत रहल। एहि तरहेँ भरि रातिमे सात पालीक सुन्दर प्रदर्शन भेल। नव पुरान कथाकारक अलावे बाल-कथाकार सेहो अपन नूतन कथाक पाठ केलनि। कथा आ कथाक समीक्षा संपूर्ण श्रोताकेँ आकर्षित कएलकनि। ताहिपर श्रोताक टिप्पणी सेहो आएल। नव-कथाकारकेँ श्री अशोक, डॉ. फूलचन्द्र मिश्र रमण आ डाँ रमानन्द झा रमणक संग-संग आरो समीक्षक आपन खुशी व्यक्त केलनि आ दिशा निर्देश सेहो देलनि। अध्यक्षीय भाषणमे डाँ तारानन्द वियोगी सेहो बेरमाक नव-कथाकारक संग-संग नव दृष्टिकोणक कथाकारक कथापर साकारात्मक विचार रखलनि।
श्रोताक मनोयोग श्रवणसँ प्रभावित भऽ कथाकार लोकनिक उत्साह भरि राति बनल रहल। उपरोक्त वर्णित कथाकार आ समीक्षकक अलावे कमलेश झा, उमेश नारायण कर्ण, शंकर झा, बुचरू पासवान, महेन्द्र नारायण राम, विनय विश्व वन्धु, रघुनाथ मुखिया, आशीष चमन, पंकज सत्यम्, ऋृषि बशिष्ठ, राजदेव मंडल, िवनय मोहन ‘जगदीश’ इत्यादिक गरिमाय उपस्थित छल रहए।
दर्जनोसँ ऊपर श्रोताक टिप्पणीमे- रमण किशोर झा, शशिकान्त झा, विरेन्द्र यादव, लाल कुमार राय, घुरन राम, मो. इब्राहिम, दीपक कुमार झा, राम विलास साहु आ राम प्रवेश मंडलक महत्वपूर्ण रहल। श्रोताक अनेको विषए-वस्तुपर टिप्पणीक संग-संग एकटा महत्वपूर्ण टिप्पणी कपिलेश्वर राउत जीक द्वारा- ‘दर्जनक-दर्जन कथा पाठ भेल नीक लागल मुदा हम सभ किसान छी किसानी जिनगीक (खेती-बाड़ी) बात-चीत/विषए-वस्तुक चर्च कथामे नहि भऽ पावि रहल अछि।’
एहि टिप्पणीपर श्री अशोक अपन विचार व्यक्त करैत कहलनि- ‘खेती-बाड़ी, किसानी जिनगी आ गाम-घरक चर्चा वास्तवमे कम कएल गेल अछि, ने सिर्फ मैथिली साहित्यमे वरण् हिन्दी साहित्यमे सेहो एकर अभाव माने जतेक अबैक चाही ओते नहि आएल अछि।
भिनसर छह बजे एहि ७१ गोष्ठीकेँ अन्त करैत श्री अरविन्द ठाकुर (सुपौल) अग्रिम कथा गोष्ठी ७२म आयोजन हेतु दीप आ उपस्थिति पुस्तिका लेलनि। स्पष्ट अछि जे अगिला कथा गोष्ठी दिसम्बर मासमे सुपौलमे आयोजित हएत।(साभार विदेह www.videha.co.in)
सगर राति श्रोता कथा-सागरमे डुबकी लगेलन्हि-
मधुबनी जिलाक लखनौर प्रखण्डक बेरमा गामक मध्य विद्यालय परिसरमे २ अक्टूबर २०१०केँ मैथिली कथा आन्दोलनकेँ समर्पित ‘सगर राति दीप जरय’क ७१म आयोजन श्री जगदीश प्रसाद मंडलक संयोजकत्वमे कएल गेल। दीप प्रज्वलन सह उद्घाटन श्री उग्र नारायण मिश्र ‘कनक’ संध्या ६:३० बजे केलनि। तत्पश्चात डॉ. रमानन्द झा रमण, बेरमाक स्व. विजय नाथ ठाकुर (चेतना समितिसँ जुड़ल रहथि।) चर्चा करैत गामक (बेरमाक) साहित्यक इतिहासक चर्चा केलनि।
गोष्ठिक सुभारम्भ स्वागत गीतसँ, सपत्नी संजीव कुमार ‘समा’, अजय कुमार कर्ण, बेचन ठाकुर, आ जागेश्वर प्रसाद राउत जीक द्वारा भेल। तत्पश्चात ‘मंगला चरण’क उच्चारण शिवकुमार मिश्र जी केलनि।
गोष्ठिक अध्यक्षता डॉ. तारानन्द वियोगी आ संचालन श्री अशोक कुमार मेहता जी केलनि। कार्यक्रमकेँ आगाँ बढ़ाओल गेल पोथीक लोकार्पणसँ जेकर सूचि एहि तरहेँ अछि-
१ प्रलय रहस्य (कविता संग्रह) लेखक- तारानन्द वियोगी, लोकार्पणकर्ता- डॉ. रमानन्द झा रमण,
२ जीबन-मरण (उपन्यास) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- श्री कुमार सहाएब आ श्री रमाकान्त राय ‘रमा’,
३ तरेगन (बाल प्रेरक कथा संग्रह) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- डॉ. रमानन्द झा ‘रमण’ आ डॉ. फूलचन्द्र मिश्र ‘रमण’,
४ जीवन-संघर्ष (उपन्यास) ले. जगदीश प्रसाद मंडल, लो.- श्री अशोक (पटना) आ श्री उग्रनारायण मिश्र ‘कनक’,
५ सी.डी. तिरहुत्ता (विदेह ई पत्रिका, ६०म अंक धरि) संपादक गजेन्द्र ठाकुर, लो.- डॉ. योगानन्द झा, श्री उग्रनारायण मिश्र ‘कनक’ आ श्री नारायण जी,
६ सी.डी. देवनागरी (विदेह ई पत्रिका, ६०म अंक धरि) सं. गजेन्द्र ठाकुर, लो.- डॉ. तारानन्द वियोगी, डॉ. मंजर सुलेमान आ श्री अजीत आजाद,
७ निबंध-तरंग (निबंध-संग्रह) ले. श्रीपति सिंह, लो.- डॉ. रमानन्द झा ‘रमण’
८ अलका (कथा संग्रह) ले. कमलकान्त झा, लो.- डॉ. धनाकर ठाकुर आ डॉ. खुशीलाल झा।
छह गोट पोथी आ दू गोट सी.डी.क लोकार्पणक पश्चात कथा पाठ आ तेकर समीक्षा/समालोचना प्रारम्भ भेल। चारि-पाँच कथा/लघुकथाक पाठ आ तेकर समीक्षा चारि-पाँच समीक्षकक एक पालीमे होइत रहल। एहि तरहेँ भरि रातिमे सात पालीक सुन्दर प्रदर्शन भेल। नव पुरान कथाकारक अलावे बाल-कथाकार सेहो अपन नूतन कथाक पाठ केलनि। कथा आ कथाक समीक्षा संपूर्ण श्रोताकेँ आकर्षित कएलकनि। ताहिपर श्रोताक टिप्पणी सेहो आएल। नव-कथाकारकेँ श्री अशोक, डॉ. फूलचन्द्र मिश्र रमण आ डाँ रमानन्द झा रमणक संग-संग आरो समीक्षक आपन खुशी व्यक्त केलनि आ दिशा निर्देश सेहो देलनि। अध्यक्षीय भाषणमे डाँ तारानन्द वियोगी सेहो बेरमाक नव-कथाकारक संग-संग नव दृष्टिकोणक कथाकारक कथापर साकारात्मक विचार रखलनि।
श्रोताक मनोयोग श्रवणसँ प्रभावित भऽ कथाकार लोकनिक उत्साह भरि राति बनल रहल। उपरोक्त वर्णित कथाकार आ समीक्षकक अलावे कमलेश झा, उमेश नारायण कर्ण, शंकर झा, बुचरू पासवान, महेन्द्र नारायण राम, विनय विश्व वन्धु, रघुनाथ मुखिया, आशीष चमन, पंकज सत्यम्, ऋृषि बशिष्ठ, राजदेव मंडल, िवनय मोहन ‘जगदीश’ इत्यादिक गरिमाय उपस्थित छल रहए।
दर्जनोसँ ऊपर श्रोताक टिप्पणीमे- रमण किशोर झा, शशिकान्त झा, विरेन्द्र यादव, लाल कुमार राय, घुरन राम, मो. इब्राहिम, दीपक कुमार झा, राम विलास साहु आ राम प्रवेश मंडलक महत्वपूर्ण रहल। श्रोताक अनेको विषए-वस्तुपर टिप्पणीक संग-संग एकटा महत्वपूर्ण टिप्पणी कपिलेश्वर राउत जीक द्वारा- ‘दर्जनक-दर्जन कथा पाठ भेल नीक लागल मुदा हम सभ किसान छी किसानी जिनगीक (खेती-बाड़ी) बात-चीत/विषए-वस्तुक चर्च कथामे नहि भऽ पावि रहल अछि।’
एहि टिप्पणीपर श्री अशोक अपन विचार व्यक्त करैत कहलनि- ‘खेती-बाड़ी, किसानी जिनगी आ गाम-घरक चर्चा वास्तवमे कम कएल गेल अछि, ने सिर्फ मैथिली साहित्यमे वरण् हिन्दी साहित्यमे सेहो एकर अभाव माने जतेक अबैक चाही ओते नहि आएल अछि।
भिनसर छह बजे एहि ७१ गोष्ठीकेँ अन्त करैत श्री अरविन्द ठाकुर (सुपौल) अग्रिम कथा गोष्ठी ७२म आयोजन हेतु दीप आ उपस्थिति पुस्तिका लेलनि। स्पष्ट अछि जे अगिला कथा गोष्ठी दिसम्बर मासमे सुपौलमे आयोजित हएत।(साभार विदेह www.videha.co.in)
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