Friday, August 19, 2011

सुजित कुमार झा जनकपुरमे पागे पाग

सुजित कुमार झा
जनकपुरमे पागे पाग

पागक व्यवसायीकरण पर किया नहि सोची ?
सुजीतकुमार झा
राष्ट्रीय निजी तथा अवासिय विद्यालय एशोसिएशन (एनप्याब्सन)क राष्ट्रीय अधिवेशनमे सहभागि होवय जनकपुर आएल सदस्य सभकेँ माथ पर एखन कोनो अन्य टोपी नहि पाग मात्र रहैत अछि । जतय जाउ खाली पाग पहिरने लोक भेटत ।
राष्ट्रीय समाचार समितिक काठमाण्डू कार्यालयमे कार्यरत पत्रकार प्रकाश सिलवाल कहैत छथि — अहि बेर जनकपुर सँ पागे सनेश लऽ जा रहल छी । एन प्याब्सनक कार्यक्रममे हुनका पाग पहिराओल गेल छल । ओ समारोहमे एक हजार सँ बेसी पाग वितरण भेल छल ।
एन प्याब्सनक केन्द्रीय अध्यक्ष गीता राणा पागकेँ देशक पहिचान सँ जोडैÞत
छथि । बातचितक क्रममे ओ कहलन्हि — ‘ढाका टोपी जतबे नेपालीक लेल प्रियगर अछि ओतबे प्रियगर पाग सेहो अछि ।’ हुनका सेहो जनकपुरमे पाग पहिरने घुमैत देखल गेल । पाग पहिराबयकेँ परम्परा मिथिलाञ्चलमे बहुत लम्बा समय सँ चलैत आएल अछि । विवाह, उपनयनमे विशेष रुपसँ पाग पहिराओल जाइत अछि । ओना किछ वर्ष सँ सम्मान स्वरुप पाग पहिराओल जएबाक चलन बढल अछि । आब पागकेँ सम्मानमे मात्र नहि व्यवसायिक रुपमे विकासक बात सेहो उठय लागल अछि ।
पत्रकार एवं मैथिली साहित्यकार श्याम सुन्दर शशि कहैत छथि — ‘व्यवसायिक रुपमे आगा बढावयसँ पहिने बनावटमे समय सापेक्ष बदलाब करय परत ।’ माथमे खप्प सँ बैसत तखने लोक एकरा कस्सि कऽ स्वीकार करत ओ कहलन्हि । पागक दोकानदारसभ कहैत छथि— ‘एन प्याब्सनक कार्यक्रममे बहुत पाग बिक्री भेल अछि एक गोटे चारि–चारि टा पाग किनलन्हि ।’

पाग उद्योग पर विचार
पागकेँ बढैत मांगकेँ ध्यानमे रखैत जनकपुरमे सेहो अहि सँ जुडल लघु उद्योग खोलल जाय अहि पर जनकपुरक व्यापारीसभ छलफल करय लागल छथि । पहिले वर्षमे ४÷५ हजार पाग बिक्री होइत छल ओ पाग मधुवनी सँ आनि काम चलाओल जाइत छल । मुदा आब तीन चारि गुणा बिक्रीमे बढोतरी भेल अछि एहनमे बाहर सँ नहि आनल जा सकैत अछि व्यापारीसभ कहैत अछि । व्यापारी रामकुमार साह लगनमे मात्र नहि आन समयमे सेहो पागकेँ खोजी होइत रहैत अछि जानकारी दैत छथि ।
जनकपुर उद्योग वाणिज्य संघक कोषाध्यक्ष जितेन्द्र प्रसाद साह कहैत छथि ‘पाग उद्योग खोलवाक लेल वाणिज्य संघ सेहो प्रयत्न करत ।


१० वर्ष पूर्व जनकपुरमे पागो नहि भेटैत छल

जनकपुरमे पाग उद्योगकेँ बात उठि रहल अछि । मुदा १० वर्ष पूर्व एतयकेँ दोकानसभ पर पाग नहि भेटैत छल विवाह दानोक लेल मधुवनी आ दरभंगा सँ लोक पाग अनैत छल । पहिने विवाहदान सौराठ सँ होइत छल । ओतहि विवाह तय कएलक आ पाग लऽ आएल । जाहि कारण जनकपुरमे नहि कियौ पाग खोजी करैत छल आ नहि एतह बिक्री । जनकपुरक प्रसिद्ध स्थान जानकी मन्दिरक महन्थ रामतपेश्वर दास वैष्णव कहैत छथि—‘जानकी मन्दिरकेँ शतवार्षिकी हुऐ वा विशेष उत्सव दश वर्ष पहिने मधुवनी सँ पाग मंगबैत छलहँु ।’ अहि ठाम बिक्री भेला सँ सभकेँ सुविधा भेल अछि ओ कहलन्हि ।

मैथिलक पहिचान बनि रहल
मैथिलक पहिचान कि अछि ? अहि पर किछु वर्ष पूर्व तक पान मखान, माछ सहितक बात लोक कहैत छल । मुदा आब पाग बनि गेल अछि । पूरे मिथिलाञ्चलमे जतह कतहु कार्यक्रम होइत अछि सम्मानमे पागे रहैत अछि । नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठानक प्राज्ञ रमेश रञ्जन झा कहैत छथि पाग आइ सँ मात्र नहि सभ दिन सँ अपन क्रेज बनौने अछि । मुदा जाहि रुप सँ एकर प्रसार भऽ रहल अछि ई सुखद अछि ।

पागक विकासक लेल सरकार दिस सँ एकटा योजना आनय परत इमेज च्यानल टेलिभिजन सँ आवद्ध पत्रकार रामअशिष यादव कहैत छथि । ओ आगा कहलन्हि पाग आव सम्पूर्ण मैथिलक पहिचान वनि गेल अछि अहिमे वहस कएनाइ बुद्धिमता नहि भऽ सकैत अछि ।।(साभार विदेह www.videha.co.in)

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